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दो मामले: 25 साल बाद भी समान फैमिली पेंशन देने पर मांगा जवाब, रील एमडी की नियुक्ति रद्द करने के आदेश पर रोक

याचिका में बताया गया कि फैमिली पेंशन जारी होने के 25 साल बीतने के बाद भी उसे समान राशि ही मिल रही है.

Rajasthan High Court
राजस्थान हाईकोर्ट (ETV Bharat File Photo)
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By ETV Bharat Rajasthan Team

Published : February 21, 2026 at 8:59 PM IST

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जयपुर: राजस्थान हाईकोर्ट ने मृत शिक्षक की पत्नी को 25 साल बाद भी समान फैमिली पेंशन की राशि देने पर प्रमुख शिक्षा सचिव और माध्यमिक शिक्षा निदेशक सहित अलवर डीईओ को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है. जस्टिस आनंद शर्मा की एकलपीठ ने यह आदेश कमला देवी की याचिका पर प्रारंभिक सुनवाई करते हुए दिए.

याचिका में अधिवक्ता विजय पाठक ने अदालत को बताया कि याचिकाकर्ता के पति भूप सिंह यादव शिक्षा विभाग में व्याख्याता पद पर तैनात थे. सेवा के दौरान साल 2001 में हुई दुर्घटना में उनका निधन हो गया. इस पर याचिकाकर्ता को फैमिली पेंशन का अधिकारी मानते हुए उसे उसी साल 3950 रुपए मासिक फैमिली पेंशन के तौर पर दिए जाने लगे. याचिका में बताया गया कि फैमिली पेंशन जारी होने के 25 साल बीतने के बाद भी उसे समान राशि ही मिल रही है. जबकि इस दौरान सरकारी कर्मचारियों को दो वेतन आयोग की सिफारिशों का लाभ दिया जा चुका है.

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याचिका में कहा गया कि इसी तरह पेंशनर्स को भी यह लाभ दिया जा चुका है. इसके बावजूद भी याचिकाकर्ता को पुरानी निर्धारित फैमिली पेंशन देना गलत है. याचिकाकर्ता की ओर से इस संबंध में शिक्षा विभाग को कई बार पत्र लिखकर पेंशन पुनर्निर्धारण करने की गुहार की जा चुकी है, लेकिन विभाग की ओर से अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई. याचिका में यह भी कहा गया कि उसे अन्य पेंशनर्स की तरह बढ़ी हुई पेंशन का लाभ दिया जाना चाहिए. जिस पर सुनवाई करते हुए एकलपीठ ने संबंधित अधिकारियों से जवाब तलब किया है.

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राजस्थान हाईकोर्ट की खंडपीठ ने एकलपीठ के उस आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है, जिसमें अदालत ने राजस्थान इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इंस्ट्रूमेंट्स लिमिटेड (रील) के प्रबंध निदेशक के पद पर बृजेश दीक्षित की नियुक्ति को रद्द करते हुए मुख्य सचिव को शामिल करते हुए नए सिरे से चयन प्रक्रिया आरंभ करने को कहा था. कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा और जस्टिस संगीता शर्मा की खंडपीठ ने यह आदेश बृजेश दीक्षित की अपील पर सुनवाई करते हुए दिए.

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अपील में अधिवक्ता सुरुचि कासलीवाल ने अदालत को बताया कि एकलपीठ ने अपीलार्थी की नियुक्ति को सिर्फ इस आधार पर निरस्त कर दिया था कि केन्द्र सरकार की ओर से जारी गाइडलाइन के अनुसार चयन प्रक्रिया में मुख्य सचिव को शामिल नहीं किया गया. जबकि गाइडलाइन वैधानिक बल नहीं रखती है और नियमानुसार भर्ती विज्ञापन की शर्तों के आधार पर नियुक्ति की गई है. इसके अलावा केन्द्र सरकार ने भी अपीलार्थी की नियुक्ति का समर्थन किया है और माना कि चयन के लिए मुख्य सचिव को शामिल करना जरूरी नहीं था और वे चयन बोर्ड के सदस्य भी नहीं थे. जिस पर सुनवाई करते हुए खंडपीठ ने एकलपीठ के आदेश पर रोक लगाते हुए संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है.

गौरतलब है कि एकलपीठ ने डॉ पुरुषोत्तम नारायण शर्मा की याचिका पर सुनवाई करते हुए रील के एमडी पद पर बृजेश दीक्षित के चयन व नियुक्ति को रद्द कर दिया था. वहीं केन्द्र सरकार के सार्वजनिक उपक्रम चयन बोर्ड के अध्यक्ष व भारी उद्योग मंत्रालय के सचिव को निर्देश दिया था कि वे राजस्थान राज्य के मुख्य सचिव को शामिल करते हुए नए सिरे से चयन प्रक्रिया आरंभ करे. एकलपीठ में याचिकाकर्ता रहे पुरुषोत्तम नारायण की ओर से कहा गया था कि रील केन्द्र और राज्य सरकार का संयुक्त उपक्रम है और केन्द्र सरकार की गाइडलाइन के अनुसार मुख्य सचिव को चयन प्रक्रिया में शामिल करना जरूरी था.