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NIA के डीएसपी की हत्या मामले में हाईकोर्ट के जजों ने दिया अलग-अलग फैसला, एक ने बरी किया, दूसरे ने फांसी को उम्रकैद में बदला

2016 में डीएसपी तंजील और उनकी पत्नी की हत्या कर दी गई थी. अंतिम निर्णय के लिए मुख्य न्यायमूर्ति को अपील भेजी गई है.

हाईकोर्ट के जजों ने दिया अलग-अलग फैसला.
हाईकोर्ट के जजों ने दिया अलग-अलग फैसला. (Photo Credit; ETV Bharat)
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By ETV Bharat Uttar Pradesh Team

Published : December 12, 2025 at 10:31 PM IST

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प्रयागराज : राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) के डीएसपी मोहम्मद तंजील और उनकी पत्नी फरजाना की हत्या के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शुक्रवार को अलग-अलग फैसला सुनाया है. ट्रायल कोर्ट ने घटना के आरोपियों को फांसी की सजा सुनाई थी. फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील दाखिल की गई. फांसी की सजा का रेफरेंस भी हाईकोर्ट भेजा गया. दोनों पर एक साथ सुनवाई हुई.

खंड पीठ के न्यायमूर्ति जस्टिस हरवीर सिंह ने मुख्य दोषी रेहान की दोषसिद्धि को बरकरार रखते हुए मृत्युदंड की सजा को आजीवन कारावास में बदल दिया. वहीं न्यायमूर्ति जस्टिस राजीव गुप्ता ने अभियुक्त को संदेह का लाभ देकर बरी कर दिया. फैसले के अंत में जजों ने अपील पर अंतिम निर्णय के लिए मामले को मुख्य न्यायायाधीश को उचित बेंच नामित करने के लिए संदर्भित कर दिया है.

बिजनौर के थाना स्योहारा में मोहम्मद तंजील के भाई मोहम्मद रागिब ने 3 अप्रैल 2016 को मुकदमा दर्ज कराया था. आरोप लगाया था कि भांजी की शादी से देर रात लौटते समय तंजील व पत्नी फरजाना पर रास्ते में मोटरसाइकिल सवार दो लोगों ने अंधाधुंध फायरिंग की. जिससे दोनों की मौत हो गई. ट्रायल कोर्ट ने मुनीर और रेहान को दोषी ठहराते हुए फांसी की सजा सुनाई. सजा के ​खिलाफ दोनों ने हाईकोर्ट में अपील दायर की. वहीं अपील के लंबित रहने के दौरान मुनीर की मौत हो गई. ऐसे में उसकी अपील समाप्त हो गई.

याची के अधिवक्ता ने दलील दी कि अभियोजन पक्ष अभियुक्त के खिलाफ संदेह से परे अपराध साबित करने में विफल रहा है. उन्होंने पहचान और आपराधिक साजिश से संबंधित साक्ष्यों पर गंभीर संदेह उठाया. दलील दी कि यदि दोषसिद्धि कायम भी रहती है, तो यह मामला "दुर्लभ में दुर्लभतम" श्रेणी में नहीं आता है. मौत की सजा को आजीवन कारावास में बदलने का आग्रह किया.

राज्य सरकार की ओर से सरकारी अधिवक्ता सैयद काशिफ अब्बास रिजवी ने ट्रायल कोर्ट के फैसले का समर्थन किया. दलील दी ​कि अभियुक्तों ने सुनियोजित साजिश के तहत अधिकारी और उनकी पत्नी की निर्मम हत्या की. उन्होंने कहा कि अभियोजन पक्ष ने मकसद और परिस्थितिजन्य साक्ष्य की श्रृंखला प्रस्तुत कर दोषी साबित किया है. यह एक दुर्लभतम मामला है, क्योंकि अपराध की प्रकृति बेहद जघन्य है और यह समाज पर गंभीर प्रभाव डालता है. उन्होंने खंडपीठ से ट्रायल कोर्ट के मृत्युदंड को पुष्टि करने की मांग की.

पक्षों को सुनने के बाद न्यायमूर्ति हरवीर सिंह ने ट्रायल कोर्ट दोषसिद्धि को सही ठहराया, लेकिन मृत्युदंड को कम करके आजीवन कारावास में बदल दिया. वहीं, न्यायमूर्ति राजीव गुप्ता ने अभियुक्त रेहान को बरी करने का मत व्यक्त किया. दोनों न्यायाधीशों की अलग-अलग राय होने के कारण मामले को अंतिम सुनवाई और निर्णय के लिए मुख्य न्यायाधीश को रेफर कर दिया गया.

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