कोर्ट की खबरें: मिलावटी दूध मामले की सुनवाई 16 सितंबर को, दक्षता परीक्षा केस में वीडियोग्राफी पेश
मिलावटी दूध को लेकर आरसीडीएफ ने हाईकोर्ट को कहा कि 400 लाख लीटर दूध असंगठित क्षेत्र के जरिए वितरित होता है.


Published : August 25, 2026 at 8:42 PM IST
जयपुर: राजस्थान हाईकोर्ट में दूध और अन्य खाद्य पदार्थों में मिलावट के मामले में चल रही सुनवाई के दौरान आरसीडीएफ की ओर से हाईकोर्ट में जवाब पेश किया गया. एक्टिंग सीजे एसपी शर्मा और जस्टिस प्रमिल माथुर की खंडपीठ ने जवाब को रिकॉर्ड पर लेते हुए मामले की सुनवाई 16 सितंबर को रखी है. अदालत ने यह आदेश प्रकरण में लिए गए स्वप्रेरित प्रसंज्ञान पर सुनवाई करते हुए दिए. वहीं, नाबालिग से दुष्कर्म मामले में अभियुक्त को पॉक्सो कोर्ट ने 20 साल की सजा सुनाई है.
आरसीडीएफ की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता माही यादव ने जवाब में बताया कि प्रदेश में करीब एक हजार लाख लीटर दूध प्रतिदिन उत्पादित होता है. इसमें से करीब पांच सौ लाख लीटर दूध घरेलू स्तर पर खपत होता है और शेष बाजार में आता है. इसमें से करीब चार सौ लाख लीटर दूध प्रतिदिन असंगठित क्षेत्र के जरिए वितरित होता है. इसमें स्थानीय विक्रेता और निजी डेयरियां शामिल हैं. इसके मुकाबले संगठित क्षेत्र करीब सौ लाख लीटर दूध वितरित करता है. आरसीडीएफ स्वयं करीब 40 से 45 लाख लीटर दूध प्रतिदिन प्रोसेस करता है.
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फेडरेशन की ओर से बताया गया कि दूध की गुणवत्ता सुनिश्चित करने और मिलावट पकड़ने के लिए बहुस्तरीय जांच व्यवस्था है. दूध की जांच डेयरी सोसायटी, बल्क मिल्क कूलर, जिला प्रयोगशाला, उत्पाद स्तर और केन्द्रीय गुणवत्ता प्रयोगशाला में की जाती है. इसके साथ ही जिला प्रयोगशाला में एफटीआईआर आधारित तकनीक काम में ली जाती है. जिसमें पानी, यूरिया, डिटर्जेंट, स्टार्च और नमक सहित 22 तरह की मिलावट का पता लगाया जाता है. जयपुर की केन्द्रीय गुणवत्ता प्रयोगशाला में मेलामाइन, एंटीबायोटिक व कीटनाशक अवशेष सहित भारी धातुओं की भी जांच की जाती है.
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फेडरेशन ने कहा कि वह संगठित डेयरी क्षेत्र में काम करता है और पूरे प्रदेश के दूध बाजार पर उसका नियंत्रण नहीं है. ऐसे में मिलावट की व्यापक समस्या को देखते समय असंगठित क्षेत्र की भूमिका को भी ध्यान में रखना होगा. सुनवाई के दौरान महाधिवक्ता ने पशुपालन विभाग की ओर से जवाब पेश करने के समय मांगा. इस पर अदालत ने मामले की सुनवाई 16 सितंबर को तय की है.
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'अभ्यावेदन जांच में सही हो, तो याचिकाकर्ताओं की वापस लें दक्षता परीक्षा': राजस्थान हाईकोर्ट में एसआई, प्लाटून कमांडर संयुक्त प्रतियोगी परीक्षा-2025 में शारीरिक दक्षता परीक्षा के दौरान कई जगह बारिश से मैदान व ट्रैक खराब होने से जुड़े मामले में अदालती आदेश के पालन में जयपुर, भरतपुर व अजमेर सहित अन्य जगहों की वीडियोग्राफी पेश की गई. अदालत ने वीडियोग्राफी देखने के बाद अभ्यर्थियों से कहा है कि वे 7 दिन में इस संबंध में अपना अभ्यावेदन दें. वहीं राज्य सरकार व एडीजी भर्ती व पदोन्नति बोर्ड को कहा है कि यदि जांच में उनका अभ्यावेदन सही पाया जाए तो आगामी 9 व 10 सितंबर को उनकी शारीरिक दक्षता परीक्षा वापस ली जाए. जस्टिस समीर जैन ने यह आदेश सीमा गुर्जर, योगिता व अन्य की याचिकाओं पर संयुक्त सुनवाई करते हुए दिए.
याचिका में अधिवक्ता रामप्रताप सैनी व प्रेमचंद देवंदा ने बताया कि याचिकाकर्ताओं का शारीरिक दक्षता टेस्ट, सीआरपीएफ सेंटर अजमेर व जयपुर सहित अन्य जगहों पर हुआ था. टेस्ट के दौरान लगातार बारिश के कारण मैदान व रनिंग ट्रैक खराब हो गए थे. वहां पर पानी भरने से फिसलन बढ़ गई थी. इसके चले दौड़ और कूद के दौरान अभ्यर्थी को परेशानी हुई और चोट भी लगी. याचिकाकर्ताओं ने भर्ती एजेंसी को इस संबंध में अपना प्रतिवेदन भी दिया, लेकिन उसका निस्तारण नहीं किया गया. इसलिए उन्हें शारीरिक दक्षता परीक्षा में एक और मौका दिया जाए. जिस पर अदालत ने भर्ती एजेंसी को इन जगहों की वीडियोग्राफी पेश करने के लिए कहा था.
दुष्कर्मी को 20 साल की सजा: पॉक्सो मामलों की विशेष अदालत ने क्रम-1 ने नाबालिग को डरा धमकाकर उसके साथ दुष्कर्म करने वाले अभियुक्त धर्मेन्द्र कुमार उर्फ धर्मा को 20 साल की सजा सुनाई है. इसके साथ ही अदालत ने अभियुक्त पर दो लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया है. पीठासीन अधिकारी विकास कुमार ने अपने आदेश में कहा कि अभियुक्त के कृत्य से न केवल शारीरिक रूप से बल्कि पीड़िता मानसिक रूप से भी दर्दनाक स्थिति में पहुंची है. ऐसे में अभियुक्त के प्रति नरमी का रुख नहीं अपनाया जा सकता.
अभियोजन पक्ष की ओर से विशेष लोक अभियोजक मातादीन शर्मा ने अदालत को बताया कि पीड़िता के पिता ने 25 जून, 2022 को थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी. जिसमें कहा गया कि बीते करीब छह माह से अभियुक्त उसके घर दूध लेने आ रहा था. इस दौरान अभियुक्त ने उसकी नाबालिग बेटी के नहाते समय के अश्लील वीडियो बना लिए. जिन्हें वायरल करने का कहकर अभियुक्त ने उसके साथ कई बार दुष्कर्म किया. रिपोर्ट पर कार्रवाई करते हुए पुलिस ने अभियुक्त को 21 अगस्त को गिरफ्तार कर अदालत में आरोप पत्र पेश किया. वहीं अभियुक्त की ओर से कहा गया कि पीड़ित पक्ष ने उससे करीब तीन लाख रुपए उधार लिए थे. जब उसने रुपए मांगे तो पीड़िता के पिता ने अपनी बेटी को ढाल बनाकर उसके खिलाफ झूठी रिपोर्ट दर्ज करा दी. दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद अदालत ने अभियुक्त को सजा और जुर्माने से दंडित किया है.

