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हाईकोर्ट ने उम्रदराज दोषियों की सजा पर लगाई रोक, जमानत मंजूर

अदालत ने दोषियों की वृद्धावस्था पर विशेष सहानुभूतिपूर्वक विचार किया. व्यक्तिगत मुचलके और दो जमानतदार पेश करने पर रिहा करने का निर्देश दिया है.

इलाहाबाद हाईकोर्ट.
इलाहाबाद हाईकोर्ट. (Photo Credit; ETV Bharat)
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By ETV Bharat Uttar Pradesh Team

Published : May 30, 2026 at 10:39 PM IST

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प्रयागराज : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कई उम्रदराज दोषियों की अपील पर सुनवाई करते हुए उनकी सजा निलंबित कर दी है. साथ ही ज़मानत पर रिहा करने का आदेश दिया है. न्यायमूर्ति सिद्धार्थ वर्मा और न्यायमूर्ति जय कृष्ण उपाध्याय की खंडपीठ को मामले की सुनवाई के दौरान बताया गया कि यह मामला परिस्थितिजन्य साक्ष्यों पर आधारित है.

बचाव पक्ष के वकीलों ने तर्क दिया कि दोषियों को संदेह के आधार पर फंसाया गया है और उनके खिलाफ कोई प्रत्यक्ष सबूत नहीं है. साथ ही, यह भी स्पष्ट किया गया कि ये सभी दोषी मुकदमे के दौरान भी जमानत पर थे और उन्होंने कभी इसका दुरुपयोग नहीं किया.

अदालत ने दोषियों की वृद्धावस्था पर विशेष सहानुभूतिपूर्वक विचार किया. रिकॉर्ड के अनुसार, मोहम्मद अयूब फैजी और अली जहीर फैसले के समय 85 वर्ष के थे, जबकि मोहम्मद याकूब, मोहम्मद असद, अफजल और अलाउद्दीन की आयु 70 वर्ष है.

इन तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए, हाईकोर्ट ने दोषियों की सजा को अपील के अंतिम निर्णय तक स्थगित करने का आदेश दिया. कोर्ट ने हुसेन अहमद, फहीम अख्तर, मोहम्मद याकूब, इरशाद अहमद, दिलशाद अहमद, वसीम अहमद, मोहम्मद अयूब फैजी, असरार अहमद, अली जहीर, मोहम्मद असद, अफजल और अलाउद्दीन को व्यक्तिगत मुचलके और दो जमानतदार पेश करने पर रिहा करने का निर्देश दिया है.

इसके अतिरिक्त, अपील के निर्णय आने तक दोषियों पर लगाए गए जुर्माने की वसूली पर भी रोक लगा दी गई है. कोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 16 नवंबर 2026 की तारीख निर्धारित की है.

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