हर्बल गुलाल और रंगों से खेलें होली, पलामू में जेएसएलपीएस से जुड़ी दीदियों ने की तैयारी
पलामू में हर्बल गुलाल और रंग तैयार किया जा रहा है. होली पर इसकी बिक्री होगी.

Published : March 1, 2026 at 8:09 PM IST
रिपोर्ट- नीरज कुमार.
पलामूः पिछले तीन वर्षों में होली के दौरान हर्बल गुलाल की मांग तीन गुना बढ़ गई है. 2025 में पलामू में सखी दीदियों ने पांच क्विंटल हर्बल गुलाल और रंग तैयार किया था. इस बार 10 क्विंटल हर्बल गुलाल तैयार किया गया है. हर्बल गुलाल की मांग झारखंड के कई इलाकों में है.
सखी दीदियां तैयार कर रही हर्बल रंग और गुलाल
होली से पहले पलामू में झारखंड लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी (JSLPS)से जुड़ी हुईं सखी दीदियां हर्बल गुलाल और रंग तैयार करने में जुट जाती हैं. पहले हर्बल रंग और गुलाल लेस्लीगंज के इलाके में तैयार किया जाता था, लेकिन अब पलामू के नौडीहा बाजार समिति कई इलाकों में तैयार किया जा रहा है.
10 क्विंटल हर्बल रंग और गुलाल होगा तैयारः डीडीसी
इस संबंध में पलामू के उपविकास आयुक्त जावेद हुसैन ने बताया कि पहले सखी दीदियां तीन से चार क्विंटल हर्बल गुलाल तैयार करती थीं. इस बार 10 क्विंटल तैयार किया जा रहा है. डीडीसी ने बताया कि हर्बल गुलाल और रंग को पलाश मार्ट के माध्यम से विभिन्न स्टॉलों पर बेचा जाएगा. प्राकृतिक रंग एवं हर्बल गुलाल से कोई नुकसान नहीं होता है.
प्राकृतिक चीजों से किया जाता है तैयार
प्राकृतिक चीजों से हर्बल गुलाल और रंग को तैयार किया जाता है. हर्बल गुलाल को तैयार करने में चुकंदर, आरारोट, पालक साग, हल्दी, गेंदा का फूल, नीम के पत्ते, पलाश के फूल, गुड़हल का फूल का इस्तेमाल किया जाता है. पलामू का इलाका पलाश के फूल के लिए पूरे झारखंड में चर्चित है. होली से पहले पलाश के फूल खिल जाने के बाद रंग में सबसे अधिक पलाश के फूलों का इस्तेमाल किया जाता है. इसके लिए पहले पलाश के फूल को सुखाया जाता है और उसके पाउडर से हर्बल गुलाल और रंग तैयार किया जाता है.
वहीं हर्बल गुलाल और रंग तैयार करने वाली सखी दीदी नागवंती बताती हैं कि दो दिन में हर्बल रंग और गुलाल तैयार हो जाता है. इसे बनाने में प्रति किलो 300 रुपये की लागत आती है.
हर्बल गुलाल और रंग से महिलाएं बन रही हैं स्वावलंबी
हर्बल गुलाल और रंग ग्रामीण इलाके की महिलाओं के लिए रोजगार का एक नया जरिया बन गया है. होली के दौरान महिलाएं इसे तैयार कर रही हैं और बाजारों में बेच रही हैं. हर्बल गुलाल और रंग के उत्पादन के लिए झारखंड लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी महिलाओं को सामग्री उपलब्ध करवाती है. बाद में महिलाएं हर्बल रंग और गुलाल को तैयार करती हैं और बाजार में बेचती हैं. प्रति किलो 300 रुपये की लागत आती है, जबकि बाजार में हर्बल गुलाल और रंग 500 रुपये प्रति किलो की दर से भी अधिक कीमत पर बिकती है.
इस संबंध में झारखंड लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी की डीपीएम अनीता केरकेट्टा बताती हैं कि हर्बल रंग और गुलाल की मांग लगातार बढ़ रही है और सखी दीदियां इसे तैयार कर रही हैं. झारखंड लाइवलीहुड प्रमोशनल सोसाइटी सखी दीदियों के लिए बाजार भी उपलब्ध करवा रहा है.
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