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विपक्ष के हंगामे पर विधानसभा अध्यक्ष की दो टूक, नियमों और परंपराओं के अनुसार ही चलेगी सदन की कार्यवाही

विधानसभा अध्य ने स्पष्ट किया कि हिमाचल विधानसभा में भविष्य में भी सदन की कार्यवाही नियमों और स्थापित परंपराओं के अनुरूप ही संचालित होगी.

विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया
विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया (ETV BHARAT)
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By ETV Bharat Himachal Pradesh Team

Published : August 21, 2026 at 2:42 PM IST

4 Min Read
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शिमला: हिमाचल प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के पहले दिन राष्ट्रगीत 'वंदे मातरम्' को लेकर सदन में जमकर हंगामा हुआ. विपक्ष के विरोध और नारेबाजी के बीच विधानसभा की कार्यवाही शनिवार सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित करनी पड़ी. इस पूरे घटनाक्रम पर विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने स्पष्ट किया कि सदन की कार्यवाही किसी राजनीतिक दबाव या विरोध के आधार पर नहीं, बल्कि विधानसभा के नियमों, प्रक्रियाओं और स्थापित परंपराओं के अनुसार ही संचालित होगी.

विधानसभा की अपनी प्रक्रिया और परंपरा

विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि देश के कई विधानमंडलों में सत्र की शुरुआत राष्ट्रगान से और समापन राष्ट्रगीत से करने की परंपरा रही है. लोकसभा सहित कई विधानसभाओं में भी ऐसी व्यवस्थाओं का पालन किया जाता है. हिमाचल प्रदेश विधानसभा भी अपनी निर्धारित प्रक्रिया और स्थापित परंपराओं के अनुसार ही कार्य करती है. उन्होंने कहा कि मानसून सत्र के पहले दिन जैसे ही सदन की कार्यवाही शुरू हुई, विपक्ष की ओर से राष्ट्रगीत को लेकर आपत्ति जताई गई. विपक्षी विधायक अपनी मांग को लेकर नारेबाजी करने लगे. इसके बाद सत्ता पक्ष के सदस्यों ने भी नारेबाजी शुरू कर दी. दोनों पक्षों के आमने सामने आने से सदन का माहौल गर्म हो गया और सामान्य कार्यवाही प्रभावित हुई.

विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया (ETV BHARAT)

नियमों के तहत ही दर्ज होगी आपत्ति

विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि सदन के भीतर किसी भी मुद्दे पर चर्चा करने और अपनी बात रखने के लिए पूरी प्रक्रिया निर्धारित है. लोकतांत्रिक व्यवस्था में हर सदस्य को अपनी बात रखने और विरोध करने का अधिकार है, लेकिन सदन की कार्यवाही तय नियमों के अनुसार ही संचालित की जा सकती है. उन्होंने कहा कि विरोध के कारण विधानसभा की स्थापित प्रक्रिया में बदलाव नहीं किया जा सकता.

नेता प्रतिपक्ष की गैरमौजूदगी का भी जिक्र

पठानिया ने कहा कि हंगामे के दौरान विपक्ष नेता रहित था और नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर सदन में मौजूद नहीं थे. उन्होंने कहा कि सदन में किसी भी विषय को उठाने के लिए निर्धारित संसदीय प्रक्रिया का पालन करना जरूरी है. विधानसभा अध्यक्ष का दायित्व सदन की कार्यवाही को नियमों और मर्यादा के अनुसार संचालित करना है. उन्होंने कहा कि विधानसभा अपने आप में एक स्वायत्त संस्था है. सदन की कार्यवाही किस तरह संचालित होगी, यह विधानसभा के नियमों और स्थापित परंपराओं से तय होता है. उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी सदस्य या राजनीतिक दल की आपत्ति के आधार पर सदन की स्थापित प्रक्रिया को बदला नहीं जा सकता.

वंदे मातरम् को लेकर दिया स्पष्टीकरण

राष्ट्रगीत को लेकर उठे विवाद पर विधानसभा अध्यक्ष ने संविधान सभा के निर्णय का भी उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि संविधान सभा ने सर्वसम्मति से 'वंदे मातरम्' के पहले दो छंदों को गाने को स्वीकार किया था. ऐसे में राष्ट्रगीत को लेकर सदन में अपनाई गई प्रक्रिया किसी नए निर्णय का हिस्सा नहीं है, बल्कि देश की संवैधानिक और संसदीय परंपराओं से जुड़ी हुई है.

आगे भी नियमों के अनुसार चलेगा सदन

पठानिया ने स्पष्ट किया कि हिमाचल विधानसभा में भविष्य में भी सदन की कार्यवाही नियमों और स्थापित परंपराओं के अनुरूप ही संचालित होगी. उन्होंने कहा कि विधानसभा की प्रक्रिया और मर्यादा को बनाए रखना अध्यक्ष की जिम्मेदारी है. किसी भी मुद्दे पर चर्चा के लिए सदस्यों को सदन में निर्धारित नियमों के तहत अपनी बात रखने का अवसर मिलता है.

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