बिहार में नीरा से तैयार हो रहा स्पेशल तिलकुट, सीएम नीतीश कुमार भी हैं इसके मुरीद
गया में नीरा से बने तिलकुट की मांग विदेशों तक हो रही है. यहां के तिलकुट का स्वाद खुद सीएम नीतीश भी ले चुके हैं.

Published : December 25, 2025 at 1:34 PM IST
रिपोर्ट: सरताज अहमद
गया: बिहार में मकर संक्रांति पर तिलकुट का काफी महत्व है और गया के खास तिलकुट के स्वाद से राज्य की एक अलग पहचान है. ऐसा ही एक तिलकुट है, जिसे विकसित हुए ज्यादा साल तो नहीं हुए हैं लेकिन इस की मांग हर रोज बढ़ रही है. असल में गयाजी की गलियां वर्षों से तिलकुट की सोंधी खुशबू से ठंड के मौसम में महकती रहती है, लेकिन यहां के खास तिलकुट के स्वाद की चर्चा सरकार से लेकर अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर हो रही है.
ताड़ी 'नीरा' से बनता है ये खास तिलकुट: अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन स्थल बोधगया महाबोधी मंदिर के मुख्य द्वार वाले रास्ते पर एक स्टॉल है, जहां पर देश-विदेश के पर्यटकों की भीड़ होती है, वहां इन दिनों नीरा से बना हुआ तिलकुट खूब बिक रहा है. इसके स्वाद को चखने के बाद हर व्यक्ति इसे लाजवाब बताता है. वहीं इसकी डिमांड इतनी बढ़ी है कि इस साल 2025 में डब्ल्यू कुमार ने एक लाख लीटर ताड़ी के नीरा से तिलकुट बनाया है, अब उनके पास डिमांड पूरी करने के लिए अतिरिक्त व्यवस्था नहीं है.
डब्ल्यू कुमार ने किया था विकसित: बोधगया के इलरा गांव के डब्ल्यू कुमार को नीरा से तिलकुट बनाने में महारत हासिल है. साल 2023 में डब्ल्यू कुमार ने पहली बार नीरा का तिलकुट बनाया था, जिसके स्वाद को चखने और उसे बनाने की प्रक्रिया देखने के लिए खुद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार गयाजी आए थे. डब्लू कुमार और उनके परिवार के साथ अन्य कारीगर अपने हाथों से इस खास तिलकुट को बनाते हैं, नीरा इस तिलकुट को और खस्ता बना देता है और इसमें चीनी का मिश्रण नहीं किया जाता है.

क्या है इस तिलकुट को बनाने की प्रक्रिया: डब्ल्यू कुमार बताते हैं कि आम तिलकुट की तरह ही नीरा का भी तिलकुट बनाया जाता है, लेकिन इस में कुछ काम बढ़ जाता है. पहले नीरा से गुड़ तैयार किया जाता है, फिर उससे तिल में मिलाने के लिए पिघलाया जाता है. तिल मिलाकर लोइयां तैयार कर बड़ी सावधानी पूर्वक उसकी कुटाई की जाती है, इस में नीरा के गुड़ के साथ अलग से नीरा पानी भी डाला जाता है. जिसकी वजह से यह ज्यादा खस्ता हो जाता है.
क्यों खास है ये तिलकुट: इस तिलकुट की खासियत यह है कि ये ज्यादा मीठा नहीं होता है. स्वाद में आम तिलकुट की मिठास की तरह ही होता है, लेकिन इस को सभी खा सकते हैं. खासकर जिनको शुगर की बीमारी है उनके लिए ये बड़ा फायदेमंद होता है, डब्ल्यू कुमार कहते हैं कि इस को बनाने में आम तिलकुट से ज्यादा मेहनत लगती है.

स्वास्थ्य के लिए है फायदेमंद: डॉ. राजकुमार कहते हैं कि नीरा से बने तिलकुट में अगर चीनी और अलग से गुड़ का उपयोग नहीं किया जाता है तो यह सेहत के लिए नुकसानदायक नहीं होगा. अगर चीनी का प्रयोग नहीं हो तो एक तरह से यह शुगर फ्री तिलकुट होता है.
"नीरा सेहत के लिए फायदेमंद है और ठंड के मौसम में तिल खाने के भी बहुत फायदे है. ऐसे में नीरा से बना ये शुगर फ्री तिलकुट काफी हेलदी है."-डॉ. राजकुमार
प्रति दिन 150 केजी की बिक्री: बोधगया के इलरा गांव में इसे बड़े पैमाने पर बनाया जाता है, डब्ल्यू कुमार गांव के अलावा बोधगया, गयाजी शहर और पटना में काउंटर लगा कर बेच रहे हैं. तिलकुट निर्माता डब्ल्यू कुमार के अनुसार नीरा के तिलकुट की प्रतिदिन 150 केजी से ज्यादा की बिक्री है.

"इस साल मैंने एक लाख लीटर से ज्यादा नीरा से गुड़ बनाया था, उसी गुड़ से पेड़ा, लाई और चाय भी बना कर बेचते हैं. हालांकि इस साल मेरा 250 क्विंटल से अधिक तिलकुट बिकेगा."-डब्ल्यू कुमार, नीरा तिलकुट कारीगर
400 रुपए केजी बिकता है तिलकुट: नीरा का तिलकुट महंगा भी बिकता है, आम तिलकुट की कीमत 360 से लेकर 380 रुपये है. नीरा तिलकुट 400 से लेकर 410 रुपये प्रति किलो बिकता है, इसकी मांग कई जगहों से है. डब्ल्यू कुमार के अनुसार अभी पटना के गांधी मैदान में लगे सारस मेला में बिहार सरकार की ओर से स्टॉल लगवाया गया है, जहां पर प्रति दिन 70 से लेकर 100 केजी तक तिलकुट बिक रहे हैं, इसके अलावा उनके गांव, बोधगया और गयाजी शहर में तिलकुट बिक रहा है.

नीतीश कुमार से लेकर कई राष्ट्रों के अध्यक्ष ने चखा स्वाद: नीरा से तैयार हुए तिलकुट का स्वाद सबसे पहले बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 2023 में चखा था. तब नीतीश कुमार डब्ल्यू कुमार के गांव पहुंचे थे, उन्होंने ने खूब प्रशंसा की थी. नीतीश कुमार के आदेश पर ही जीविका द्वारा डब्लू कुमार को महाबोधि मंदिर के बाहर नीरा और उस से बने समानों को बेचने के लिए स्टॉल दिया गया था, इसके साथ ही बीटीएमसी के द्वारा नीरा की चाय तिलकुट और पेड़ा बोधगया महाबोधि मंदिर के दर्शन के लिए आने वाले कई देशों के राष्ट्रीय अध्यक्षों को परोसा जाता है, भेंट स्वरूप उन्हें तिलकुट भी दिया जाता है.
विदेशी नागरिकों को पसंद है तिलकुट: नीरा से बना तिलकुट बोधगया आने वाले विदेशी पर्यटकों को खूब पसंद आता है. डब्ल्यू कुमार के अनुसार सब से ज्यादा बिक्री ठंड के मौसम के अलावा पितृ पक्ष मेला की अवधि के साथ बोधगया में होने वाली विशेष पूजा के अवसर पर होता है. इस तिलकुट का मार्केट पूरे साल है लेकिन ठंड में डिमांड बढ़ जाती है. विदेशियों को इस तिलकुट का स्वाद खूब पसंद आता है. थाईलैंड, जापान, वियतनाम भूटान, श्रीलंका आदि देशों से आने वाले पर्यटक नीरा से बने तिलकुट को अपने साथ लेकर जाते हैं.

पर्यटकों को पसंद आ रही नीरा तिलकुट और चाय: एक पर्यटक देवी कार्यकिक ने बताया कि वो सिक्किम से अपने परिवार के साथ महात्मा बुद्ध के दर्शन के लिए आए हैं. नीरा और उससे बने तिलकुट और चाय का स्वाद उन्होंने चखा है. जो उन्हें बहुत अच्छा लगा. उन्होंने कहा कि उन्हें मालूम है कि बिहार सरकार ने मदिरा पर जब प्रतिबंध लगाया था तब से ही नीरा का उत्पादन हो रहा है.
"मैं यहां से 10 केजी से अधिक नीरा का तिलकुट लेकर जाऊंगा, इसका स्वाद पूरे परिवार को अच्छा लगा है. सरकार ने शराब बंदकर अच्छा किया है, पहले भी बोधगया आया था लेकिन तब नीरा से तिलकुट नहीं बन रहा था."-देवी कार्यकिक, पर्यटक
क्या है नीरा, जो शराब बंदी से जुड़ा है: राज्य में अप्रैल 2016 में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शराब और ताड़ी पर प्रतिबंध लगाया था, ताड़ी के व्यापार से जुड़े ग्रामीण बेरोजगार हो गए थे, तभी बिहार सरकार ने ताड़ी का तोड़ नीरा के रूप में निकाला था. बिहार सरकार ने नीरा के निर्माण के लिए 12 जिलों को एक खास योजना से जोड़ा था. 12 जिले में गयाजी भी शामिल था. नीरा की 2018 से बिक्री शुरू हुई थी, तब से नीरा की बिक्री लगातार हो रही है.

ताड़ी में नशा, नीरा में स्वाद: असल में ताड़ी से नीरा बनाने के लिए किसी मशीन की प्रक्रिया नहीं होती है, सिर्फ इसे पेड़ से उतारने में कुछ खास चीजों का ख्याल रखना होता है. ताड़ी खजूर या ताड़ के पेड़ से निकलती है. ताड़ी उतारने के लिए मिट्टी के बरतन 'लबनि' में बिना साफ सफाई के निकाला जाता है. ताड़ी के लिए जब लबनि पेड़ में टांगी जाती है तो उसे दिन में उतारा जाता है. जिसपर धूप पड़ने और सफाई नहीं होने से उस में नशा हो जाता है.

क्या कहते हैं एक्सपर्ट: जानकार कहते हैं कि अगर सूर्योदय के बाद यदि ताड़ खजूर का रस छेवक द्वारा पेड़ से उतारा जाता है तो उसमें अल्कोहल की मात्रा आ जाती है. नीरा भी पेड़ से सीधे रस के रूप में ही निकलता है लेकिन उसे निकालने के लिए अलग प्रक्रिया होती है.
सूर्योदय से पहले उतारने से बनता है नीरा: नीरा के लिए पहले लबनि को छेवक के द्वारा अच्छे से साफ किया जाता है, फिर उस में चुना का लेप लगाया जाता है, सूर्यास्त के बाद पेड़ पर छेवक के द्वारा लबनि टांगी जाती है और सूर्योदय से पहले यानी सुबह में उतार लिया जाता है, फिर उसे अच्छे से छान कर कूलिंग मशीन में रख दिया जाता है, अगर कूलिंग मशीन में नहीं रखा तो उस को 20 मिनट तक उबाला जाता है और फिर उसे ठंडा कर पैक कर बेचा जाता है.

8 लीटर में एक केजी गुड़: नीरा बनाने के लिए 100 से अधिक लोग जुड़े हुए हैं, एक लीटर नीरा 50 रुपये में बिकता है, जबकि डब्ल्यू कुमार ताड़ी छेवको द्वारा 30 रुपये से 35 रुपये प्रति केजी खरीदते हैं. 8 लीटर में एक केजी गुड़ बन कर तैयार होता है, डब्ल्यू कुमार के साथ नीरा का तिलकुट और अन्य समान बनाने के लिए 15 लोग जुड़े हुए हैं. जिनके लिए ये एक बड़ा रोजगार है. डब्ल्यू के अनुसार ठंड के मौसम में प्रति दिन 60 हजार से 1 लाख रुपये की बिक्री होती है. वहीं नीरा का मौसम बरसात को छोड़ कर सालों भर होता है.
ये भी पढ़ें-
तिलकुट में मिलावट तो नहीं? मकर संक्रांति को लेकर दुकानों में छापा

