'पेपर हुए ही नहीं तो लीक कहां से होंगे?', भर्तियों को लेकर सुक्खू सरकार पर बरसे राजीव बिंदल
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने बिना लिखित परीक्षा और इंटरव्यू के हुई नियुक्तियों को लेकर भी सरकार से जवाब मांगा.

By ETV Bharat Himachal Pradesh Team
Published : August 17, 2026 at 2:56 PM IST
शिमला: हिमाचल प्रदेश में बेरोजगारी और सरकारी भर्तियों को लेकर सियासत फिर गरमा गई है. भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के पेपर लीक नहीं होने के दावे पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब परीक्षाएं ही समय पर नहीं हो रही हैं तो पेपर लीक होने का सवाल कहां से आता है. उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश के हजारों युवा कई वर्षों से भर्ती परीक्षाओं का इंतजार कर रहे हैं और लाइब्रेरियों में बैठकर तैयारी कर रहे हैं. बिंदल ने कहा कि कांग्रेस ने विधानसभा चुनाव से पहले युवाओं को एक लाख सरकारी नौकरियां और पांच लाख रोजगार देने का वादा किया था. सरकार बनने के बाद पहली कैबिनेट से ही एक लाख नौकरियों की प्रक्रिया शुरू करने की बात कही गई थी. लेकिन अब सरकार का कार्यकाल करीब चार साल पूरा होने जा रहा है और युवा रोजगार के लिए इंतजार कर रहे हैं.
रिक्त पदों पर उठाए सवाल
बिंदल ने कहा कि प्रदेश के कई सरकारी विभागों में बड़ी संख्या में पद खाली पड़े हैं. पिछले वर्षों में हजारों कर्मचारी सेवानिवृत्त हुए हैं, जिससे रिक्तियों की संख्या और बढ़ी है. उन्होंने आरोप लगाया कि भर्ती प्रक्रिया तेज करने के बजाय सरकार की ओर से पेपर लीक न होने को उपलब्धि के तौर पर पेश किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि युवाओं को पारदर्शी प्रतियोगी परीक्षाओं के जरिए नौकरी चाहिए.
बिना परीक्षा-इंटरव्यू नियुक्तियों की जांच की मांग
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने बिना लिखित परीक्षा और इंटरव्यू के हुई नियुक्तियों को लेकर भी सरकार से जवाब मांगा. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार के एक मंत्री सार्वजनिक तौर पर सैकड़ों लोगों को नियुक्त करने की बात कह चुके हैं. बिंदल ने सवाल उठाया कि इन नियुक्तियों में चयन का आधार क्या था और विभिन्न विभागों व संस्थानों में ऐसी कितनी नियुक्तियां हुई हैं. उन्होंने मांग की कि जरूरत पड़ने पर इन नियुक्तियों की जांच कराई जानी चाहिए.
टैक्स और महंगाई को लेकर भी साधा निशाना
बिंदल ने रोजगार के साथ बढ़ते टैक्स और महंगाई को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि पेट्रोल और डीजल पर अतिरिक्त सेस लगाने से आम लोगों की जेब पर बोझ बढ़ा है. उन्होंने दावा किया कि सरकार के कार्यकाल में पेट्रोल-डीजल पर बढ़े करों और कीमतों का असर आम जनता पर पड़ा है. उन्होंने सीमेंट, स्टांप ड्यूटी और राशन की कीमतों में बढ़ोतरी का भी मुद्दा उठाया. भाजपा नेता ने कहा कि बस किराया, बिजली, पानी और स्वास्थ्य सेवाओं का खर्च भी आम परिवार पर बढ़ रहा है. उन्होंने सरकारी अस्पतालों में जांच और दवाइयों की उपलब्धता को लेकर सवाल उठाते हुए कहा कि हिमकेयर योजना के तहत निजी अस्पतालों में उपचार को लेकर भी लोगों को परेशानी हो रही है.
बिंदल ने कहा कि खाद, बीज, कीटनाशक और परिवहन महंगा होने से किसान-बागवान की लागत बढ़ रही है. वहीं कर्मचारियों और पेंशनरों के डीए, एरियर, मेडिकल बिल और अन्य वित्तीय देनदारियों के भुगतान में देरी हो रही है. उन्होंने सरकार पर हजारों करोड़ रुपये का कर्ज लेने के बावजूद विकास की गति धीमी होने का आरोप लगाया और सवाल किया कि जब नौकरियां और विकास नहीं हो रहे तो बढ़ता कर्ज आखिर कहां खर्च हो रहा है.
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