रामरेखा घाट नहर से अतिक्रमण हटाने पर हाईकोर्ट में सुनवाई, हलफनामा दायर करने का निर्देश
11 किलोमीटर रामरेखा घाट नहर से अतिक्रमण हटाने पर पटना हाईकोर्ट में अहम सुनवाई हुई. रिपोर्ट- आनंद वर्मा

Published : August 30, 2026 at 7:45 PM IST
पटना: मोतिहारी शहर के मोतीझील बुढ़ी गंडक नदी से निकले ब्रिटिश कालीन नहर को रामरेखा घाट सिमरा से जोड़ता है लेकिन उसके दोनों ओर अतिक्रमण होने लगा है. ऐसे में इस मामले पर पटना हाईकोर्ट में सुनवाई हुई. एक्टिंग चीफ सुधीर सिंह की खंडपीठ ने भारतीय न्यायप्रिय नागरिक परिषद की जनहित याचिका की सुनवाई की.
उच्च न्यायालय का निर्देश: अदालत ने पूर्वी चंपारण डीएम के 4 जून 2026 के पत्र के संदर्भ में हुई कार्रवाईयों पर हलफनामा दायर करने का निर्देश दिया है. मामले पर अगली सुनवाई 10 सितंबर 2026 को होगी.
अतिक्रमण चिंताजनक: याचिकाकर्ता के अधिवक्ता विकास कुमार पंकज ने कोर्ट को बताया था कि मोतिहारी शहर के मोतीझील को बुढ़ी गंडक नदी पर स्थित रामरेखा घाट सिमरा से जोड़ता है. इसकी लम्बाई लगभग 11 किलोमीटर है. मोतीझील को शहर की जीवनरेखा भी कहा जाता है. इससे मोतिहारी शहर को पेय जल मिलता है. साथ ही बाढ़ के समय ये नहर इस शहर को बाढ़ से बचाता है.
अधिवक्ता विकास पंकज ने बताया था कि 24 दिसंबर 2022 को कार्यपालक अभियंता (तिरहुत कैनाल डिवीजन मोतिहारी) ने इस संबंध में पूर्वी चंपारण के जिलाधिकारी को पत्र लिखा, जिसमें इस नहर को बाढ़ के समय अति उपयोगी और मोतीझील को रिचार्ज करने का वैकल्पिक श्रोत बताया गया था.
10 सितंबर अगली सुनवाई: पटना उच्च न्यायालय ने कोर्ट को बताया कि पूर्वी चंपारण जिलाधिकारी ने इसकी जांच के लिए एक कमिटी गठित की और जांच कर विस्तृत रिपोर्ट देने का निर्देश दिया था. अधिवक्ता विकास कुमार पंकज ने बताया कि 10 सितंबर को अगली सुनवाई होगी.
"काफी बैठकें हुईं, लेकिन अबतक कोई विस्तृत रिपोर्ट नहीं दिया गया. इससे मोतिहारी शहर के नागरिकों को काफी कष्ट और असुविधा हो रही है. इस मामले पर अगली सुनवाई 10 सितंबर 2026 को की जाएगी."- विकास कुमार पंकज, अधिवक्ता
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