शिक्षा विभाग में 1427 पदों को भरने का मामला, LDR टेस्ट को चुनौती से जुड़ी याचिका पर HC का सरकार से जवाब तलब
हिमाचल शिक्षा विभाग में 1427 पदों के लिए प्रस्तावित एलडीआर टेस्ट को चुनौती देने वाली याचिका पर हाईकोर्ट ने सरकार से जवाब तलब किया है.

By ETV Bharat Himachal Pradesh Team
Published : December 23, 2025 at 9:32 PM IST
शिमला: हिमाचल प्रदेश शिक्षा विभाग में 1427 पदों को भरने के लिए एलडीआर यानी लिमिटेड रिक्रूटमेंट डायरेक्ट टेस्ट आयोजित किया जाना है. ये टेस्ट अगले साल 22 फरवरी को तय किया गया है. इस टेस्ट को एक याचिका के जरिए हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी.
हाईकोर्ट ने उक्त पदों को भरने के लिए शिक्षा विभाग की तरफ से एसएमसी शिक्षकों के लिए आयोजित होने वाले टेस्ट पर सरकार से जवाब मांगा है. हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि अदालत के आगामी आदेश तक इस प्रक्रिया के आधार पर कोई भी अभ्यर्थी नियुक्ति इत्यादि के अधिकार की मांग नहीं कर सकेगा.
हिमाचल हाईकोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति विवेक सिंह ठाकुर व न्यायमूर्ति रोमेश वर्मा की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई की. खंडपीठ ने सभी पहलुओं को देखने के बाद एलडीआर टेस्ट आयोजित करने को लेकर सरकार से जवाब तलब किया.
सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के उल्लंघन का आरोप
याचिका में प्रार्थियों ने आरोप लगाया है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद शिक्षकों की नियमित नियुक्ति के बजाय हिमाचल में स्कूल शिक्षा बोर्ड के माध्यम से एलडीआर टेस्ट करवाया जा रहा है. 20 दिसंबर को जारी अधिसूचना के तहत 1427 शिक्षकों के पदों को भरने के लिए लिमिटेड डायरेक्ट रिक्रूटमेंट टेस्ट होना है.
यहां बता दें कि पिछले कल ही शिक्षा मंत्री ने विभाग की समीक्षा बैठक में इस टेस्ट को लेकर कुछ निर्देश जारी किए थे. यह टेस्ट 22 फरवरी 2026 को होना प्रस्तावित है.
पात्रता को लेकर उठे सवाल
याचिकाकर्ताओं ने हाईकोर्ट में कहा कि इस टेस्ट में हिस्सा लेने के लिए केवल 2012 की एसएमसी पॉलिसी के तहत नियुक्त एसएमसी शिक्षकों को पात्र बनाया गया है. इसमें न्यूनतम सेवा अवधि पांच वर्ष रखी गई है.
नियमित भर्तियों की मांग
प्रार्थियों ने अदालत से आग्रह किया है कि राज्य सरकार को सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का उल्लंघन करने से रोका जाए. साथ ही मांग की गई है कि शिक्षकों की नियमित भर्तियां सीधे तौर पर डायरेक्ट रिक्रूटमेंट के माध्यम से करवाई जाएं. याचिकाकर्ताओं का कहना है कि यदि राज्य सरकार को इस प्रक्रिया को पूरा करने दिया गया, तो इसका सीधा असर बेरोजगार शिक्षकों की नियुक्ति पर पड़ेगा.
गौरतलब है कि हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने पहले एसएमसी शिक्षकों को हटाने के निर्देश दिए थे. इसके बाद प्रभावित शिक्षकों और सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी. सुप्रीम कोर्ट ने सरकार के भरोसे के बाद याचिका का निपटारा किया था कि भविष्य में न तो अस्थायी शिक्षकों की भर्ती होगी और न ही एसएमसी शिक्षकों को नियमित किया जाएगा.
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