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ट्रायल कोर्ट के हिंदी और अंग्रेजी मिश्रित फैसलों पर हाई कोर्ट ने जताई आपत्ति, एक भाषा में आदेश लिखने के निर्देश

आगरा की सत्र अदालत द्वारा दिए गए 54 पन्नों के फैसले में 63 पैराग्राफ अंग्रेजी, 125 हिंदी और 11 पैराग्राफ दोनों भाषाओं में थे

इलाहाबाद हाईकोर्ट.
इलाहाबाद हाईकोर्ट. (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Uttar Pradesh Team

Published : November 14, 2025 at 8:40 PM IST

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प्रयागराजः उत्तर प्रदेश विचारण न्यायलय (ट्रायल कोर्ट) अपने फैसले पूरी तरह हिंदी में या पूरी तरह अंग्रेजी में लिखें. दोनों भाषाओं को मिलाकर लिखा गया निर्णय स्वीकार्य नहीं है. यह टिप्पणी इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक मामले की सुनवाई करते हुई की.

हाई कोर्ट ने आगरा की सत्र अदालत द्वारा दिए गए एक फैसले को इसका सर्वोत्तम उदाहरण बताते हुए इसकी प्रति मुख्य न्यायाधीश और पूरे राज्य के न्यायिक अधिकारियों को भेजने का निर्देश दिया. हाईकोर्ट ने पाया कि विवादित फैसला 54 पन्नों का था, जिसमें 63 पैराग्राफ अंग्रेजी, 125 हिंदी और 11 पैराग्राफ दोनों भाषाओं के मिश्रण में थे. जिससे साधारण हिंदी भाषी व्यक्ति फैसला समझ नहीं सकता. कोर्ट ने कहा कि निर्णय एक ही भाषा में लिखा जाना चाहिए. हालांकि सुप्रीम कोर्ट/हाईकोर्ट के अंग्रेजी अंश या हिंदी में दर्ज मृत्यु कालिक कथन जैसे उद्धरण अपनी मूल भाषा में दिए जा सकते हैं, बशर्ते उनका अनुवाद भी दिया जाए.

मामले के अनुसार हाईकोर्ट ने 2021 की दहेज मृत्यु में पति को दोषमुक्त करने के निर्णय को सही ठहराते हुए कहा कि अभियोजन दहेज मांग से जुड़ी क्रूरता साबित नहीं कर सका. मृतका की मृत्यु सात वर्ष के भीतर और अप्राकृतिक (एल्यूमिनियम फॉस्फाइड विषाक्तता) से हुई थी थी. लेकिन गवाहों के बयान विरोधाभासी थे और कोई मृत्यु से पूर्व क्रूरता सिद्ध नहीं हुई. रिकॉर्ड से यह भी सामने आया कि पति ने पत्नी को अस्पताल पहुंचाया, बिल भरे और अंतिम संस्कार किया, जो उसके सद्भावपूर्ण आचरण को दर्शाता है. हाईकोर्ट ने कहा कि ट्रायल कोर्ट का फैसला साक्ष्यों की सही सराहना पर आधारित है और अपील खारिज कर दी.

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