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आर्थिक संकट पर सीएम सुक्खू ने शिमला में बुलाई सर्वदलीय बैठक

सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू ने एक हफ्ते में दूसरी बार शिमला में सर्वदलीय बैठक बुलाई है.

CM Sukhvinder Singh Sukhu
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू (File Photo)
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By ETV Bharat Himachal Pradesh Team

Published : February 13, 2026 at 10:01 AM IST

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Updated : February 13, 2026 at 10:53 AM IST

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शिमला: हिमाचल प्रदेश की सियासत और प्रशासनिक गलियारों में इन दिनों आर्थिक संकट के गंभीर मुद्दे को लेकर हलचल तेज है. राज्य के आर्थिक हालात को लेकर बढ़ती चिंता के बीच मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने आज, शुक्रवार को सभी राजनीतिक दलों की एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई है. यह सर्वदलीय बैठक आज सुबह 11 बजे पीटरहॉफ शिमला में आयोजित की जाएगी. इस बैठक का मुख्य एजेंडा 16वें वित्त आयोग की ओर से रेवेन्यू डेफिसिट ग्रांट (RDG) को बंद किए जाने से उत्पन्न वित्तीय परिस्थितियों पर विस्तृत चर्चा करना है.

पिछली बैठक से भाजपा ने किया था किनारा

हालांकि 8 फरवरी को भी मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने RDG बंद किए जाने की सिफारिशों के बाद हिमाचल पर पड़ने वाले आर्थिक प्रभावों को लेकर सचिवालय में प्रेजेंटेशन दी थी. जिसमें प्रदेश के मुख्य विपक्षी दल भाजपा के विधायकों को भी बैठक में बुलाया गया था, लेकिन भाजपा ने बैठक से किनारा करते हुए प्रेजेंटेशन में हिस्सा नहीं लिया था. पिछली बार वित्त सचिव में अपनी प्रेजेंटेशन में कहा था कि RDG बंद करने के फैसले से राज्य की वित्तीय संरचना पर गहरा प्रभाव पड़ा है और हिमाचल प्रदेश अभूतपूर्व वित्तीय दबाव का सामना कर रहा है. प्रेजेंटेशन में तर्क दिया गया था कि आरडीजी बंद होने के बाद राजस्व और व्यय के बीच का अंतर तेजी से बढ़ा है, जिससे विकास कार्यों, सामाजिक योजनाओं और कर्मचारियों से जुड़े दायित्वों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है.

सीएम का सभी राजनीतिक दलों से आग्रह

ऐसे में एक सप्ताह में ही मुख्यमंत्री ने फिर से सर्वदलीय बैठक बुलाई है. यह बैठक केवल एक औपचारिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि राज्य के भविष्य की दिशा तय करने वाली निर्णायक पहल मानी जा रही है. स्थिति की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री ने सभी राजनीतिक दलों से आग्रह किया है कि वे अपने कीमती सुझावों के साथ इस बैठक में शामिल हों. सरकार का मानना है कि यह समय राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर एकजुट होने का है, ताकि राज्य के व्यापक हितों की रक्षा के लिए ठोस रणनीति बनाई जा सके. अगर सर्वदलीय सहमति बनती है, तो केंद्र के समक्ष राज्य की मजबूत और सामूहिक आवाज रखी जा सकेगी. इस तरह से अब सभी की निगाहें आज की इस अहम बैठक पर टिकी है.

क्या होती है RDG ?

प्रदेश सचिवालय में 8 फरवरी को हुई वित्त विभाग की प्रेजेंटेशन में बताया गया था कि हिमाचल प्रदेश को छठे फाइनेंस कमीशन के दौर से RDG मिलना शुरू हुई थी. इस दौरान हिमाचल प्रदेश को मात्र 161 करोड़ रुपए RDG के तौर पर जारी हुए थे. फाइनेंस कमीशन पांच साल के लिए गठित होता है. किसी भी राज्य के रेवेन्यू व एक्सपेंडिचर के बीच के अंतर से जो घाटा पैदा होता है, केंद्र सरकार उसकी भरपाई के लिए ग्रांट जारी करती है. इसे रेवेन्यू डेफिसिट ग्रांट यानी RDG कहा जाता है. वहीं, 15वें फाइनेंस कमीशन ने हिमाचल के लिए वर्ष 2021-2026 के बीच 37,199 करोड़ रुपए की ग्रांट हिमाचल को दी. इस ग्रांट से वेतन व पेंशन का खर्च काफी हद तक निकल आता था. अब राज्य की आर्थिक स्थिति डावांडोल है. वित्त विभाग की पिछली प्रेजेंटेशन में बताया गया कि आने वाले समय में डीए व एरियर तो दूर की कौड़ी हो जाएगी, सामाजिक सुरक्षा पेंशन व अन्य कल्याणकारी योजनाओं को लेकर भी तस्वीर चिंताजनक है. ऐसे में इस स्थिति से बाहर निकलने के लिए आज सर्वदलीय बैठक रखी गई है.

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Last Updated : February 13, 2026 at 10:53 AM IST