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कोर्ट में बड़े मामले: 'बच्चा मां और जैविक पिता के साथ है, तो यह अवैध हिरासत नहीं, पुलिस से सहमति के बाद वकीलों ने रास्ता खोला

अदालत ने कहा कि पति मान रहा है कि वह उसका जैविक पिता नहीं है. प्रार्थना पत्र को अलवर कोर्ट ने खारिज कर दिया था.

Rajasthan High Court
राजस्थान हाईकोर्ट (ETV Bharat File Photo)
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By ETV Bharat Rajasthan Team

Published : February 25, 2026 at 10:08 PM IST

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जयपुर: राजस्थान हाईकोर्ट ने बच्चे की अवैध हिरासत से जुड़े मामले में दायर याचिका को खारिज कर दिया है. अदालत ने कहा कि अगर बच्चा अपनी मां और जैविक पिता के साथ है और याचिकाकर्ता स्वयं मान रहा है कि बच्चा उसका नहीं है, तो फिर यह अवैध हिरासत का मामला नहीं है. इसके साथ ही अदालत ने याचिकाकर्ता पर 50 हजार रुपए का हर्जाना भी लगाया है. जस्टिस महेन्द्र गोयल और जस्टिस समीर जैन की एकलपीठ ने यह आदेश अलवर निवासी व्यक्ति की याचिका को खारिज करते हुए दिए.

अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता पति ने स्वयं निचली अदालत में प्रार्थना पत्र पेश कर यह माना था कि उसकी पत्नी मई, 2024 से अपनी बहन और जीजा के साथ रह रही है. वहीं पति ने जीजा के साथ अवैध संबंध होने का आरोप लगाते हुए कहा था कि पत्नी ने अवैध संबंध को लेकर अपनी पहचान छिपाते हुए अस्पताल में बच्चे को जन्म दिया है. ऐसे में पति खुद मान रहा है कि वह उसका जैविक पिता नहीं है. इस प्रार्थना पत्र को अलवर की कोर्ट ने खारिज कर दिया था.

याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता प्रकाश ठाकुरिया ने बताया कि पुलिस ने अपनी पहली रिपोर्ट में महिला के किसी भी बच्चे को जन्म देने से इनकार किया है, लेकिन पड़ोसियों ने बच्चा पैदा होने की बात कही है. वहीं निचली अदालत की ओर से पुलिस को साक्ष्य पेश करने के निर्देश देने पर पुलिस ने दूसरी रिपोर्ट में माना की याचिकाकर्ता की पत्नी ने दूसरे नाम से अस्पताल में बच्चे को जन्म दिया है, लेकिन पत्नी कह रही है कि उसने किसी बच्चे को जन्म नहीं दिया. ऐसे में फिर अस्पताल रिकॉर्ड में पैदा हुआ बच्चा कहां गया. इसलिए आशंका है कि बच्चे की जिंदगी खतरे में है. ऐसे में राज्य सरकार के संरक्षक होने के चलते बच्चे को बरामद किया जाए. जिस पर सुनवाई करते हुए खंडपीठ ने याचिका को खारिज कर दिया.

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पुलिस से बनी सहमति के बाद वकीलों ने रास्ता खोला: जयपुर के निजी अस्पताल के संचालक के खिलाफ इलाज के दौरान लापरवाही करने को लेकर दर्ज एफआईआर में कार्रवाई की मांग के साथ गत 16 फरवरी से हाईकोर्ट के बाहर रास्ता रोककर बैठे वकीलों ने बुधवार शाम को पुलिस से समझौता होने के बाद अपना धरना समाप्त कर दिया. हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष राजीव सोगरवाल और डीसीपी दक्षिण राजर्षि राज की ओर से संयुक्त जानकारी दी गई कि दोनों पक्षों के बीच सात बिंदुओं पर सहमति बनी है. इसके तहत आरजीएचएस में अनियमिता के बारे में निविक अस्पताल से संबंधित जांच चिकित्सा विभाग की ओर से 20 दिन में पूरी कराने के संबंध में विभाग को पत्र लिखा जाएगा. वहीं जांच के बाद अपराध प्रमाणित होता है तो विभाग एफआईआर दर्ज कराएगा.

Advocates present during the discussion
वार्ता के दौरान मौजूद अधिवक्ता (ETV Bharat Jaipur)

वहीं इलाज में लापरवाही को लेकर मानसरोवर थाने में दर्ज एफआईआर को लेकर परिवादी की इच्छा पर मेडिकल कॉलेज को मेडिकल बोर्ड गठित करने के लिए लिखा जाएगा. जांच एवं कार्रवाई पूरी होने तक अस्पताल को अस्थाई रूप से पैनल से बाहर करने के लिए आरजीएचएस को लिखा जाएगा. वहीं हाईकोर्ट में लंबित याचिका में तथ्यात्मक रिपोर्ट पेश की जाएगी. वकीलों का समझौता हुआ है कि मामले की निष्पक्ष जांच के लिए डीसीपी दक्षिण की अध्यक्षता में एसआईटी गठित की जाएगी और जांच एक माह में पूरी की जाएगी. वहीं केस की प्रगति के बारे में परिवादी को बताया जाएगा. इसके साथ ही प्रत्येक जांच में परिवादी शामिल रहेगा और हर 7 दिन में बार एसोसिएशन को प्रगति के बारे में बताया जाएगा. वहीं समस्त दस्तावेजों व सीसीटीवी फुटेज की जांच एफएसएल से एक माह में कराई जाएगी.

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आयकर अपीलीय अधिकरण रिश्वत प्रकरण में आरोपियों को जमानत नहीं: राजस्थान हाईकोर्ट ने आयकर अपीलीय अधिकरण में रिश्वत से जुड़े मामले में आरोपी सीता लक्ष्मी, मुजम्मिल, राजेन्द्र सिसोदिया, विजय गोयल और कैलाश चन्द्र मीणा को जमानत पर रिहा करने से इनकार कर दिया है. इसके साथ ही अदालत ने इन सभी आरोपियों की जमानत याचिकाओं को खारिज कर दिया है. जस्टिस चंद्र प्रकाश श्रीमाली की एकलपीठ ने यह यह आदेश दिए. अदालत ने सभी पक्षों की बहस सुनने के बाद गत 4 फरवरी को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था.

आरोपी सीता लक्ष्मी की ओर से कहा गया कि वह अधिकरण में न्यायिक अधिकारी थी. ऐसे में जजेज प्रोटेक्शन एक्ट के तहत उस पर कार्रवाई नहीं की जा सकती. वहीं अन्य आरोपी की ओर से कहा गया कि प्रकरण में न तो उन्होंने रिश्वत राशि की मांग की है और ना ही उनके कोई बरामदगी हुई है. इसके अलावा प्रकरण में आरोप पत्र पेश हो चुका है. जिसकी सुनवाई लंबे समय तक चलेगी. ऐसे में उन्हें जमानत का लाभ दिया जाए.

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इसका विरोध करते हुए सीबीआई की ओर से अधिवक्ता प्रदीप कुमार ने कहा कि आरोपी पर रुपए लेकर फैसले देने का आरोप है. सीबीआई को गोपनीय सूचना मिली थी कि आईटीएटी जयपुर बेंच में लंबे समय से अपीलों को तय करने में धांधली चल रही है. जिस पर सीबीआई ने आईटीएटी की न्यायिक सदस्य सीता लक्ष्मी व वकील राजेन्द्र को गत 25 नवंबर को गिरफ्तार किया था. वहीं सीता लक्ष्मी की कार से 30 लाख रुपए और दलाल राजेन्द्र के घर से 80 लाख रुपए बरामद किए थे. इसके अलावा सीबीआई ने मामले में पक्षकार और रिश्वत देने वाले कोटा निवासी मुज्जमिल सहित अन्य को गिरफ्तार किया था.