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प्रधानाचार्य नियुक्ति में बड़ा बदलाव, तीन से दो साल हुई ये अनिवार्यता

प्रदेश सरकार ने सीबीएसई स्कूलों में प्रधानाचार्य नियुक्ति प्रक्रिया को आसान बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है.

CM SUKHU
शिमला में आयोजित उच्च स्तरीय बैठक में मुख्यमंत्री (DIPR)
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By ETV Bharat Himachal Pradesh Team

Published : February 13, 2026 at 9:27 PM IST

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शिमला: राज्य सरकार ने शिक्षा व्यवस्था को और बेहतर बनाने के लिए अहम कदम उठाया है. मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने सीबीएसई से संबद्ध स्कूलों में प्रधानाचार्यों की नियुक्ति प्रक्रिया को आसान बनाने के निर्देश दिए हैं. अब इन स्कूलों में प्रिंसिपल बनने के लिए शेष सेवा अवधि की अनिवार्यता तीन साल से घटाकर दो साल कर दी गई है. इससे योग्य शिक्षकों को नेतृत्व का मौका मिलेगा.

शिमला में आयोजित उच्च स्तरीय बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि आगामी शैक्षणिक सत्र से 140 सरकारी स्कूलों को Central Board of Secondary Education (सीबीएसई) से संबद्ध किया जाएगा. पहले चरण में 99 स्कूलों को संबद्धता मिल चुकी है, जबकि बाकी स्कूलों की प्रक्रिया जारी है. सरकार का लक्ष्य है कि छात्रों को राष्ट्रीय स्तर की शिक्षा का लाभ मिल सके.

शिक्षकों के अधिकार सुरक्षित रहेंगे

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि सीबीएसई स्कूलों में चयनित शिक्षकों का उनके मूल कैडर में लियन (अधिकार) सुरक्षित रखा जाएगा. इससे उनकी पदोन्नति और भविष्य के अवसर प्रभावित नहीं होंगे. यह फैसला शिक्षकों के हितों को ध्यान में रखकर लिया गया है. सरकार ने यह भी तय किया है कि सीबीएसई से जुड़े स्कूलों का अलग लोगो और यूनिफॉर्म कलर स्कीम होगी. इससे इन संस्थानों की अलग पहचान बनेगी और गुणवत्ता में भी सुधार आएगा.

लागू होगी नो मोबाइल नीति

मुख्यमंत्री सुक्खू ने कहा कि वे स्वयं इन स्कूलों की शैक्षणिक प्रगति की निगरानी करेंगे. साथ ही बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए पर्याप्त बजट उपलब्ध कराया जाएगा. बैठक में एक मार्च से लागू होने जा रही ‘नो मोबाइल फोन नीति’ की भी समीक्षा की गई और विभाग को समय-सीमा के भीतर सभी औपचारिकताएं पूरी करने के निर्देश दिए गए.

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