आद्रभूमि और अभ्यारण्यों के आसपास अतिक्रमण को लेकर HC सख्त, सरकार को दिया 3 महीने का समय
पटना उच्च न्यायालय ने गुरुवार को महत्वपूर्ण फैसला सुनाया. अतिक्रमण हटाने को लेकर सरकार को तीन महीने का वक्त दिया है. पढ़ें खबर

Published : February 12, 2026 at 9:04 PM IST
पटना : पटना हाईकोर्ट राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में आद्रभूमि और अभ्यारण्यों के आसपास हुए अतिक्रमणों को काफी गंभीरता से लिया है. चीफ जस्टिस संगम कुमार साहू की खंडपीठ ने वेटरन फोरम फॉर ट्रांसपेरेंसी इन पब्लिक लाइफ की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार द्वारा को इन भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने का निर्देश दिया. इसके लिए कोर्ट ने राज्य सरकार को तीन महीने की मोहलत दी है.
HC ने मांगा ब्यौरा : चूंकि राज्य सरकार ने इन अवैध अतिक्रमणों को हटाने का निर्णय किया है, इसलिए कोर्ट ने राज्य सरकार को अगली सुनवाई में कार्रवाई रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है. इसमें अतिक्रमण हटाने, चारदिवारी निर्माण व बंदोबस्ती के संबंध में की गयी कार्रवाईयों का ब्यौरा तलब किया है. साथ ही इन जगहों पर अवैध निर्माण कार्य पर रोक लगा दी है.
क्या रखा गया पक्ष? : अधिवक्ता दीनू कुमार ने कोर्ट को बताया कि बेगूसराय और जमुई जिले में तीन आद्रभूमि हैं. इनमें बेगूसराय में कबरताल आद्रभूमि है. जबकि नेगी और नकटी बर्ड सैंक्चुअरी जमुई जिले में है. उन्होंने बताया कि 28 जून 1989 में बिहार सरकार ने एक अधिसूचना जारी करते बताया कि कंवर झील पक्षी अभ्यारण्य, जो जयमंगलगढ़, बेगूसराय जिले में है, का क्षेत्रफल 420.28 एकड़ है.
जयमंगलगढ़ क्षेत्र में 335 अविभाजित परिवार अतिक्रमण करके रह रहे हैं. कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि इन परिवारों के अस्थायी रहने की व्यवस्था करें, लेकिन इन क्षेत्रों को अतिक्रमण मुक्त कराये. उन्होंने बताया कि इसमें 15780 एकड़ भूमि में से मात्र 1564 एकड़ भूमि का बंदोबस्ती हुआ है. शेष लगभग चौदह हजार एकड़ भूमि का सरकार ने बंदोबस्ती नहीं की है. बाकी भूमि बेगूसराय जिला प्रशासन के अंतर्गत है.
जिला प्रशासन की मिलीभगत का आरोप : उन्होंने कोर्ट को बताया कि 2017 के प्रावधानों के अनुसार बिना अनुमति के किसी भी तरह का निर्माण कार्य नहीं होगा लेकिन सरकार भूमि का घेराबंदी ही अबतक नहीं किया है. पटना हाईकोर्ट ने 11 जुलाई, 2025 को जयमंगलगढ़, बेगूसराय में अवैध स्कूल, मंदिर, गेट, धर्मशाला, किसान भवन, पंचायत भवन, कम्युनिटी हॉल के अवैध निर्माण पर जवाब-तलब किया था. साथ ही इस वेटलैंड में इन निर्माणों में जिला प्रशासन की मिलीभगत का भी आरोप था.
पिछली सुनवाई में कोर्ट ने राज्य सरकार और मुख्य वन संरक्षक सह सदस्य, बिहार स्टेट वेटलैंड अथॉरिटी को अगली सुनवाई में स्थिति स्पष्ट करते हुए जवाब देने का निर्देश दिया था. साथ ही इन अवैध निर्माणों पर रोक लगा दिया था. इस मामले पर अगली सुनवाई 15 अप्रैल 2026 को होगी.
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