राज्य गरीब, जन सेवक अमीर, हिमाचल पर 1 लाख करोड़ का कर्ज, आर्थिक संकट को लेकर सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस
हिमाचल में आर्थिक संकट गहराता नजर आ रहा है. जिससे अब लोगों में माननीयों के वेतन बढ़ोतरी पर बहस छिड़ गई है.

By ETV Bharat Himachal Pradesh Team
Published : February 12, 2026 at 12:35 PM IST
|Updated : February 12, 2026 at 1:36 PM IST
शिमला: इस समय हिमाचल प्रदेश में RDG खत्म होने के कारण उपजने वाले संभावित आर्थिक संकट को लेकर बहस छिड़ी है. आम जनता तंज के लहजे में कह रही है कि राज्य का खजाना बेशक खाली हो जाए, लेकिन जनसेवकों का बैंक बैलेंस कभी कम नहीं होता. पूर्व में जयराम सरकार के दौरान माननीयों के वेतन बढ़ने का शोर मचा था, लेकिन कोविड और अन्य मसलों को लेकर तब परहेज किया गया. वर्तमान में व्यवस्था परिवर्तन का दावा करने वाली सुख की सरकार में जरूर माननीयों के वेतन में बढ़ोतरी हुई है. सरकार के सभी मंत्री करोड़पति हैं. लगभग सभी विधायक भी करोड़पति हैं. वेतन में बढ़ोतरी के बाद अब उनकी संपत्ति और बढ़ने के आसार हैं. ऐसे में इस विषय पर फिर से चर्चा प्रासंगिक हो गई है.

ये है सीएम और मंत्रियों का वेतन
विधानसभा की सुख सुविधा कमेटी की सिफारिश के बाद सदन की तरफ से वेतन बढ़ाए जाने वाले बिल की मंजूरी के बाद न्यू वेतन स्ट्रक्चर के अनुसार सीएम का वेतन अब 3.40 लाख रुपए व एमएलए का वेतन 2.97 लाख रुपए है. राज्यपाल की मंजूरी के बाद हिमाचल प्रदेश विधानसभा (सदस्यों के भत्ते व पेंशन) संशोधन विधेयक 2025 (2025 के विधेयक संख्यांक 9) के लागू होने के बाद एमएलए का वेतन 2.97 लाख मासिक है. इसमें वेतन व भत्ते सभी शामिल हैं. पहले एमएलए का वेतन 2.10 लाख के करीब था. नए स्ट्रक्चर के अनुसार अब एमएलए का बेसिक वेतन 55 हजार रुपए से बढ़ाकर 85 हजार रुपए किया गया है. कार्यालय भत्ता जो पहले 30 हजार मासिक हुआ करता था, अब 90 हजार मासिक हो चुका है. सीएम को अभी तक 2.65 लाख रुपए मासिक के करीब वेतन व भत्ते मिलते थे. अब ये बढ़कर 3.40 लाख रुपए हो गए. सीएम का सत्कार भत्ता अब डेढ़ लाख रुपए मासिक होगा. ये पहले 95 हजार रुपए था. विधानसभा स्पीकर व कैबिनेट मंत्रियों का वेतन भत्तों को मिलाकर अब 3.30 लाख रुपए के करीब होगा.

कौन है सबसे अमीर और गरीब मंत्री ?
उल्लेखनीय है कि हिमाचल प्रदेश में इससे पहले आखिरी बार वीरभद्र सिंह सरकार के समय वेतन व भत्ते बढ़ाए गए थे. उसके बाद ये पहली बढ़ोतरी है. वीरभद्र सिंह सरकार ने साल 2016 में ये बढ़ोतरी की थी. मौजूदा सरकार में सबसे अमीर मंत्री विक्रमादित्य सिंह हैं. उनकी संपत्ति सौ करोड़ रुपए से भी अधिक है. सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू व डिप्टी सीएम मुकेश अग्निहोत्री भी करोड़पति हैं. भाजपा और कांग्रेस के एमएलए भी करोड़पति हैं. अगर कैबिनेट मंत्रियों की बात की जाए तो दिलचस्प ये है कि राजस्व मंत्री जगत नेगी सबसे गरीब मंत्री हैं, लेकिन ये गरीबी भी करोड़ों की है. उनकी संपत्ति बेशक मंत्रियों में सबसे कम है, लेकिन ये भी तीन करोड़ रुपए से अधिक है. सोशल मीडिया पर माननीयों की अमीरी के चर्चे हैं. जनता कह रही है कि अगर संकट है तो इस संकट को सुलझाने की पहल भी घर से ही करनी होगी. ये भी सुगबुगाहट है कि आने वाले समय में माननीयों के वेतन भत्तों को लेकर कोई कटौती हो सकती है.
'मुख्यमंत्री को खुद से करनी होगी शुरुआत'
मोहिंदर नाथ सोफत ने सोशल मीडिया पर मुख्यमंत्री सुखविंदर सुक्खू को आर्थिक संकट से उबरने की नसीहत दी है. उनका कहना है कि अगर हिमाचल को आर्थिक संकट से बचाना है तो सीएम को इसकी शुरुआत खुद से करनी होगी. बिना त्याग किए और बिना कड़े कदम उठाए हिमाचल को आत्मनिर्भर बनाने का सपना पूरा नहीं होगा. मोहिंदर नाथ सोफत ने कहा कि वित्त सचिव द्वारा RDG बंद होने से प्रदेश पर आए आर्थिक संकट पर प्रस्तुति दी गई. जिसमें उन्होंने साफ तौर पर कहा कि सरकार का खजाना खाली है और जनता को दी गई सभी सब्सिडी पर कटौती करनी होगी, लेकिन इसकी शुरुआत सीएम सुक्खू को खुद से ही करनी होगी. सरकार के खर्चों को कम किया जाए. इस वित्तीय स्थिति में मुख्यमंत्री द्वारा हेलीकॉप्टर का उपयोग और 30 से ज्यादा गाड़ियों का काफिला उचित नहीं है. भले ही इससे खजाना नहीं भरेगा, लेकिन जनता के बीच के सकारात्मक संदेश जाएगा. जिसके बाद जनता भी मुख्यमंत्री के साथ खड़ी होगी और उनके फैसलों का स्वागत करेगी.
'आपदा को अवसर में बदलें सीएम'
सोशल मीडिया यूजर पंडित कृष्ण भानू ने फेसबुक पर पोस्ट करते हुए लिखा कि अगर वो सीएम होते आपदा को अवसर में बदल लेते. उनका कहना है कि 'समस्या आगे बढ़ने का मौका देती है. मैं तुरंत हेलीकॉप्टर त्याग देता और गाड़ी के जरिए जनता के बीच जाता, गाड़ियों के काफिले को भी कम कर देता. कड़े आर्थिक प्रबंधन की शुरुआत मैं खुद से करता. मंत्रियों-विधायकों को विश्वास में लेकर वेतन और भत्तों में कटौती करने का प्रस्ताव प्रस्तुत करता. सरकारी गाड़ियों के फिजूल परिचालन पर व्यावहारिक अंकुश लगाता और कर्मचारियों से सहयोग की अपील करता.' पंडित कृष्ण भानू ने कहा कि सीएम को आर्थिक प्रबंधन की शुरुआत खुद से करनी होगी और फिर सरकार एकजुट होकर जनता के बीच जाकर उन्हें केंद्र की भेदभावपूर्ण नीतियों से वाकिफ कराएं. पहाड़ के लोग सरल हैं लेकिन इतने भी नहीं कि समझ न सके कि प्रदेश के साथ चल क्या रहा है.

