हिमाचल के स्कूलों के दाखिला फॉर्म से हटेगा जाति का कॉलम, सुक्खू सरकार का बड़ा फैसला
अगले शैक्षणिक सत्र से हिमाचल के स्कूलों के प्रवेश फॉर्म में जाति का कॉलम हटा दिया जाएगा.

By ETV Bharat Himachal Pradesh Team
Published : August 26, 2026 at 4:48 PM IST
|Updated : August 26, 2026 at 5:53 PM IST
शिमला: हिमाचल प्रदेश में अब बच्चों की पहचान को जाति के दायरे से बाहर रखने की दिशा में सरकार बड़ा कदम उठाने जा रही है. मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने निर्देश दिए हैं कि अगले शैक्षणिक सत्र से स्कूलों के प्रवेश फॉर्म में जाति का कॉलम हटा दिया जाए. मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकारी योजनाओं और विभिन्न लाभों का लाभ लेते समय पात्र लोगों को अपनी जाति का विवरण देना जारी रखना होगा, ताकि उन्हें किसी भी योजना का लाभ प्राप्त करने में परेशानी न हो.
सरकार का मानना है कि छोटी उम्र से ही बच्चों के सामने जाति की पहचान को प्रमुखता देने से उनमें हीन भावना और सामाजिक भेदभाव की मानसिकता विकसित हो सकती है. ऐसे में स्कूल स्तर पर दाखिले के दौरान जाति की जानकारी मांगने की व्यवस्था खत्म कर बच्चों में समानता, भाईचारे और सामाजिक समरसता की भावना को मजबूत करने का प्रयास किया जाएगा. मुख्यमंत्री ने बुधवार को यहां हिमाचल प्रदेश अनुसूचित जाति कल्याण बोर्ड की बैठक की अध्यक्षता करते हुए यह निर्देश दिए.
सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा, "राज्य सरकार समाज में जाति आधारित भेदभाव को समाप्त करने, आपसी भाईचारे और समानता की भावना को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है. स्कूलों के प्रवेश फॉर्म से जाति का कॉलम हटाना इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगा. हालांकि, सरकार की योजनाओं और आरक्षण समेत अनुसूचित जाति समुदाय के लिए निर्धारित लाभों पर इसका असर नहीं पड़ेगा".
योजनाओं की जानकारी हर पात्र लाभार्थी तक पहुंचाने के निर्देश
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार अनुसूचित जाति समुदाय से जुड़े मुद्दों के समाधान को प्राथमिकता दे रही है. समुदाय के कल्याण के लिए कई योजनाएं शुरू की गई हैं. उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी पात्र लाभार्थियों को इन योजनाओं की जानकारी उपलब्ध करवाई जाए, ताकि कोई भी पात्र व्यक्ति सरकारी सहायता से वंचित न रहे. राजीव गांधी स्टार्ट-अप स्वरोजगार सौर योजना के तहत राज्य सरकार 100 किलोवाट से 2 मेगावाट तक की परियोजनाएं स्थापित करने के लिए सब्सिडी प्रदान कर रही है. जनजातीय क्षेत्रों में परियोजनाओं के लिए 5 प्रतिशत और अन्य क्षेत्रों में 4 प्रतिशत सब्सिडी दी जा रही है.
मेधावी विद्यार्थियों को एक फीसदी ब्याज पर 20 लाख तक ऋण
मुख्यमंत्री ने कहा कि आर्थिक तंगी के कारण किसी मेधावी विद्यार्थी की पढ़ाई बाधित न हो, इसके लिए राज्य सरकार उच्च शिक्षा के लिए 20 लाख रुपये तक का ऋण महज एक प्रतिशत ब्याज दर पर उपलब्ध करवा रही है. सरकार का उद्देश्य है कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के अवसर मिल सकें.
300 यूनिट मुफ्त बिजली, महिलाओं को 1500 रुपये
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार अत्यंत गरीब परिवारों के लिए ‘अपना परिवार सुखी परिवार योजना’ लागू करने जा रही है. इसके तहत पात्र परिवारों को 300 यूनिट मुफ्त बिजली उपलब्ध करवाई जाएगी, जबकि इन परिवारों की महिलाओं को 1,500 रुपये मासिक पेंशन दी जाएगी.
वहीं, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री डॉ. (कर्नल) धनीराम शांडिल ने बैठक में बताया कि राज्य में 8,41,917 लाभार्थियों को सामाजिक सुरक्षा पेंशन प्रदान की जा रही है. वृद्ध पुरुषों को 1,000 रुपये प्रतिमाह, जबकि महिलाओं, दिव्यांगजनों, विधवाओं और परित्यक्त/एकल महिलाओं को 1,500 रुपये प्रतिमाह पेंशन दी जा रही है.
उन्होंने बताया कि 70 वर्ष से अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों और 70 प्रतिशत से अधिक दिव्यांगता वाले व्यक्तियों को 1,700 रुपये प्रतिमाह पेंशन प्रदान की जा रही है. चालू वित्त वर्ष में सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजनाओं पर करीब 1,400 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं. मंत्री ने कहा कि सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग चालू वित्त वर्ष में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, महिलाओं, बच्चों और वरिष्ठ नागरिकों के सामाजिक एवं आर्थिक उत्थान से जुड़ी विभिन्न योजनाओं पर करीब 314.90 करोड़ रुपये खर्च कर रहा है. इसके अलावा अनुसूचित जाति विकास कार्यक्रम के तहत 1,105.37 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है.
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