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नाम में मामूली गड़बड़ी के कारण पेंशन के लिए 45 साल लगाने पड़े चक्कर, HC ने कानपुर नगर निगम फटकार लगाई

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नगर निगम कानपुर के अधिकारियों को फटकार लगाते हुए एक सप्ताह में मामले का निस्तारण करने का आदेश दिया है.

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इलाहाबाद हाईकोर्ट का आदेश. (Photo Credit: ETV Bharat)
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By ETV Bharat Uttar Pradesh Team

Published : February 24, 2026 at 8:54 PM IST

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प्रयागराज: नाम की स्पेलिंग में मामूली त्रुटि के कारण महिला को परिवारिक पेंशन पाने के लिए 45 साल तक दफ्तरों के चक्कर काटने पड़े. अंत में हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद महिला को राहत मिल सकी. कोर्ट ने नगर निगम कानपुर के अधिकारियों को फटकार लगाते हुए एक सप्ताह में मामले का निस्तारण करने का आदेश दिया है. मंजू राय की याचिका यह आदेश न्यायमूर्ति विक्रम डी चौहान ने दिया है. याची मंजू राय के पिता नगर निगम में कर्मचारी थे. वे वर्ष 1975 में सेवानिवृत्त हुए और 1980 में उनका निधन हो गया.

नाम की स्पेलिंग में गड़बड़ी: सेवाकाल और सेवानिवृत्ति के बाद उन्हें नियमित पेंशन मिलती रही, लेकिन उनकी मृत्यु के बाद जब परिवार ने फैमिली पेंशन के लिए आवेदन किया, तो विभाग ने फाइलों में अड़ंगा लगा दिया. विवाद का मुख्य कारण नाम की स्पेलिंग थी. विभागीय सर्विस रिकॉर्ड में उनका नाम शिखर नाथ शुक्ला दर्ज था, जबकि आवेदन पत्र और कुछ दस्तावेजों में शेखर नाथ शुक्ला लिखा गया था. अंग्रेजी में लिखे नाम से इससे आई और ई का अंतर आ गया. इसे आधार बनाकर विभाग ने पारिवारिक पेंशन देने से मना कर दिया.

मामला 45 साल तक लटका रहा: याची ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर फैमिली पेंशन की गुहार लगाई. याची के अधिवक्ता विनय शर्मा ने दलील दी कि याची के पिता के नाम के स्पेलिंग में एक अक्षर का अंतर है. इसके लिए शपथपत्र भी दिया है. कोर्ट ने पक्षों को सुनने के बाद प्रशासनिक रवैये पर गहरी नाराजगी जताई. कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता ने पहचान साबित करने के लिए हलफनामा, सक्सेशन सर्टिफिकेट और अन्य पुख्ता दस्तावेज पेश किए, जिनसे यह प्रमाणित हुआ कि दोनों नाम एक ही व्यक्ति के हैं.

हाईकोर्ट ने एक सप्ताह का समय दिया: न्यायालय ने आदेश दिया है कि एक सप्ताह के भीतर आदेश का पालन न किया गया, तो 26 फरवरी 2026 को होने वाली अगली सुनवाई को नगर आयुक्त को व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश होकर स्पष्टीकरण देना होगा.

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