बाहरी राज्यों से शादी के बाद हिमाचल बसने वाली महिलाओं को नहीं मिलेगा आरक्षण का लाभ, HC का बड़ा फैसला
महिला आरक्षण से जुड़े मामले में अदालत का बड़ा फैसला. बाहरी राज्यों से शादी के बाद हिमाचल बसने वाली महिलाओं को नहीं मिलेगा ये लाभ.

By ETV Bharat Himachal Pradesh Team
Published : June 3, 2026 at 8:43 PM IST
शिमला: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने आरक्षण के ट्रांसफर से जुड़े मामले में अहम फैसला सुनाया है. हिमाचल हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की अगुवाई वाली खंडपीठ ने स्पष्ट किया है विवाह के बाद अन्य राज्यों से हिमाचल में बसने वाली महिलाओं को जातिगत आरक्षण का लाभ नहीं दिया जा सकता. अदालत ने कहा कि दूसरे राज्यों से विवाह कर हिमाचल में बसने पर महिलाओं को अनुसूचित जाति (SC) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के आरक्षण का लाभ जारी नहीं रखा जा सकता.
हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट फैसले का हवाला देते हुए कहा कि केवल विवाह के आधार पर किसी भी व्यक्ति के जातिगत आरक्षण की पात्रता दूसरे राज्य में स्थानांतरित नहीं हो सकती. हिमाचल हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायमूर्ति बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने ये अहम फैसला सुनाया है.
दरअसल, आरक्षण से जुड़े मामले में 3 अलग-अलग LPA हिमाचल हाई कोर्ट पहुंची थी. याचिका कर्ता जसविंदर कौर, सर्वजीत सैनी और अनु रानी की ओर से एलपीए दायर की गई थी. इन अलग-अलग याचिकाओं में कहा गया था मूल रूप से पंजाब और हरियाणा की रहने वाली इन महिलाओं ने हिमाचल प्रदेश में अपनी ही जाति के पुरुषों से शादी की. इसके बाद में उन्हें हिमाचली स्थायी निवास प्रमाणपत्र यानी बोनाफाइड भी जारी कर दिए गए थे. इसी प्रमाणपत्र के आधार पर उन्होंने हिमाचल में सरकारी नौकरियों और अन्य आरक्षण संबंधी लाभों का दावा किया था. लेकिन, राज्य सरकार ने इनका दावा खारिज करते हुए हवाला दिया कि जन्म से वे हिमाचल प्रदेश की निवासी नहीं हैं. ऐसे में उन्हें हिमाचल में आरक्षण लाभ नहीं दिया जा सकता.
याचिकाकर्ता में से दो महिलाएं पंजाब की सैनी जाति से थीं, जो पंजाब में ओबीसी वर्ग में आती हैं. वहीं, एक महिला हरियाणा के वाल्मीकि समुदाय से थी जिसे वहां अनुसूचित जाति/SC का दर्जा प्राप्त है. ऐसे में महिला याचिका कर्ताओं की अपील थी क्योंकि उन्होंने अपनी ही जाति की पुरुषों के साथ विवाह किया है, ऐसे में हिमाचल प्रदेश में भी उनके आरक्षण अधिकार को बरकरार रखा जाए.
HC ने राज्य सरकार के रुख को सही ठहराया
मामले में मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायमूर्ति बिपिन चंद्र नेगी की डबल बेंच ने सरकार के निर्णय को वैध ठहराया. अदालत ने अपने फैसले में कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही स्पष्ट रूप से कहा है कि किसी व्यक्ति को विवाह के कारण जिस राज्य में वह जाकर बसता है, वहां आरक्षण का लाभ नहीं दिया जा सकता. इसलिए अदालत सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का पालन करने के लिए बाध्य है. न्यायिक परंपरा और पूर्व निर्णयों के सिद्धांत के अनुसार अदालत इससे अलग निर्णय नहीं दे सकती. अदालत ने स्पष्ट किया कि SC, ST और OBC की पहचान 'राज्यवार' होती है. इसका लाभ केवल उसी राज्य में मिलता है जहां संबंधित समुदाय को अधिसूचित किया गया है.
अदालत ने रंजना कुमारी बनाम स्टेट ऑफ उत्तराखंड मामले में सुप्रीम कोर्ट की थ्री जजमेंट के फैसले का हवाला दिया. आरक्षण के ट्रांसफर से जुड़े इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब की वाल्मीकि समुदाय की एक महिला के उत्तराखंड में विवाह करने के बाद उसे उत्तराखंड में एससी आरक्षण का लाभ देने से इनकार कर दिया था.
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