अंतर जनपदीय स्थानांतरण रद्द करने पर हाईकोर्ट ने सचिव बेसिक शिक्षा को किया तलब, सरकारी वकील के निजी मुकदमे की पैरवी करने पर उठाया सवाल
इलाहाबाद हाईकोर्ट में दो अलग-अलग मामलों की सुनवाई हुई. फर्रुखाबाद केस में सचिव को तलब किया, जबकि सरकारी वकील के निजी मुकदमे पर सवाल उठाया.

By ETV Bharat Uttar Pradesh Team
Published : January 8, 2026 at 10:59 PM IST
प्रयागराज : हाईकोर्ट ने कहा है कि अंतर्जनपदीय स्थानांतरण का आवेदन तकनीकी आधार पर खारिज नहीं किया जा सकता है, यदि आवेदक की ओर से आवेदन करने में कोई गलती नहीं की गई है. कोर्ट ने प्राइमरी स्कूल के हेड मास्टर के अंतर-जनपदीय स्थानांतरण के आवेदन को तकनीकी खामी के आधार पर खारिज किए जाने पर यह टिप्पणी की है. अगली सुनवाई को सचिव बेसिक शिक्षा परिषद को इस मामले में तलब किया है. यह आदेश न्यायमूर्ति मंजू रानी चौहान ने असद उल्ला खान की याचिका पर दिया है.
याची फर्रुखाबाद के नवाबगंज ब्लॉक स्थित प्राथमिक विद्यालय नगला मुकुट में हेड मास्टर के पद पर तैनात हैं. उन्होंने अंतर-जनपदीय स्थानांतरण के लिए आवेदन किया था. उनके इस दावे को 13 नवंबर 2025 को इस आधार पर खारिज कर दिया गया था कि कुछ तकनीकी त्रुटि के कारण समय पर विचार नहीं किया जा सका और अब ऑफलाइन विचार करना कानूनन मान्य नहीं है.
कोर्ट ने कहा कि जब याची ने आवेदन प्रक्रिया में कोई गलती नहीं की है, तो उसे तकनीकी खामियों के कारण अवसर से वंचित नहीं किया जा सकता. कोर्ट ने बेसिक शिक्षा परिषद के सचिव और और जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी की ओर से प्राप्त निर्देशों को अनुचित करार दिया. कोर्ट ने सचिव को तलब किया है.
कोर्ट ने पूछा- क्या सरकारी वकील निजी पक्ष की पैरवी कर सकते हैं : वहीं एक अन्य मामले में सरकारी वकील के निजी मुकदमे की पैरवी करने पर सवाल उठाए हैं. कोर्ट ने पूछा है कि क्या राज्य सरकार के अपर मुख्य स्थायी अधिवक्ता ऐसे मामलों में किसी निजी पक्ष की पैरवी कर सकते हैं, जिनमें उत्तर प्रदेश राज्य स्वयं एक पक्षकार हो. यह आदेश न्यायमूर्ति दिवेश चंद्र सामंत की एकल पीठ ने दिया है.
मामले मीरा देवी बनाम उत्तर प्रदेश राज्य व अन्य की क्रिमिनल रिवीजन की सुनवाई के दौरान सामने आया. सुनवाई के समय विपक्षी की ओर से अधिवक्ता इंद्रसेन सिंह तोमर उपस्थित हुए, जो वर्तमान में राज्य सरकार के अपर मुख्य स्थायी अधिवक्ता भी हैं. इस पर पुनरीक्षणकर्ता के अधिवक्ता ने कड़ी आपत्ति दर्ज कराई और कहा कि सरकारी वकील होने के नाते वे निजी पक्ष का प्रतिनिधित्व नहीं कर सकते.
कोर्ट ने इस आपत्ति को गंभीर मानते हुए प्रमुख सचिव (न्याय) एवं विधि परामर्शी को निर्देश दिया है कि वे अपर मुख्य स्थायी अधिवक्ता के अधिकारों, कर्तव्यों और नियमों के संबंध में विस्तृत रिपोर्ट दाखिल करें. रिपोर्ट में यह स्पष्ट करना होगा कि क्या नियमों के तहत किसी सरकारी वकील को निजी पक्ष की पैरवी की अनुमति है. कोर्ट ने रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए दो सप्ताह का समय दिया है. रजिस्ट्रार (अनुपालन) को 48 घंटे के भीतर आदेश की प्रति संबंधित अधिकारी को भेजने का भी निर्देश दिया है. मामले की अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद होगी.
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