सड़कों पर अनफिट ई-रिक्शा पर हाईकोर्ट सख्त, परिवहन विभाग करेगा ताबड़तोड़ कार्रवाई
लखनऊ में 66 हजार ई रिक्शा में से 53 हजार अनफिट

By ETV Bharat Uttar Pradesh Team
Published : September 1, 2026 at 1:58 PM IST
लखनऊ. उत्तर प्रदेश की सड़कों पर परिवहन विभाग में रजिस्टर्ड ई रिक्शा के इतर अवैध ई रिक्शा की भरमार हो गई है. इन वाहनों की संख्या लाखों में पहुंच गई है. ई रिक्शा सिर्फ आम लोगों के लिए जाम का ही सबब नहीं बन रहे हैं, बल्कि हादसों का भी बड़ा कारण बन रहे हैं. ऐसे ई रिक्शा पर अब हाई कोर्ट सख्त हो गया है. न्यायालय की सख्ती के बाद परिवहन विभाग भी अब इन अवैध ई रिक्शा के खिलाफ सख्त एक्शन लेने की तैयारी कर चुका है. ई रिक्शा के खिलाफ ताबड़तोड़ अभियान चलाया जाएगा. उन्हें प्रपत्र न होने पर बंद कराया जाएगा.
दरअसल, लखनऊ आरटीओ कार्यालय में 66000 से ज्यादा ई रिक्शा रजिस्टर्ड हैं, लेकिन इनमें से 53000 से ज्यादा ई रिक्शा अनफिट हैं. रजिस्टर्ड कराने के बाद इन ई रिक्शा संचालकों ने दोबारा कभी ई रिक्शा के फिटनेस करने की जहमत नहीं उठाई. ऐसे में यह अनफिट ई रिक्शा यमराज बनाकर सड़कों पर दौड़ रहे हैं. इन वाहनों की बढ़ती जबरदस्त संख्या पर परिवहन विभाग से हाईकोर्ट ने जवाब तलब किया है.
हाईकोर्ट ने परिवहन विभाग से मांगा जवाब: लखनऊ के आरटीओ (प्रवर्तन) प्रभात पांडेय ने बताया कि हाईकोर्ट ने परिवहन विभाग से ई रिक्शा की लगातार बढ़ती संख्या को लेकर चिंता जताते हुए जवाब मांगा है. 10 सितंबर को हाई कोर्ट में फिर से सुनवाई है. हाई कोर्ट ने कहा है कि ई रिक्शा के लिए कोई तो पॉलिसी होनी चाहिए सरकार को ऐसे चुप नहीं बैठ जाना चाहिए.
रजिस्ट्रेशन कंट्रोल करने की कोई व्यवस्था नहीं: उन्होंने बताया कि उच्च न्यायालय ने पूछा था कि ई रिक्शा के लिए कोई पॉलिसी है कि नहीं? क्या जिलों में ई-रिक्शा की सीमा निर्धारित करने के लिए कोई कैंप लगाया गया है? इन दोनों पॉइंट्स पर इंस्ट्रक्शन हम लोगों की तरफ से और शासन की तरफ से लगा दिया गया था. मोटर व्हीकल एक्ट में ई रिक्शा का रजिस्ट्रेशन कंट्रोल करने की कोई व्यवस्था नहीं है.
हम रजिस्ट्रेशन रोक नहीं सकते. परमिट से छूट है तो इनके संचालन पर रोक नहीं लग पाती. यह कहीं भी चल रहे हैं. उच्च न्यायालय ने पिछले डेट में आदेश किया कि गवर्नमेंट ऐसे नहीं बैठ सकती है इस पर गवर्नमेंट कोई पॉलिसी डिसाइड करे और बताए.
एक-दो दिन में शासन और हेड क्वार्टर की बैठक: उन्होंने बताया कि 10 सितंबर से पहले विभाग और शासन की ओर से इस पर इंस्ट्रक्शन लगा है. उच्च न्यायालय के आदेश से शासन और मुख्यालय को अवगत करा दिया गया है, जल्द ही एक-दो दिन में शासन और हेड क्वार्टर की बैठक होगी तो उस बैठक के आधार पर जो भी निर्णय होगा, जो नीति निर्धारित होगी उसके मुताबिक न्यायालय को अवगत कराया जाएगा.
करीब 66000 ई रिक्शा रजिस्टर्ड हैं: आरटीओ इंफोर्समेंट प्रभात पांडेय ने बताया कि लखनऊ की बात की जाए तो यहां करीब 66000 ई रिक्शा रजिस्टर्ड हैं और 5000 से कुछ ज्यादा ई कार्ट हैं. समस्या ई रिक्शा की है. ई कार्ट की तो समस्या नहीं है. शहर में यातायात पुलिस की तरफ से कई मार्ग प्रतिबंधित किए गए हैं. अभी हाल ही में कमता और पॉलिटेक्निक रूट पर इनके संचालन पर भी प्रतिबंध लगाया गया है, लेकिन देखा जा रहा है कि इस पर भी ई रिक्शा का संचालन हो रहा है.
लखनऊ के एआरटीओ प्रवर्तन को निर्देश दिया है कि उच्च न्यायालय के आदेश के क्रम में और जो प्रतिबंध लगाया गया है वहां पर नगर निगम की तरफ से बोर्ड भी लगाया गया है, इस एरिया में अगर ई रिक्शा पाए जाएं तो उनको पकड़ कर बंद किया जाए.
बड़ी संख्या में ई रिक्शा की फिटनेस खत्म हो गई है: उन्होंने बताया कि यह भी देखा गया है कि बहुत बड़ी संख्या में ई रिक्शा की फिटनेस खत्म हो गई है. फिटनेस नहीं करा रहे हैं. जब से एटीएस में फिटनेस गई है तब से उनकी टेंडेंसी और बदल गई है. फिटनेस करा ही नहीं रहे. इस पर प्रवर्तन टीम के जरिए रोजाना अभियान चलाकर जिनकी फिटनेस खत्म है उनको बंद कराएंगे. जो प्रतिबंधित रूट पर चल रहे हैं उनको भी बंद कराएंगे.
हमारे पास प्रवर्तन टीम कम है. वर्तमान में सिर्फ एक एआरटीओ ही काम कर रहे हैं. वह जितना कर सकते हैं उनसे प्रवर्तन कार्रवाई कराएंगे. शासन की तरफ से जो निर्णय लिया जाएगा उससे न्यायालय को अवगत कराया जाएगा.
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