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अदालत के दो फैसले: हाईकोर्ट ने एकलपीठ का आदेश किया रद्द, पॉक्सो के दोषी को 20 साल की सजा

हाईकोर्ट ने एकलपीठ के आदेश रद्द किए, वहीं पॉक्सो केस में नाबालिग से दुष्कर्म के दोषी को 20 साल कैद की सजा सुनाई.

Rajasthan Highcourt
राजस्थान हाईकोर्ट (ETV Bharat Jaipur)
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By ETV Bharat Rajasthan Team

Published : February 28, 2026 at 3:57 PM IST

3 Min Read
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जयपुर: राजस्थान हाईकोर्ट की खंडपीठ ने एक महत्वपूर्ण मामले में एकलपीठ के उन आदेशों को रद्द कर दिया, जिसमें याचिका से परे जाकर दिशा-निर्देश जारी किए गए थे. वहीं एक अन्य मामले में पॉक्सो अदालत ने नाबालिग चचेरी बहन से दुष्कर्म के दोषी को 20 साल कैद की सजा सुनाई.

एकलपीठ के आदेश रद्द: जस्टिस इन्द्रजीत सिंह और जस्टिस रवि चिरानिया की खंडपीठ ने उपेन्द्र सिंह की अपील पर सुनवाई करते हुए एकलपीठ के 24 अप्रैल और 29 अप्रैल के आदेश रद्द कर दिए. एकलपीठ ने सरकारी आवासों से संबंधित याचिका को जनहित याचिका में बदलते हुए याचिकाकर्ता को जमानती वारंट से तलब किया था और उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए थे. अधिवक्ता सुनील समदड़िया के माध्यम से खंडपीठ में अपील की गई. अधिवक्ता समदड़िया ने तर्क दिया कि याचिकाकर्ता के रिटायर होने से मामला समाप्त हो गया था, लेकिन एकलपीठ ने इसे जनहित याचिका की तरह लेते हुए आपराधिक कार्रवाई के आदेश दे दिए.

अपील की सुनवाई के दौरान अधिवक्ता सुनील समदड़िया ने अदालत को बताया कि हाईकोर्ट की एकलपीठ के समक्ष दो याचिकाएं पेश हुई थी. जिनमें याचिकाकर्ताओं को सरकारी आवास खाली करने के लिए दिए नोटिस को चुनौती दी गई. वहीं बाद में याचिकाकर्ताओं के रिटायर होने पर एकलपीठ ने 24 फरवरी, 2025 को माना कि विवाद समाप्त हो गया, लेकिन याचिका निस्तारित करने के बजाय एकलपीठ ने राज्य सरकार से सरकारी आवास में रह रहे रिटायर व तबादला हो चुके कर्मचारियों को लेकर जानकारी मांगी. राज्य सरकार की ओर से तय समय में जानकारी नहीं देने पर कोर्ट ने दिव्येश माहेश्वरी को कोर्ट कमिश्नर और योगिता बिश्नोई को समन्वयक नियुक्त किया.

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निरीक्षण के दौरान वे अपीलार्थी की अनुपस्थिति में उसके घर पहुंचे. वहीं बाद में अपीलार्थी के लौटने पर योगिता विश्नोई, जो अपीलार्थी की पड़ोसी थी, से उसका विवाद हो गया. इस पर योगिता ने पहले पुलिस में शिकायत दी और एक माह बाद एकलपीठ के समक्ष प्रार्थना पत्र पेश कर अपीलार्थी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की गुहार की. एकलपीठ ने 24 अप्रैल को अपीलार्थी को जमानती वारंट से तलब किया और 29 अप्रैल को उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए. इसे चुनौती देते हुए कहा गया कि एकलपीठ ने रिट याचिका को आपराधिक याचिका की तरह लेते हुए एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए. वहीं मुद्दा समाप्त होने के बाद भी उसे जनहित याचिका के तौर पर चलाया. इस पर सुनवाई करते हुए खंडपीठ ने एकलपीठ के दोनों आदेशों को रद्द कर दिया है.

पॉक्सो के दोषी को 20 साल की सजा: वहीं, जयपुर जिले की पॉक्सो मामलों की विशेष अदालत ने नाबालिग चचेरी बहन का अपहरण कर दुष्कर्म करने वाले 24 वर्षीय अभियुक्त को 20 साल के कारावास और 1.75 लाख रुपए जुर्माने की सजा सुनाई. पीठासीन अधिकारी के सी अटवासिया ने कहा कि नाबालिगों के साथ लैंगिक अपराधों में वृद्धि को देखते हुए अभियुक्त के प्रति नरमी नहीं बरती जा सकती. अभियोजक कमलेश शर्मा ने बताया कि आरोपी ने 2 सितंबर 2022 को स्कूल से लौट रही पीड़िता को बहला-फुसलाकर होटल में ले जाकर अपने दोस्त के साथ मिलकर दुष्कर्म किया था. पीड़िता के ताऊ की रिपोर्ट पर पुलिस ने आरोप पत्र पेश किया था. अदालत ने पीड़िता के बयानों के आधार पर अभियुक्त को सजा सुनाई.