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प्राइवेट सेक्टर में गया बिजली बोर्ड तो सुविधा बढ़ेगी या आम जनता को लगेगा महंगाई का करंट? जानिए सबकुछ

RDG बंद करने और बिजली वितरण कंपनियों के निजीकरण की ओर इशारा करने वाली प्रेजेंटेशन से कर्मचारियों से लेकर आम जनता सभी चिंतित हैं.

HPSEBL Privatization
हिमाचल प्रदेश में बिजली बोर्ड को लेकर नई बहस (ETV Bharat GFX)
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By ETV Bharat Himachal Pradesh Team

Published : February 10, 2026 at 3:49 PM IST

9 Min Read
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शिमला: हिमाचल प्रदेश में बिजली बोर्ड के भविष्य को लेकर सियासी और प्रशासनिक गलियारों में नई बहस छिड़ गई है. फाइनेंस कमीशन की सिफारिशों के बाद राज्य के वित्त विभाग द्वारा RDG बंद करने और बिजली वितरण कंपनियों के निजीकरण की ओर इशारा करने वाली प्रेजेंटेशन ने कर्मचारियों से लेकर आम जनता तक की चिंता बढ़ा दी है. मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू, उनकी कैबिनेट और मीडिया के सामने वित्त सचिव दिवेश कुमार का यह कहना कि, "हमें भी इस दिशा में चलना पड़ेगा, वी हैव टू प्राइवेटाइज", अब सियासी बयान नहीं, बल्कि एक संभावित नीति की आहट माना जा रहा है.

प्रेजेंटेशन के बाद बिजली बोर्ड के निजीकरण को लेकर जहां सरकार की मंशा पर सवाल उठने लगे हैं, वहीं बिजली बोर्ड यूनियन खुलकर विरोध में उतर आई है. कर्मचारियों के भविष्य, पेंशनर्स की सुरक्षा और आम उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ने वाले असर को लेकर ज्वाइंट एक्शन कमेटी ने सरकार को आगाह किया है. अब सवाल यह है कि अगर बिजली बोर्ड प्राइवेट सेक्टर के हाथों में गया, तो क्या वाकई सेवाएं बेहतर होंगी या फिर आम जनता को महंगाई का करंट झेलना पड़ेगा? इसको लेकर ईटीवी भारत ने ज्वाइंट एक्शन कमेटी एम्पलाइज इंजीनियर एंड पेंशनर्स के सह संयोजक हीरालाल से बात की. जिन्होंने बिजली बोर्ड के निजीकरण से कर्मचारियों और आम जनता पर पड़ने वाले प्रभावों के बारे में अपनी बात रखी.

बिजली बोर्ड कर्मचारी यूनियन सह संयोजक हीरालाल वर्मा (ETV Bharat)

टैरिफ में होगी कई गुना वृद्धि

हिमाचल प्रदेश सचिवालय में RDG पर वित्त विभाग की तरफ से दी गई प्रेजेंटेशन में बिजली बोर्ड को निजी हाथों में सौंपे जाने के हवाले को लेकर पूछे गए सवाल के जवाब में ज्वाइंट एक्शन कमेटी एम्पलाइज इंजीनियर एंड पेंशनर्स एसोसिएशन के सह संयोजक हीरालाल वर्मा ने कहा कि, "वित्त सचिव के बयान से मैं डिसएग्री करता हूं. फाइनेंस कमीशन ने जो रिपोर्ट दी है, वह रिकमेंडेशन यूनियन गवर्नमेंट की होती है. केंद्र सरकार उसमें से जिसको अप्रूव करती है, वह राज्यों को पास ऑन होती है. अभी जो RDG का मैटर था, उसको केंद्र सरकार ने अप्रूव कर राज्यों को भेजा है. लेकिन, फाइनेंस कमीशन ने बिजली बोर्ड पर जो रिपोर्टिंग की है. उसको केंद्र सरकार ने अप्रूव नहीं किया है. ऐसे में जो भी सिफारिश फाइनेंस कमीशन की है, वह राज्य पर लागू नहीं होती है."

हीरालाल वर्मा ने कहा कि, जो भी उनकी सिफारिश से हैं, वह केंद्र सरकार के माध्यम से होती है. इसलिए उनका बयान प्रीमेच्योर जैसा था. इस पर हमारा कड़ा विरोध है. हम यह कहना चाहेंगे कि बिजली बोर्ड के निजीकरण का फैसला प्रदेश की जनता, उपभोक्ताओं और बिजली बोर्ड कर्मचारियों के हित में नहीं होगा. इससे कहीं ना कहीं टैरिफ में कई गुना वृद्धि होगी. कर्मचारियों की सर्विस कंडीशन प्रभावित होगी. उन्होंने कहा कि हिमाचल में 90 फीसदी ग्रामीण क्षेत्र हैं, यहां तो इसके और भी दुष्परिणाम सामने आएंगे.

Himachal Pradesh State Electricity Board
हिमाचल प्रदेश स्टेट इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड (ETV Bharat)

12 फरवरी को कलम कलम छोड़ो हड़ताल

वहीं, बिजली बोर्ड में टॉप टू बॉटम कितने कर्मचारी हैं, बोर्ड की कितनी आय है, इसको लेकर पूछे गए सवाल के जवाब में हीरालाल वर्मा ने कहा कि, "कभी बिजली बोर्ड में 43 हजार कर्मचारी होते थे, लेकिन आज मात्र 13 हजार कर्मचारी रह गए हैं. जिस तरह से वित्त विभाग की प्रेजेंटेशन में कहा गया है कि आपको कॉस्ट कम करनी होगी. यहां तो पहले ही स्टाफ की कमी चल रही है. जिससे हम जो कंज्यूमर को सेवाएं दे रहे हैं, वह भी कहीं ना कहीं प्रभावित हो रही हैं. बिजली बोर्ड का जो रिवेन्यू 650 से 700 करोड़ प्रति माह रहता है, उसमें भी थोड़ी कमी आई है.

कर्मचारी यूनियन सह संयोजक हीरालाल वर्मा ने कहा कि, "आज के समय में बिजली बोर्ड का 650 करोड़ का रेवेन्यू प्रति माह रह गया है. हमारी जो हिमाचल प्रदेश स्टेट इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड एम्पलाइज यूनियन और ज्वाइंट एक्शन कमेटी है, जिसमें पेंशनर और इंजीनियर हैं. हमारी पहले ही 12 फरवरी को देशभर में ज्वाइंट एक्शन कोऑर्डिनेशन कमेटी ने हड़ताल का आवाहन किया है. उसके तहत हिमाचल में भी हड़ताल रहेगी. हमारा कर्मचारी अभियंता कलम छोड़ हड़ताल के माध्यम से बिजली संशोधन विधायक जो संसद में लाया जा रहा है, जिसमें भारत सरकार ने बिजली बोर्ड के निजीकरण का प्रावधान रखा है. हम उसका विरोध करेंगे."

Electricity Board Employees Union Co-ordinator Hiralal Verma
बिजली बोर्ड कर्मचारी यूनियन सह संयोजक हीरालाल वर्मा (ETV Bharat)

हीरालाल वर्मा ने कहा कि, प्रदेश भर के सभी बिजली बोर्ड के परिसरों में लंच आवर्स पर निजीकरण का विरोध होगा, जिसमें हमारे साथ पेंशनर का भी योग रहेगा. इसके साथ हमारा कहना है कि बिजली बोर्ड जो प्रदेश की जनता को बेहतर सेवाएं दे रहा है. आज हिमाचल का टैरिफ बहुत कम है. लेकिन, जहां निजीकरण हुआ वहां टैरिफ में कई गुना वृद्धि हुई है. उन्होंने कहा कि, हिमाचल में तो सर्विस भी अच्छी दी जा रही है और टैरिफ भी यहां बहुत कम है. अगर यह संस्थान निजी हाथों में जाता है तो प्रदेश की जनता को इसका नुकसान होगा. इस कारण जो हमारे 26 लाख उपभोक्ता हैं. उनसे भी 12 फरवरी को हड़ताल शामिल होने का आवाहन किया गया है. ऐसे में बिजली उपभोक्ता भी हमारे साथ हड़ताल में शामिल होंगे.

अन्य सेवाएं रहेगी बाधित

पेन डाउन स्ट्राइक के दौरान बिजली बोर्ड की सेवाएं किस तरह की रहने वाली है, इसको लेकर पूछे गए सवाल के जवाब में हीरालाल वर्मा ने कहा कि, हमने जो नोटिस दिया है, उसमें आवश्यक सेवाएं बाधित नहीं की जाएगी. इसके अलावा हमारा सभी अन्य सेवाओं पर पेन डाउन स्ट्राइक का असर रहेगा.

Himachal Pradesh State Electricity Board
हिमाचल प्रदेश स्टेट इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड (ETV Bharat)

उपभोक्ताओं को चुकाना होगा अधिक बिल

निजीकरण से आम उपभोक्ताओं को किस तरह का नुकसान झेलना पड़ेगा इसके जवाब में हीरालाल वर्मा ने कहा कि केंद्र सरकार जैसे निजीकरण की तरफ बढ़ रही है और देशभर में स्मार्ट मीटर लगाए जा रहे हैं. इसके तहत हिमाचल में भी स्मार्ट मीटर लगा रहे हैं, जिसमें 2500 करोड़ का खर्च किया जा रहा है. यह खर्च प्रदेश के उपभोक्ताओं पर डाला जाएगा. इसलिए ही स्मार्ट मीटर लगाए जा रहे हैं. ताकि कि कल दिन को जो प्राइवेट कंपनियां आएंगी, उन्हें रियल टाइम का डाटा दिया जा सके. इस करके देशभर में स्मार्ट मीटर लगाए जा रहे हैं.

हीरालाल वर्मा ने कहा कि, "इलेक्ट्रिसिटी अमेंडमेंट बिल 2025 जो संसद में पेंडिंग है. उसमें बिजली वितरण में कई कंपनियों की भागीदारी करनी है. हिमाचल के परिपेक्ष्य में जो यहां का ढांचा है, उसे बिजली बोर्ड मेंटेन करेगा. लेकिन, उसमें जो बिजली प्रवाहित हो रही है उसको बेचने का काम प्राइवेट कंपनियां करेंगी. प्राइवेट कंपनी के लिए केंद्र सरकार जनता पर बोझ डालकर स्मार्ट मीटर लगा रही है. उसके साथ ही प्रीपेड में जाना पड़ेगा. ताकि प्राइवेट कंपनी अगर इस क्षेत्र में आती है, उनसे जो बिजली खरीदनी है. उसमें उसे लिक्विडिटी की दिक्कत न आए. इस तरह से संसद में बिल पास होता है. उसे इंडस्ट्रियल एरिया जहां से 64 फ़ीसदी रेवेन्यू आता है. वह निजी हाथों में जाएगा."

इसके साथ बड़ी सिटी धर्मशाला और शिमला जहां स्मार्ट मीटर लगाए गए हैं. यह सिटी वाले क्षेत्र भी निजी हाथों में जाएंगे. इससे बिजली बोर्ड का 70 फीसदी बिजनेस निजी हाथों में जाएगा. उसके बाद बिजली बोर्ड के पास 30 फीसदी रेवेन्यू ही बचेगा ऐसे में जो हमारा 10 हजार करोड़ का बिजनेस है. उसमें 3 हजार करोड़ तो 29 पेंशनर की पेंशन और कर्मचारियों के वेतन पर ही चला जाएगा. उन्होंने कहा हिमाचल के ग्रामीण क्षेत्रों में लागत अधिक है. वही, इंडस्ट्रियल एरिया में जो लागत कम है अभी ग्रामीण क्षेत्रों में खर्च इंडस्ट्रियल एरिया से शिफ्ट हो रहा है. लेकिन कहीं ना कहीं क्रॉस सब्सिडी खत्म होगी. जिससे ग्रामीण क्षेत्रों के उपभोक्ताओं के बिजली बिलों में कई गुना वृद्धि होगी. ऐसे में निजीकरण का उपभोक्ताओं को बहुत बड़ा नुकसान होगा.

सब्सिडी पर 1200 करोड़ खर्च कर रही सरकार

प्रदेश में बिजली बोर्ड के करीब 26 लाख घरेलू उपभोक्ताओं को सस्ती बिजली उपलब्ध कराने पर सरकार करीब 1200 करोड़ सब्सिडी पर खर्च कर रही है. कर्मचारी यूनियन के मुताबिक अगर बिजली बोर्ड को निजी हाथों में दिया जाता है तो ये सब्सिडी खत्म हो जाएगी, जिस कारण उपभोक्ताओं के बिल पहले के मुकाबले में अधिक आयेंगे, जिससे हिमाचल में लाखों उपभोक्ताओं की जेब ढीली हो जाएगी.

स्मार्ट बिजली मीटर लगने के नुकसान

प्रदेश में अब पुराने मीटर की जगह पर स्मार्ट बिजली के मीटर लगाए जा रहे हैं. प्रदेश के शिमला, सोलन और धर्मशाला सहित अन्य कुछ जिलों में करीब 12 लाख स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं. ऐसे में ये स्मार्ट मीटर प्रीपेड होंगे. इसी आईडी के माध्यम से बिजली बिल पेड होंगे. ऐसे में बिजली बोर्ड कर्मचारी यूनियन ने आशंका जताई है कि प्रीपेड होने के कारण प्रदेश में 125 यूनिट फ्री बिजली की सुविधा भी बंद हो जाएगी.

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