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हाईकोर्ट ने अपहरण के आरोप में आपराधिक मुकदमे की कार्यवाही रद्द की, कहा- घर से भागकर किसी के साथ रहना अपराध नहीं

अपील में संज्ञान लेने व सम्मन जारी करने सहित केस कार्यवाही की वैधता को चुनौती दी गई थी.

Allahabad High Court.
Allahabad High Court. (Photo Credit; ETV Bharat)
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By ETV Bharat Uttar Pradesh Team

Published : February 26, 2026 at 9:46 PM IST

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प्रयागराज : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक आदेश में कहा है कि नाबालिग का अपनी मर्जी से घर से भागकर किसी के साथ रहने भर से अपराध नहीं बनता. माता पिता की फटकार के बाद घर छोड़कर प्रेमी से मिलने और नेपाल जाकर 67 दिन साथ रहने के नाबालिग पीड़िता के बयान पर यह नहीं कहा जा सकता कि उसका अपहरण किया गया था.

यह आदेश न्यायमूर्ति अनिल कुमार ने सुनील की अपील पर दिया है. इसी के साथ कोर्ट ने अपहरण के आरोप में विशेष न्यायाधीश सिद्धार्थनगर द्वारा जारी सम्मन आदेश सहित आपराधिक मुकदमे की कार्यवाही रद्द कर दी है. अपील में संज्ञान लेने व सम्मन जारी करने सहित केस कार्यवाही की वैधता को चुनौती दी गई थी.

अपीलार्थी के अधिवक्ता दीपक कुमार श्रीवास्तव का कहना था कि 17 वर्षीय पीड़िता ने माता-पिता की डांट फटकार के कारण घर छोड़ दिया और अपीलार्थी से आ मिली. दोनों कुछ दिनों तक नेपाल में रहे और वापस लौटने पर भी पीड़िता अपने पिता के घर नहीं गई.

पीड़िता ने अदालत में बयान दिया कि वह पिछले चार साल से अपीलार्थी से बातचीत कर रही है. दोनों नेपाल में साथ रहे, उसके साथ कुछ ग़लत नहीं किया गया. उसने स्वयं घर छोड़ा था. उसका अपहरण नहीं किया गया. इस पर हाईकोर्ट ने मुकदमे की कार्यवाही रद्द कर दी.

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