मंडी में दौड़ेंगी 25 नई ई-बसें, सुक्खू सरकार का ग्रीन ट्रांसपोर्ट पर बड़ा दांव!
हिमाचल के सीएम सुक्खू ने कहा कि, सरकार का लक्ष्य अगले पांच वर्षों में एचआरटीसी को आत्मनिर्भर बनाना है.

By ETV Bharat Himachal Pradesh Team
Published : August 17, 2026 at 3:04 PM IST
शिमला: पहाड़ों की सड़कों पर अब डीजल बसों की जगह इलेक्ट्रिक बसों की रफ्तार बढ़ने लगी है. हिमाचल में स्वच्छ और हरित सार्वजनिक परिवहन को नई दिशा देते हुए मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने सोमवार को वर्चुअल माध्यम से मंडी के पड्डल मैदान से एचआरटीसी की 25 नई टाइप-1 इलेक्ट्रिक बस सेवाओं का शुभारंभ किया. इसके साथ ही कुल्लू, मंडी और सुंदरनगर में तैयार की गई चार्जिंग सुविधाओं के बाद इन क्षेत्रों में इलेक्ट्रिक बस संचालन का नया चरण शुरू हो गया है.
'पांच वर्षों में एचआरटीसी को आत्मनिर्भर बनाने का लक्ष्य'
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि, प्रदेश सरकार ने एचआरटीसी के इलेक्ट्रिक बेड़े को विस्तार देने के लिए 297 नई टाइप-1 इलेक्ट्रिक बसें खरीदी हैं. ये बसें शिमला, नाहन, नालागढ़, ऊना, हरोली, बिलासपुर, देहरा, हमीरपुर, पालमपुर, धर्मशाला और नगरोटा सहित विभिन्न क्षेत्रों में संचालित की जा रही हैं. चार्जिंग अवसंरचना विकसित होने के बाद अब कुल्लू, मंडी और सुंदरनगर भी इस ग्रीन ट्रांसपोर्ट नेटवर्क से जुड़ गए हैं.
एक चार्ज में 270 किमी का सफर
सीएम सुक्खू ने कहा कि, "टाइप-1 इलेक्ट्रिक बस की निर्धारित ड्राइविंग रेंज 80 प्रतिशत स्टेट ऑफ चार्ज पर करीब 180 किलोमीटर है. इन बसों का परिचालन प्रदर्शन अब तक उत्साहजनक रहा है. शिमला-चंडीगढ़ मार्ग पर एक बार चार्ज करने के बाद करीब 270 किलोमीटर की दूरी सफलतापूर्वक तय की जा रही है. यह हिमाचल जैसे कठिन पहाड़ी भू-भाग में लंबी दूरी के अंतर-शहरी मार्गों पर इलेक्ट्रिक बसों की उपयोगिता को दर्शाता है."
हर किलोमीटर पर 12 से 13 रुपये की बचत
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि, इलेक्ट्रिक बसें एचआरटीसी की आर्थिक तस्वीर बदलने में भी मददगार साबित हो रही हैं. डीजल बसों की तुलना में इलेक्ट्रिक बसों के संचालन में ऊर्जा लागत पर करीब 12 से 13 रुपये प्रति किलोमीटर की बचत हो रही है. इससे निगम के ईंधन और परिचालन खर्च में कमी आने के साथ सार्वजनिक परिवहन की दक्षता भी बढ़ेगी.
HRTC को पांच साल में आत्मनिर्भर बनाने का लक्ष्य
सीएम सुक्खू ने कहा कि, राज्य सरकार एचआरटीसी को बसें खरीदकर उपलब्ध करवा रही है और हर साल करीब 840 करोड़ रुपये का अनुदान दे रही है. उन्होंने कहा कि निगम अपने संसाधनों से भी लगभग इतनी ही राशि अर्जित कर रहा है. सरकार का लक्ष्य अगले पांच वर्षों में एचआरटीसी को आत्मनिर्भर बनाना है. उन्होंने कहा कि आने वाले समय में प्रदेश में 1000 इलेक्ट्रिक बसें और 200 हाइड्रोजन बसें खरीदी जाएंगी. सरकार ने अपने पहले बजट में ही 'ग्रीन हिमाचल' की परिकल्पना रखी थी और इलेक्ट्रिक बसों का विस्तार उसी दिशा में उठाया गया महत्वपूर्ण कदम है. मुख्यमंत्री ने कहा कि इलेक्ट्रिक बसों का विस्तार कार्बन उत्सर्जन कम करने, जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता घटाने और हिमाचल में आधुनिक, विश्वसनीय, ऊर्जा-कुशल एवं पर्यावरण-अनुकूल सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है.
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