दो महीने का इंतजार खत्म, हिमाचल के जलाशयों में फिर शुरू हुआ मछली पकड़ने का काम, पहले ही दिन बंपर उत्पादन!
पिछले साल की तुलना में इस साल हिमाचल में मछली उत्पादन में 13.31 मीट्रिक टन की बढ़ोतरी, गोविंद सागर में पकड़ी गई सबसे बड़ी मछली.

By ETV Bharat Himachal Pradesh Team
Published : August 16, 2026 at 8:30 PM IST
बिलासपुर: हिमाचल प्रदेश के जलाशयों में दो माह तक मछली पकड़ने का सीजन बंद रहा. 16 अगस्त को मछली पकड़ने का कार्य फिर से शुरू हो गया है, जिसके चलते पहले ही दिन 46.37 मीट्रिक टन मछली पकड़ी गई. पिछले साल बंद सीजन खुलने के पहले दिन 33.06 मीट्रिक टन मछली पकड़ी गई थी. इस तरह साल 2026 में पिछले साल की तुलना में मछली उत्पादन में 13.31 मीट्रिक टन की बढ़ोतरी दर्ज की गई है.
मछली पकड़ने का काम कर रहे 13 हजार मछुआरे
हिमाचल प्रदेश के जलाशयों, सामान्य नदी-नालों और उनकी सहायक नदियों में 13 हजार से ज्यादा मछुआरे मछली पकड़ने के काम कर रहे हैं और अपनी आजीविका अर्जित कर रहे हैं. प्रदेश के पांच प्रमुख जलाशय गोविंद सागर, पोंग डैम, चमेरा डैम, कोलडैम और रणजीत सागर करीब 43,785 हेक्टेयर क्षेत्र में फैले हैं, जिनमें 6300 से ज्यादा मछुआरे कार्यरत हैं. वहीं, करीब 2400 किलोमीटर लंबाई वाले सामान्य जल क्षेत्रों में 6700 से ज्यादा मछुआरे मछली पकड़ने के कार्य में लगे हैं.
बंद सीजन खुलने के पहले दिन पकड़ी गई इतनी मछली
- गोविंद सागर जलाशय से 28.16 मीट्रिक टन
- पोंग जलाशय से 17.23 मीट्रिक टन
- कोलडैम से 0.068 मीट्रिक टन
- चंबा और रणजीत सागर से 0.914 मीट्रिक टन
सबसे बड़ी 40 किलोग्राम की मछली पकड़ी
इस दौरान गोविंद सागर जलाशय के जगातखाना लैंडिंग सेंटर में बग्गी सहकारी सभा के मछुआरे सुख राम ने प्रदेश की सबसे बड़ी 40 किलोग्राम की बिग हेड मछली पकड़ी. पोंग डैम में जंबल मत्स्य सहकारी सभा के मछुआरे राकेश कुमार ने 22.60 किलोग्राम की कतला, चंबा जिले में संघारा मत्स्य सहकारी सभा के मछुआरे कुलदीप ने 11 किलोग्राम की सिल्वर कार्प और कोलडैम जलाशय में कसोल मत्स्य सहकारी सभा के मछुआरे प्यारे लाल ने 6.5 किलोग्राम की ग्रास कार्प पकड़ी.
इस समय अवधि में बंद रहता है मछली पकड़ने का सीजन
मत्स्य विभाग हिमाचल प्रदेश के निदेशक एवं प्रारक्षी ओम कान्त ठाकुर ने बताया कि मत्स्य संपदा के संरक्षण और मछलियों के प्राकृतिक प्रजनन को सुनिश्चित करने के लिए मत्स्य विभाग द्वारा सामान्य जल क्षेत्रों में प्रत्येक वर्ष 16 जून से 15 अगस्त तक दो माह का बंद सीजन रखा जाता है. इस अवधि में अधिकांश महत्वपूर्ण मछली प्रजातियां प्राकृतिक रूप से प्रजनन करती हैं, जिससे जल स्रोतों में मछली बीज का प्राकृतिक संग्रहण होता है.
"मत्स्य विभाग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों के समर्पित एवं सतत प्रयासों से बंद सीजन के दौरान मत्स्य संपदा के संरक्षण और अवैध मछली आखेट पर प्रभावी नियंत्रण सुनिश्चित किया गया. मछुआरों की आजीविका को बनाए रखने के साथ-साथ प्रदेश के जल स्रोतों में मत्स्य संपदा के संरक्षण के लिए विभाग निरंतर कार्य कर रहा है." - ओम कान्त ठाकुर, निदेशक एवं प्रारक्षी, मत्स्य विभाग हिमाचल प्रदेश
मत्स्य संपदा की सुरक्षा के लिए कैंप और उड़न दस्ते गठित
ओम कान्त ठाकुर ने बताया कि बंद सीजन के दौरान मत्स्य संपदा की सुरक्षा के लिए विशेष कर्मचारी बल तैनात कर कैंप और उड़न दस्ते गठित किए जाते हैं. इस साल बिलासपुर में कुल 19 कैंप और एक उड़नदस्ता, पोंग डैम में 17 कैंप और एक उड़न दस्ता और चंबा में 5 कैंप और एक उड़न दस्ता गठित किया गया. कर्मचारियों ने जलाशयों में नावों के जरिए और नदी-नालों और खड्डों के किनारों पर गाड़ियों एवं पैदल गश्त कर मत्स्य संपदा की सुरक्षा सुनिश्चित की गई.
2 माह में अवैध मछली आखेट के मामले
मत्स्य विभाग हिमाचल प्रदेश के निदेशक एवं प्रारक्षी ओम कान्त ठाकुर ने बताया कि 16 जून से 15 अगस्त 2026 तक चले बंद सीजन के दौरान अवैध मछली आखेट के 342 मामले पकड़े गए, जिनसे विभाग ने 3.64 लाख रुपये का मुआवजा प्राप्त किया. वहीं, साल 2026-27 में अब तक अवैध मछली आखेट के कुल 425 मामले पकड़े गए हैं और 4.25 लाख रुपये का मुआवजा वसूल किया गया है.

