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परिवाद रफा-दफा करने की एवज में ली 40 हजार की घूस, अमरसर थाने का हेड कांस्टेबल और दलाल गिरफ्तार

भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की टीम ने जयपुर ग्रामीण जिले में आरोपियों को रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़ा.

Accused Head Constable and tout in ACB's net
एसीबी के शिकंजे में आरोपी हेड कांस्टेबल और दलाल (Photo Source: ACB Headquarters, Jaipur)
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By ETV Bharat Rajasthan Team

Published : September 1, 2026 at 5:52 PM IST

3 Min Read
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जयपुर: भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) की टीम ने मंगलवार को जयपुर ग्रामीण जिले में अमरसर थाने के हेड कांस्टेबल और एक दलाल को रिश्वत लेते गिरफ्तार किया. हेड कांस्टेबल ने परिवाद को रफा-दफा करने के बदले परिवादी से 40 हजार रुपए की रिश्वत दलाल के मार्फत ली. एसीबी मुख्यालय के निर्देश पर जयपुर नगर-प्रथम इकाई ने ट्रैप की कार्रवाई को अंजाम दिया. टीम ने शराब की दुकान पर काम करने वाले सेल्समैन (दलाल) राकेश कुमार मीणा और अमरसर थाने के हेड कांस्टेबल रतन लाल आर्य को 40 हजार रुपए की रिश्वत लेते गिरफ्तार किया है.

पहले मांगे 50 हजार रुपए: भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो के डीजी गोविंद गुप्ता ने बताया कि एसीबी की जयपुर नगर-प्रथम इकाई को एक लिखित शिकायत मिली थी. परिवादी ने शिकायत में बताया कि उसके खिलाफ अमरसर थाने में दर्ज परिवाद को रफा-दफा करने और पक्ष में रिपोर्ट बनाने के बदले हेड कांस्टेबल रतनलाल आर्य 50 हजार रुपए की रिश्वत मांगकर परेशान कर रहा है. डीआईजी ओमप्रकाश मीणा के सुपरविजन में एएसपी भूपेंद्र के नेतृत्व में रिश्वत की मांग का सत्यापन कराया गया.

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हेड कांस्टेबल के लिए दलाल ने ली घूस: सत्यापन के दौरान आरोपी हेड कांस्टेबल के 50,000 रुपए की रिश्वत मांगने की पुष्टि हुई. बातचीत के दौरान 40 हजार रुपए देने पर सहमति बनी. एसीबी टीम ने आज ट्रैप की कार्रवाई को अंजाम दिया. आरोपी राकेश कुमार मीणा ने हेड कांस्टेबल रतनलाल आर्य के लिए परिवादी से 40,000 रुपए की रिश्वत ली. जिस पर उसे रंगे हाथ गिरफ्तार किया गया.

मुकदमा दर्ज कर होगा अनुसंधान: इसके बाद आरोपी रतन लाल आर्य को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई और गिरफ्तार किया गया. एडीजी स्मिता श्रीवास्तव और आईजी एस. परिमला के सुपरविजन में दोनों आरोपियों से पूछताछ और अग्रिम कार्रवाई जारी है. भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज कर अनुसंधान किया जाएगा.

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एसीबी से संपर्क कर दे सकते हैं स्पष्टीकरण: उन्होंने कहा, किसी व्यक्ति के विरुद्ध एसीबी में प्रकरण (अभियोग, प्राथमिक जांच, आदि) दर्ज होने पर सीधे एसीबी से संपर्क कर अपना पक्ष रखा और स्पष्टीकरण दिया जा सकता है. प्रस्तुत स्पष्टीकरण के विस्तृत विश्लेषण के बाद ही अनुसंधान में निर्णय लिया जाता है. यह जानकारी एसीबी के डर से धोखाधड़ी आदि के शिकार होने की संभावना के संदर्भ में महत्वपूर्ण है. भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो के टोल फ्री नंबर 1064 और वाट्सएप हेल्पलाइन नंबर 9413502834 पर आमजन भ्रष्टाचार और घूसखोरी से जुड़ी शिकायत दर्ज करवा सकते हैं.

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