नई दिल्ली रेलवे स्टेशन हादसा केस: हाईकोर्ट ने रेलवे को लगाई फटकार, कहा- हल्के में मत लीजिए
कोर्ट ने कहा कि क्या आप यह चाहते हैं कि हम कोई गंभीर कदम उठाएं और रेलवे को चार हफ्ते का समय दिया.

Published : January 7, 2026 at 8:15 PM IST
|Updated : January 7, 2026 at 8:43 PM IST
नई दिल्ली: दिल्ली हाईकोर्ट ने 15 फरवरी, 2025 को नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर हुए भगदड़ के मामले पर अभी तक जवाब दाखिल नहीं करने पर रेलवे प्रशासन को फटकार लगाई है. चीफ जस्टिस डीके उपाध्याय की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि एक साल बीतने के बावजूद रेलवे प्रशासन ने इस पर जवाब दाखिल नहीं किया है. कोर्ट ने कहा कि आप कोर्ट को हल्के में मत लीजिए. आप चाहते है कि हम कोई गंभीर कदम उठायें. हालांकि बाद में कोर्ट ने रेलवे प्रशासन को चार हफ्ते में जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया.
दरअसल, पिछले साल 19 फरवरी को हाईकोर्ट ने रेलवे को नोटिस जारी करते हुए कहा था कि आप अधिकतम यात्रियों और प्लेटफार्म टिकट की बिक्री तय करने पर विचार करें. कोर्ट ने रेलवे को निर्देश दिया था कि वे ऐसे भगदड़ से निपटने के लिए उठाए गए कदमों से अवगत कराएं. सुनवाई के दौरान रेलवे की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा था कि इसे एक प्रतिकूल तरीके से नहीं लिया जाए, रेलवे नियमों का पालन करने के लिए बाध्य है.
सुनवाई के दौरान उन्होंने यह भी कहा था कि हादसे के दिन अप्रत्याशित स्थिति पैदा हो गई थी. साथ ही उन्होंने कोर्ट को भरोसा दिया था कि याचिका में उठाए गए सवालों पर रेलवे उच्च स्तर पर विचार करेगा तब कोर्ट ने कहा था कि याचिका केवल हालिया भगदड़ से जुड़ी नहीं है, बल्कि रेलवे कंपार्टमेंट के अंदर यात्रियों की अधिकतम संख्या और प्लेटफार्म टिकट के कानूनी प्रावधानों से जुड़ा हुआ है. कोर्ट ने यह भी कहा था कि अगर कानूनी प्रावधानों को लागू किया गया होता तो शायद नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर भगदड़ की नौबत नहीं आती.
याचिका लॉ छात्रों के एक समूह अर्थ विधि ने दायर की है. याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील आदित्य त्रिवेदी और शुभि पास्टर ने कहा था कि रेलवे प्रशासन ने रेलवे एक्ट की धारा 57 और 147 का उल्लंघन किया है. धारा 57 में कहा गया है कि रेलवे प्रशासन को हर रेलवे कंपार्टमेंट में यात्रियों की अधिकतम संख्या तय करनी होगी. वहीं धारा 147 के तहत किसी व्यक्ति के पास यात्री टिकट नहीं होने की स्थिति में प्लेटफार्म टिकट उपलब्ध कराने का प्रावधान है. याचिका में कहा गया कि प्रयागराज कुंभ के लिए रेलवे को इन नियमों का पालन करना चाहिए था, ताकि भीड़ को नियंत्रित किया जा सके.
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