उत्तर भारत की जीवनरेखा है हिमाचल, फिर केंद्र क्यों घटा रहा आर्थिक सहयोग: CM सुक्खू
सीएम सुक्खू ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि हिमाचल प्रदेश की तुलना उत्तराखंड से करना गलत है.

By ETV Bharat Himachal Pradesh Team
Published : February 8, 2026 at 7:06 PM IST
शिमला: छोटे पहाड़ी राज्य हिमाचल प्रदेश की अर्थव्यवस्था इस समय बड़े वित्तीय दबाव से गुजर रही है. सीमित संसाधन, कठिन भौगोलिक परिस्थितियां, बार-बार आने वाली प्राकृतिक आपदाएं और केंद्र से मिलने वाली सहायता में कटौती ने राज्य की चुनौतियों को और गहरा कर दिया है. इसी बीच कैबिनेट बैठक के दौरान उस समय माहौल बेहद गंभीर हो गया, जब वित्त विभाग ने रेवेन्यू डेफिसिट ग्रांट (RDG) बंद होने से राज्य पर पड़ने वाले असर को लेकर विस्तृत प्रेजेंटेशन दी.
वित्त विभाग की ओर से दी गई प्रस्तुति में बताया गया कि RDG समाप्त होने से हिमाचल की वित्तीय स्थिरता पर सीधा असर पड़ेगा. इसमें स्पष्ट किया गया कि राज्य पहले ही सीमित राजस्व स्रोतों पर निर्भर है और RDG बंद होने से विकास योजनाएं, बुनियादी सेवाएं और कल्याणकारी कार्यक्रम प्रभावित हो सकते हैं. प्रस्तुति में यह भी बताया गया कि आपदा-प्रभावित ढांचे को संभालने में हिमाचल को हर साल भारी खर्च उठाना पड़ता है.
मुख्यमंत्री का सख्त संदेश
प्रेजेंटेशन के बाद मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने दो टूक शब्दों में कहा कि हिमाचल सिर्फ अपने लिए नहीं, बल्कि पूरे नॉर्दन इंडिया के लिए जीवनरेखा की तरह काम कर रहा है. उन्होंने कहा कि हिमाचल की स्वच्छ हवा, शुद्ध पानी और वन संपदा उत्तर भारत के करोड़ों लोगों को जीवन देती है, लेकिन इसके बदले राज्य को आर्थिक सहयोग लगातार कम किया जा रहा है.
'हमें उत्तराखंड से कंपेयर न करें'
मुख्यमंत्री ने कहा कि इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेस्ट मैनेजमेंट से कराए गए सर्वे के अनुसार हिमाचल प्रदेश हर साल उत्तर भारत को करीब 90 हजार करोड़ रुपये की पारिस्थितिक सेवाएं देता है. इसमें स्वच्छ हवा, पानी, नदियां और पर्यावरण संतुलन शामिल है. इसके बावजूद केंद्र स्तर पर इन सेवाओं का सही मूल्यांकन नहीं किया गया.
सीएम सुक्खू ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि हिमाचल प्रदेश की तुलना उत्तराखंड से करना गलत है. उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में लगभग 50 फीसदी मैदानी क्षेत्र है, जहां उद्योग स्थापित किए जा सकते हैं. वहां की आबादी एक करोड़ से अधिक है और जीएसटी कलेक्शन भी बेहतर है. इसके अलावा उत्तराखंड में अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट जैसी सुविधाएं भी हैं, जो आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देती हैं.
'पंजाब फूड बाउल है, हिमाचल वाटर बाउल'
मुख्यमंत्री ने उदाहरण देते हुए कहा कि अगर पंजाब को देश का फूड बाउल कहा जाता है, तो हिमाचल प्रदेश पूरे नॉर्दन इंडिया का वाटर बाउल है. हिमाचल की नदियां उत्तर भारत की खेती, बिजली और पेयजल की जरूरतें पूरी करती हैं. इन तथ्यों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. सीएम सुक्खू ने कहा कि हिमाचल प्रदेश का 69.2 फीसदी क्षेत्र ओपन फॉरेस्ट लैंड है, जिसमें 36 फीसदी कोल्ड डेजर्ट शामिल है. इसके बावजूद 16वें वित्त आयोग में इस वन क्षेत्र के लिए राज्य को कोई ठोस आर्थिक लाभ नहीं दिया गया. हालांकि राज्य सरकार ने इस मुद्दे को मजबूती से उठाया था और अब ओपन फॉरेस्ट को भी आंशिक रूप से स्वीकार किया गया है.
RDG बजट का 12.7 फीसदी हिस्सा
मुख्यमंत्री ने कहा कि 17 राज्यों के लिए आरडीजी समाप्त कर दी गई है, लेकिन हिमाचल पर इसका सबसे ज्यादा नकारात्मक असर पड़ा है. क्योंकि राज्य के बजट का 12.7 फीसदी हिस्सा आरडीजी से आता था. देश में दूसरा सबसे अधिक आरडीजी का हिस्सा हिमाचल को मिलता था. उन्होंने इसे जनता के अधिकारों से जुड़ा मुद्दा बताया, न कि किसी सरकार का. सीएम सुक्खू ने कहा कि इस महत्वपूर्ण प्रस्तुति में भाजपा विधायकों को भी आमंत्रित किया गया था, लेकिन वे शामिल नहीं हुए. उन्होंने अपील की कि राज्य के हित में सभी दलों को एकजुट होकर लड़ाई लड़नी होगी. जरूरत पड़ी तो भाजपा सांसदों और विधायकों के साथ प्रधानमंत्री से मिलने दिल्ली जाने को भी वे तैयार हैं.
GST से घटा राज्य का राजस्व
मुख्यमंत्री ने कहा कि जीएसटी लागू होने के बाद हिमाचल की कर संग्रह दर घटकर करीब 8 फीसदी रह गई है, जबकि पहले यह 13 से 14 फीसदी थी. हिमाचल एक उत्पादक राज्य है, लेकिन जीएसटी उपभोग आधारित कर है, जिससे राज्य को नुकसान हुआ है. साथ ही राज्य से कर लगाने की क्षमता भी छिन गई है.
बिजली परियोजनाओं पर हक की मांग
सीएम सुक्खू ने मांग की कि जिन बिजली परियोजनाओं ने अपना पूरा ऋण चुका दिया है, उन पर केंद्र सरकार को कम से कम 50 फीसदी रॉयल्टी राज्य को देनी चाहिए. इसके अलावा 40 साल पूरे कर चुकी परियोजनाओं को राज्य को वापस लौटाया जाना चाहिए. मुख्यमंत्री ने कहा कि भाखड़ा-ब्यास प्रबंधन बोर्ड से वर्ष 2012 से अब तक करीब 4500 करोड़ रुपये की बकाया राशि राज्य को नहीं मिली है, जबकि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला भी आ चुका है. इसके अलावा शानन पावर प्रोजेक्ट की लीज समाप्त हो चुकी है, जिसे वापस लेने के लिए राज्य कानूनी लड़ाई लड़ रहा है.
आत्मनिर्भर हिमाचल का लक्ष्य
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार पहले दिन से हिमाचल को आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रयास कर रही है. अपने संसाधनों से अब तक 26,683 करोड़ रुपये का राजस्व जुटाया गया है, लेकिन यह पर्याप्त नहीं है. क्योंकि राज्य के पास मुख्य रूप से नदियां, वन संपदा और पर्यटन ही आय के स्रोत हैं. मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों को आश्वासन दिया कि कल्याणकारी योजनाएं जारी रहेंगी. आम आदमी पर बोझ डाले बिना संसाधन जुटाने की नीतियां लागू की जा रही हैं. 16वें वित्त आयोग के समक्ष वन क्षेत्र और भूस्खलन को आपदा श्रेणी में शामिल कराने में भी सफलता मिली है.
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