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77 सवालों की बौछार, मौखिक जवाबों का इम्तिहान, हिमाचल विधानसभा के छठे दिन सरकार को घेरने की तैयारी

विभिन्न विभागों, शिक्षा, स्वास्थ्य, लोक निर्माण विभाग, जल शक्ति, बिजली आदि से जुड़े ये 77 सवालों के माध्यम से विधायक अपने क्षेत्रों की सवाल उठाएंगे.

Himachal Assembly Monsoon Session 2026
हिमाचल विधानसभा मानसून सत्र (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Himachal Pradesh Team

Published : August 27, 2026 at 7:57 AM IST

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शिमला: हिमाचल चौदहवीं विधानसभा के 12वें मानसून सत्र का आज छठा दिन है. सुबह 11 बजे जब सदन की कार्यवाही प्रश्नकाल से शुरू होगी, तो सत्ता पक्ष और विपक्ष के विधायक एक साथ 77 सवालों की झड़ी लगाकर सरकार का ध्यान जनता की उन समस्याओं की ओर खींचेंगे, जो गांव-कस्बों से लेकर पहाड़ी सड़कों और अस्पतालों तक फैली हुई हैं. 54 तारांकित प्रश्नों पर मंत्रियों को सदन में खड़े होकर मौखिक जवाब देने होंगे, जबकि 23 अतारांकित सवालों के जवाब लिखित रूप में पटल पर रखे जाएंगे. पिछले पांच दिनों से चली आ रही नोंकझोंक को देखते हुए आज भी सदन में तल्खी और तीखे संवाद के आसार साफ दिख रहे हैं.

21 अगस्त से शुरू हुए इस सत्र में अब तक राष्ट्रगीत-राष्ट्रगान के मुद्दे, रोजगार और रिक्तियों के आंकड़े, आउटसोर्स कर्मचारियों के भविष्य और विकास कार्यों की धीमी गति जैसे विषयों पर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने आ चुके हैं. नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर के नेतृत्व में भाजपा लगातार सरकार को घेर रही है, जबकि मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू और उनके मंत्रिमंडल के सदस्य इन सवालों का जवाब देते हुए अपनी योजनाओं का बचाव कर रहे हैं. आज का प्रश्नकाल उसी सिलसिले की अगली कड़ी है. विभिन्न विभागों, शिक्षा, स्वास्थ्य, लोक निर्माण, जल शक्ति, बिजली, कार्मिक और आपदा प्रबंधन से जुड़े ये 77 सवालों के माध्यम से विधायक अपने क्षेत्रों की तकलीफें उठाएंगे और पूरे प्रदेश की जनहित की तस्वीर सदन के पटल पर रखेंगे.

गैर सरकारी सदस्य कार्य

मानसून सत्र की एक और खास बात यह है कि 27 अगस्त को गैर-सरकारी सदस्य कार्य दिवस भी निर्धारित किया गया है. यानी प्रश्नकाल के बाद निजी सदस्यों के प्रस्ताव और अन्य गैर-सरकारी कार्य भी सदन में आ सकते हैं. वहीं, हिमाचल विधानसभा के मानसून सत्र में नियम-62 के तहत ध्यानाकर्षण प्रस्ताव में नालागढ़ के कांग्रेस विधायक हरदीप सिंह बावा सदन का ध्यान शिवालिक सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट की ओर खींचेंगे. इसी तरह से ऊना के भाजपा विधायक सतपाल सिंह सत्ती लोक निर्माण विभाग की उस व्यवस्था पर सवाल उठाएंगे जिसमें विद्युत कार्यों के ठेके इलेक्ट्रिकल ठेकेदारों को नहीं मिल रहे और इलेक्ट्रिकल विंग को सिविल विंग में समाहित करने की प्रक्रिया चल रही है. वहीं, प्रदेश में महंगा मकान, बच्चों के हाथ में अनियंत्रित स्क्रीन, सड़कों पर घूमते बेसहारा पशु और नदियों-जंगलों को खोखला करता अवैध खनन हिमाचल विधानसभा में इन चार जनसरोकारों पर विधायकों ने सरकार से ठोस नीति बनाने की सिफारिश की है.

संकल्पों की इस कड़ी में बिक्रम सिंह ने प्रधानमंत्री आवास योजना का जिक्र करते हुए कहा कि प्रदेश की कठिन भौगोलिक स्थिति के कारण पात्र लाभार्थियों को मकान बनाने में केंद्र की मानक सहायता पर्याप्त नहीं पड़ती, इसलिए लागत के अनुरूप अतिरिक्त वित्तीय सहायता की नीति पर विचार हो. कुलदीप सिंह राठौर ने बच्चों द्वारा सोशल मीडिया के बढ़ते और अक्सर असुरक्षित उपयोग पर चिंता जताते हुए इसे नियंत्रित व सुरक्षित बनाने वाली नीति की मांग रखी. सुखराम चौधरी और केवल सिंह पठानिया ने सड़कों पर बेसहारा पशुओं के आवागमन से होने वाले हादसों और अव्यवस्था का मुद्दा उठाया और उन्हें गौशालाओं में रखने की स्पष्ट नीति बनाने को कहा. जीत राम कटवाल ने अवैध खनन पर कारगर लगाम और उसके पर्यावरणीय-आर्थिक दुष्प्रभावों के निस्तारण के लिए एक प्रभावशाली नीति पर विचार करने का आग्रह किया.

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