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हार्ट अटैक आने पर क्या गलती करते हैं लोग, एक्सपर्ट ने बताया कैसे दोगुना बढ़ जाएंगे मरीज के बचने के चांस

हर्ष महाजन के अचेत होने के बाद लोगों की गलत प्रतिक्रिया पर डॉक्टरों ने उठाए सवाल. जानें बेहोशी, हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट में अंतर.

हार्ट अटैक आने पर क्या गलती करते हैं लोग
हार्ट अटैक आने पर क्या गलती करते हैं लोग (Eenadu)
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By ETV Bharat Himachal Pradesh Team

Published : June 29, 2026 at 6:47 PM IST

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Updated : June 29, 2026 at 7:09 PM IST

10 Min Read
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शिमला: पिछले दिनों बीजेपी नेता हर्ष महाजन की एक प्रदर्शन के दौरान तबीयत बिगड़ गई थी. स्वास्थ्य खराब होने के चलते वो अचानक से अचेत हो गए थे. उनके आस-पास खड़े लोग एकदम घबरा गए. आनन-फानन में लोगों ने खड़े-खड़े ही उन्हें सीपीआर देना शुरू कर दिया और मौके पर हड़बड़ी का माहौल पैदा हो गया. लोग इसे हार्ट अटैक समझ बैठे. इसी डर के कारण लोगों ने खड़े खड़े ही हर्ष महाजन की छाती को हार्ट के उल्टी तरफ दाईं ओर दबाना शुरू कर दिया.

लोग उन्हें हड़बड़ाहट में तुरंत टैक्सी के जरिए आईजीएमसी ले गए. अस्पताल में कुछ देर तक डॉक्टरों की निगरानी में रहने के बाद उन्हें राहत मिली और वो स्वास्थ्य महसूस करने लगे. अब मौके पर हर्ष महाजन को देखकर आसपास के लोगों ने जो प्रतिक्रिया दी उसे लेकर डॉक्टरों ने सवाल उठाए हैं. डॉक्टर्स का कहना है कि हमारे आस पास लोगों को ऐसी स्थिति से निपटना भी नहीं आता है, हमारे लोगों को बेसिक लाइफ स्पोर्ट की जानकारी का आभाव है. डॉक्टरों ने बताया कि उस स्थिति में लोगों ने जो कदम उठाए वो एकदम गलत थे, इससे मरीज की हालत और बिगड़ सकती थी. अब इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई है कि लोगों को क्या बेसिक लाइफ स्पोर्ट की जानकारी भी नहीं है.

आईजीएमसी के पूर्व छात्र एवं डॉक्टर सनी सरीन ने सोशल मीडिया पर वीडियो शेयर करते हुए कहा हर्ष महाजन के बेहोश होते ही वीडियो में लोग जो कुछ करते नजर आए वो सब गलत था. उन्होंने कहा कि 'सबसे पहले इस स्थिति में भीड़ जमा नहीं करनी है. मरीज को तुरंत वहां जमीन पर लेटा दें. मौके पर कोई डॉक्टर, नर्स या मेडिकल प्रोफेशनल मौजूद न हो तो आप ये देखें की मरीज सांस ले रहा है या नहीं. छाती, मुंह और नाक के पास कान या हाथ लगाकर आप चेक कर सकते हैं कि मरीज को सांस आ रही है या नहीं. मरीज अगर सांस ले रहा है तो उसे सीधा लेटा दें, और उनकी टांगों को ऊपर उठा दें. ये स्थिति हार्ट अटैक वाली नहीं होती है, क्योंकि मरीज सांस ले रहा है. दरअसल मरीज के ब्रेन (दिमाग) में ब्लड सप्लाई कम होने के कारण एकदम मरीज अचेत या बेसुध हो जाता है. धूप में खड़े रहने, शुगर लेवल कम होने, किसी दवाई के सेवन से भी ब्रेन में ब्लड की सप्लाई कम हो सकती है. अचेत हालत में मरीज के सांस लेने का मतलब है ब्लड सप्लाई का ब्रेन तक सही से न पहुंचना. इस स्थिति में बस मरीज की नीचे जमीन पर लेटा कर उसकी टाई, तंग कपड़ों को ढीला कर दें और बस टांगों को ऊपर उठा दें.'

डॉक्टर ने बताई लोगों की गलती

डॉ. सरीन ने सोशल मीडिया पर वायरल हुए हर्ष महाजन के वीडियो का हवाला देते हुए कहा कि जैसे ही हर्ष महाजन अचेत हुए लोगों ने खड़े-खड़े ही उनकी छाती को दबाना शुरू कर दिया. ये लोगों की पहली गलती थी. दूसरी गलती लोग उन्हें उठाकर भाग रहे हैं. अगर मरीज को कार्डियक अरेस्ट भी आया था तो लेटा कर उनकी छाती को दबाना चाहिए था, लेकिन लोग मरीज को उठाकर भाग रहे हैं और खड़े खड़े ही छाती दबा रहे हैं. डॉक्टर सरीन ने सुझाव देते हुए बताया कि ऐसी स्थिति अगर दोबारा आपके सामने आए तो मरीज को पहले लेटा दें, चारों तरफ भीड़ जमा न करें. आसपास कोई डॉक्टर है तो उसकी मदद लें, यदि सांस चल रही है तो पांव ऊपर कर दें और कपड़ों को ढीला कर दें. इसके अलावा कुछ न करें. इस तरह की स्थितियों में मरीज कुछ समय में अपने आप सामान्य हो जाता है.

मरीज के सांस न ले पाने पर क्या करें

अगर मरीज सांस नहीं ले पा रहा है तो इस स्थिति में क्या करना चाहिए? इसे लेकर डॉक्टर सरीन ने बताया कि सबसे पहले देखें कि मरीज के मुंह, गले में कुछ फंसा तो नहीं है. अगर ऐसा नहीं है और मरीज सांस नहीं ले पा रहा है तो तुरंत मरीज को लेटा कर उसकी छाती को दबाकर सीपीआर दें और साथ में एंबुलेंस का कॉल करें.

डॉ. सरीन ने बेहेशी और हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट में अंतर बताया कि कार्डियक अरेस्ट की स्थिति में मरीज के पास दो से तीन मिनट का ही समय होता है, तीन मिनट के अंदर अगर हार्ट ने दोबारा धड़कना शुरू नहीं किया तो ये स्थिति बहुत गंभीर हो सकती है, लेकिन लोग वीडियो में हार्ट अटैक समझकर मरीज को उठाकर भाग रहे हैं. तीन मिनट में कोई भी अस्पताल नहीं पहुंच सकता है. तीन मिनट के अंदर दिल ने धड़कना शुरू नहीं किया तो बहुत देर हो सकती है, इसलिए जरूरी है कि मरीज को उठाकर भागने की जगह उसे वहीं पर लेटाकर सीपीआर दें. दूसरा हार्ट अटैक की स्थिति में मरीज इस तरह से बेहोश नहीं होता. मरीज की छाती में दर्द उठता है. ये सबसे बड़ा अंतर बेहोश होने की स्थिति और हार्ट अटैक में है. इस स्थिति में मरीज को सीपीआर दें.

सीपीआर प्रशिक्षण देने पर जोर

इसके अलावा डॉक्टर प्रकाश चंद नेगी ने सोशल मीडिया पर लिखा 'हर्ष महाजन का अचानक अस्वस्थ होकर गिरना कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन (CPR) और बेसिक लाइफ सपोर्ट के प्रति जागरूकता की तत्काल आवश्यकता को बताता है. हालांकि उनका ठीक होना आश्वस्त करने वाला है, लेकिन जनता की प्रतिक्रिया ने आपातकालीन तैयारियों की कमी को उजागर कर दिया. जीवन बचाने के लिए छात्रों, सरकारी कर्मचारियों, पुलिस, शिक्षकों, स्वयंसेवकों और आम नागरिकों के लिए वार्षिक रूप से सीपीआर प्रशिक्षण को सार्वजनिक स्वास्थ्य की प्राथमिकता बनाया जाना चाहिए.'

क्या बोले आईजीएमसी के पूर्व एमएस

वहीं, आईजीएमसी के पूर्व एमएस ने भी सोशल मीडिया पर लोगों से कार्डियक अरेस्ट और सीपीआर संबंधी जानकारी शेयर की है. उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखी अपनी पोस्ट शेयर करते हुए लिखा

आखिर ये कार्डियक अरेस्ट है क्‍या?

अचानक दिल का काम करना बंद हो जाना ये कोई लंबी बीमारी का हिस्‍सा नहीं है, इसलिए ये दिल से जुड़ी बीमारियों में सबसे खतरनाक माना जाता है. लोग अक्सर कार्डियक अरेस्ट को दिल का दौरा पड़ना समझते हैं मगर ये उससे अलग है. कार्डियक अरेस्ट तब होता है जब दिल शरीर के चारों ओर खून पंप करना बंद कर देता है. मेडिकल टर्म में कहें तो "हार्ट अटैक सर्कुलेटरी" समस्या है जबकि कार्डियक अरेस्ट , "इलेक्ट्रिक कंडक्शन" की गड़बड़ी की वजह से होता है. 'कार्डियक अरेस्ट' में दिल का ब्लड सर्कुलेशन पूरी तरह से बंद हो जाता है. दिल के अंदर वेंट्रीकुलर फिब्रिलेशन (अचानक ही अनियन्त्रित ह्रदय कंपन ) पैदा हो जाने से इसका असर दिल की धड़कन पर पड़ता है. इसलिए कार्डियक अरेस्ट में कुछ ही मिनटों में मौत हो सकती है.

क्‍या होते हैं लक्षण

डॉ रमेश चंद ने आगे फेसबुक पर लिखा कि कार्डियक अरेस्ट वैसे तो अचानक होता है. हालांकि जिन्हें दिल की बीमारी होती है उनमें कार्डियक अरेस्ट की आशंका ज्यादा होती है. कभी-कभी कार्डियक अरेस्ट से पहले छाती में दर्द, सांस लेने में परेशानी, पाल्पीटेशन, चक्कर आना, बेहोशी, थकान या उच्च रक्तचाप, ब्लैकआउट हो सकता है.

कैसे होता है इलाज ?

इसके इलाज के लिए मरीज को कार्डियोपल्मोनरी रेसस्टिसेशन (सीपीआर) दिया जाता है, जिससे उसकी दिल की धड़कन को रेगुलर किया जा सके. मरीज या घायल व्यक्ति की जान बचाने के लिए सीपीआर एक बहुत महवपूर्ण तरीका है. सीपीआर की फुल फॉर्म "कार्डियो पल्मोनरी रिससिटैशन" (Cardiopulmonary resuscitation) है. यानी रुकी हुये दिल की धड़कन, रुकी हुई सांसों को चला कर मरीज को मौत के मुंह से वापिस लाना. इससे कार्डियक अरेस्ट और सांस न ले पाने जैसी आपातकालीन स्थिति में व्यक्ति की जान बचाई जा सकती है.

कब पड़ती है सीपीआर की जरूत

हार्ट अटैक, कार्डियक अरेस्ट, डूबना, सांस घुटना और करंट लगना जैसी स्थितियों में सीपीआर की आवश्यकता हो सकती है. अगर व्यक्ति की सांस या धड़कन रुक गई है, तो जल्द से जल्द उसे सीपीआर दें, क्योंकि पर्याप्त ऑक्सीजन के बिना शरीर की कोशिकाएं बहुत जल्द खत्म होने लगती हैं. मस्तिष्क की कोशिकाएं कुछ ही मिनटों में खत्म होने लगती हैं, जिससे गंभीर नुकसान या मौत भी हो सकती है. अगर आप को सीपीआर देना आ जाए तो कई जानें बचाई जा सकती हैं, क्योंकि सही समय पर सीपीआर देने से व्यक्ति के बचने की सम्भावना दोगुनी हो सकती है.

डॉ. रमेश ने बताया कि 'व्यक्ति के अचानक गिर जाने पर या बेहोश होने पर सांस और नब्ज़ देखें. सांस का रास्ता खुला है या नहीं,चेक करें मुंह में या गले में कुछ फंसा तो नहीं है, जैसे खून, खाना, उल्टी, मिट्टी, दांत पानी थूक, कपड़ा आदि. नाड़ी चेक करें चल रही है या नहीं. इसी से पता चल जाएगा दिल धड़क रहा है या रुक गया है. बेहोश मरीज़ को कोई खाने की वस्तु या पीने को उसके मुंह में डालने की कोशिश भी न करें, उसकी सांस की नली में जा सकता है, समस्या और गम्भीर हो सकती है. पानी के छींटे मुंह पर मार सकते हैं. अगर व्यक्ति की नब्ज़ नहीं मिल रही है, तो हो सकता है उसके दिल ने काम करना बंद कर दिया हो। ऐसे में व्यक्ति को सीपीआर देने की आवश्यकता हो सकती है. इसके अलावा करंट लगने, डूबने, ड्रग्स, धुंए के संपर्क में आना- इन स्थितियों में व्यक्ति की नब्ज व सांस की जांच करें. उसे सीपीआर की आवश्यकता हो सकती है.'

सीपीआर कैसे देते हैं

सीपीआर में व्यक्ति की छाती को दबाना और उसे मुंह से सांस देना शामिल होते हैं. बच्चों और बड़ों को सीपीआर देने का तरीका थोड़ा अलग होता है.

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Last Updated : June 29, 2026 at 7:09 PM IST