हिमाचल के सभी आंगनवाड़ी केंद्र अब बनेंगे को-स्कूल, खेल-खेल में पढ़ना सीखेंगे बच्चे
सरकार ने आंगनवाड़ी केंद्रों को आंगनवाड़ी सह-स्कूल घोषित किया है. इससे बच्चों की शिक्षा की नींव को मजबूत करने का प्रयास किया जाएगा.

By ETV Bharat Himachal Pradesh Team
Published : March 2, 2026 at 1:52 PM IST
शिमला:आंगनवाड़ी केंद्रों में अब बच्चों की देखभाल के साथ उन्हें औपचारिक स्कूली शिक्षा के साथ जोड़ा जाएगा. हिमाचल प्रदेश सरकार ने सभी आंगनवाड़ी केंद्रों को आंगनवाड़ी सह-स्कूल घोषित किया है. इससे बच्चों की शिक्षा की नींव को मजबूत करने का प्रयास किया जाएगा और 3 से 6 वर्ष तक के बच्चों को खेल आधारित शुरुआती शिक्षा दी जाएगी.
इसके जरिए बच्चों को खेल-खेल में ही पढ़ाने का प्रयास किया जाएगा. इसके लिए आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को विशेष प्रशिक्षण दी जाएगी, जिससे बच्चों की शिक्षा की नींव मजबूत होगी. अधिकारियों ने रविवार को ये जानकारी दी. उन्होंने बताया कि इसके लिए शिक्षा सचिव की अध्यक्षता में एक राज्य स्तरीय संयुक्त समिति का गठन किया गया है। ये समिति स्कूलों के साथ आंगनवाड़ी केंद्रों को जोड़ने के लिए महिला एवं बाल विकास मंत्रालय और शिक्षा मंत्रालय द्वारा जारी दिशा-निर्देशों को प्रभावी ढंग से लागू करने की दिशा में काम करेगी.'
राज्य सरकार के एक प्रवक्ता ने कहा, 'मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व में, मौजूदा राज्य सरकार ने बचपन की देखभाल और बच्चों के विकास की नींव को मज़बूत करने के लिए मजबूत कदम उठाए हैं. पोषण, अच्छी शिक्षा और सबको साथ लेकर चलने वाले विकास पर साफ़ ध्यान देते हुए, सरकार ये सुनिश्चित कर रही है कि हिमाचल प्रदेश में हर बच्चे को आगे बढ़ने और सफल होने के लिए ज़रूरी मदद और मौके मिलें. मौजूदा राज्य सरकार ने बच्चों के पोषण और शुरुआती विकास को अपने गवर्नेंस एजेंडा के केंद्र में रखा है.'
उन्होंने कहा कि संतुलित और पौष्टिक खाना शारीरिक विकास और मानसिक सेहत दोनों के लिए ज़रूरी है, सरकार ने हिमाचल के सबसे छोटे नागरिकों के स्वास्थ्य और भविष्य को सुरक्षित करने के लिए कोशिशें तेज़ कर दी हैं. राज्य भर में लगभग 18,925 आंगनवाड़ी सेंटर कम्युनिटी केयर के पिलर के तौर पर काम कर रहे हैं, जो बच्चों की पोषण और शुरुआती पढ़ाई की ज़रूरतों को पूरा करते हैं. हर महीने, छह साल तक के बच्चों के विकास को खास शारीरिक और विकास के मापदंडों पर ध्यान से मॉनिटर किया जाता है, ताकि यह पक्का हो सके कि कोई भी बच्चा पीछे न छूटे.
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