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शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद गिरफ्तार होंगे या मिलेगी राहत? अग्रिम जमानत पर इलाहाबाद हाईकोर्ट में सुनवाई

नाबालिग बटुकों से कथित यौन उत्पीड़न का आरोप, मेडिकल रिपोर्ट और सीडी बनी सुनवाई का अहम आधार.

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद.
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद. (Photo Credit; ETV Bharat)
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By ETV Bharat Uttar Pradesh Team

Published : February 26, 2026 at 5:54 PM IST

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प्रयागराज: इलाहाबाद हाईकोर्ट में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की अग्रिम जमानत याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई होनी है. नाबालिग बटुकों से कथित यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से जुड़े इस मामले में हाईकोर्ट की सुनवाई को बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि इसी से यह तय होगा कि जांच के दौरान शंकराचार्य को गिरफ्तारी से राहत मिलेगी या नहीं.

प्रयागराज के झूंसी थाने में दर्ज एफआईआर के बाद स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने खुद को साजिश का शिकार बताते हुए हाईकोर्ट का रुख किया है. याचिका में उन्होंने आरोप लगाया है कि उनके खिलाफ झूठे और मनगढ़ंत आरोप लगाए गए हैं और सोशल मीडिया व सार्वजनिक मंचों पर उनकी छवि खराब करने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है.

अग्रिम जमानत याचिका में शंकराचार्य पक्ष की ओर से कहा गया है कि आरोप लगाने वाले व्यक्ति का आपराधिक इतिहास रहा है. वह खुद हिस्ट्रीशीटर है. बच्चों के बयान कथित तौर पर प्रभावित कराए गए हैं. दोनों बटुक उनके कभी शिष्य नहीं रहे और न ही उनके गुरुकुल में रहे हैं. इसके अलावा डिजिटल साक्ष्य (सीडी) की अभी तक फॉरेंसिक जांच नहीं हुई है. ऐसे में गिरफ्तारी से पहले निष्पक्ष जांच का अवसर दिया जाना चाहिए. शंकराचार्य के वकीलों का यह भी तर्क है कि जब तक साक्ष्यों की पुष्टि नहीं हो जाती, तब तक गिरफ्तारी संविधान प्रदत्त अधिकारों का उल्लंघन होगी.

हाईकोर्ट किन बिंदुओं पर करेगा विचार: इलाहाबाद हाईकोर्ट के एडवोकेट श्रवण कुमार त्रिपाठी ने बताया कि इलाहाबाद हाईकोर्ट इस सुनवाई में मुख्य रूप से चार बिंदुओं पर विचार कर सकता है. आरोपों की प्रकृति और गंभीरता, मेडिकल रिपोर्ट और पीड़ितों के बयान, सीडी समेत डिजिटल साक्ष्यों की स्थिति और फॉरेंसिक जांच रिपोर्ट क्या कहती है? साथ ही आरोपी का सामाजिक प्रभाव और जांच को प्रभावित करने की आशंका.

हाईकोर्ट के फैसले से न सिर्फ शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद की कानूनी स्थिति तय होगी, बल्कि पूरे मामले की जांच की दिशा भी तय होगी. यदि अग्रिम जमानत खारिज होती है, तो पुलिस आगे की सख्त कार्रवाई कर सकती है. यानी गिरफ्तारी तय है. वहीं राहत मिलने की स्थिति में शंकराचार्य को जांच में सहयोग करने की शर्तों के साथ सुरक्षा मिल सकती है. फिलहाल, पूरे मामले पर प्रदेश और देशभर की नजरें टिकी हुई हैं. हाईकोर्ट का आदेश आने के बाद यह स्पष्ट हो जाएगा कि इस हाई-प्रोफाइल पॉक्सो केस में आगे की कानूनी राह किस दिशा में जाएगी.

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