हकृवि ने प्रगतिशील किसानों को किया सम्मानित, किसान रत्न बने आशीष मेहता, कुलपति बोले- "उन्नत तकनीक और नवाचार से सुरक्षित होगा कृषि भविष्य"
हकृवि किसान दिवस पर जलवायु परिवर्तन तकनीकों पर जोर दिया गया. साथ ही इस दौरान 42 किसानों का सम्मानित किआ गया.

Published : December 24, 2025 at 11:42 AM IST
हिसार: हिसार स्थित चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय (हकृवि) में किसान दिवस समारोह का भव्य आयोजन किया गया. इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बी.आर. काम्बोज बतौर मुख्य अतिथि उपस्थित रहे. समारोह में हरियाणा के विभिन्न जिलों से आए पचास से अधिक प्रगतिशील किसानों को कृषि क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए सम्मानित किया गया. कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के वरिष्ठ अधिकारी, वैज्ञानिक, कृषि विशेषज्ञ और बड़ी संख्या में किसान मौजूद रहे.
जलवायु परिवर्तन पर बोले कुलपति: इस दौरान कुलपति प्रो. बी.आर. काम्बोज ने अपने संबोधन में कहा कि, "जलवायु परिवर्तन आने वाले समय में कृषि के लिए बड़ी चुनौती बनने वाला है. अधिक तापमान, बाढ़, सूखा, चक्रवात और ग्लेशियरों के पिघलने जैसी समस्याएं खाद्यान्न उत्पादन को प्रभावित करेंगी. इन चुनौतियों से निपटने के लिए हकृवि लगातार उन्नत, टिकाऊ और जल-संरक्षण आधारित कृषि तकनीकों का विकास कर रहा है. विश्वविद्यालय कम पानी में उगने वाली, उच्च ताप सहनशील और अधिक उत्पादन देने वाली फसल किस्मों पर विशेष कार्य कर रहा है."
साल 1966 से अब तक आठ गुना बढ़ा खाद्यान्न उत्पादन: प्रो. काम्बोज ने आगे कहा कि, "देश की रक्षा हो या खाद्य सुरक्षा, हरियाणा प्रदेश हमेशा अग्रणी रहा है. वर्ष 1966-67 में राज्य गठन के समय हरियाणा का खाद्यान्न उत्पादन मात्र 25.92 लाख टन था, जो आज बढ़कर लगभग आठ गुना हो चुका है. गेहूं का उत्पादन छह गुना, चावल आठ गुना, कपास तीन गुना और तिलहनी फसलों का उत्पादन पांच गुना तक बढ़ा है. यह उपलब्धि किसानों की मेहनत, हरियाणा सरकार की किसान हितैषी नीतियों और हकृवि द्वारा विकसित कृषि तकनीकों के कारण संभव हुई है."
कम पानी, अधिक पैदावार पर हकृवि का फोकस: कुलपति ने कहा कि, "विश्वविद्यालय ने बाजरा की बायो-फोर्टिफाइड किस्में विकसित की हैं, जिनमें आयरन और जिंक की भरपूर मात्रा है. कम पानी में उगाई जाने वाली किस्मों को अपनाकर लाखों लीटर पानी की बचत की जा सकती है. जल संरक्षण के क्षेत्र में किए गए उत्कृष्ट अनुसंधान और किसानों द्वारा तकनीकों को अपनाने के कारण हकृवि को हाल ही में भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा राष्ट्रीय जल संरक्षण एवं प्रबंधन के लिए प्रथम पुरस्कार से सम्मानित किया गया."
किसान रत्न बने आशीष मेहता: समारोह में सिरसा जिले के गांव सुकेरा खेड़ा निवासी आशीष मेहता को हरियाणा के सर्वश्रेष्ठ किसान ‘किसान रत्न’ पुरस्कार से सम्मानित किया गया. उन्हें स्मृति चिन्ह, प्रमाणपत्र और 31 हजार रुपये की नकद राशि प्रदान की गई. आशीष मेहता एक प्रगतिशील, नवाचारी और तकनीक-समर्थ कृषक हैं, जिन्होंने आधुनिक तकनीकों को अपनाकर खेती को लाभकारी उद्यम में बदला है.
आशीष मेहता का नवाचार मॉडल: आशीष मेहता धान, गेहूं, कपास, गन्ना, दलहन-तिलहन, सब्जी और फल फसलों की विविध खेती के साथ जैविक कृषि को सफलतापूर्वक अपना रहे हैं. फसल अवशेष प्रबंधन के लिए हैप्पी सीडर का उपयोग कर उन्होंने पराली जलाने की समस्या का पर्यावरण-अनुकूल समाधान प्रस्तुत किया है. वे गुड एग्रीकल्चरल प्रैक्टिसेज, एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन और एकीकृत कीट प्रबंधन तकनीकों का नियमित प्रयोग करते हैं. प्रशिक्षित ड्रोन पायलट होने के कारण वे सटीक छिड़काव और फसल निगरानी कर लागत में कमी लाते हैं. मूल्य संवर्धन, जैविक गुड़ और सरसों तेल के प्रत्यक्ष विपणन से उन्होंने पारंपरिक खेती की तुलना में लगभग चार गुना अधिक लाभ अर्जित किया है.
प्रदेश के 42 किसानों का हुआ सम्मान: विस्तार शिक्षा निदेशक डॉ. बलवान सिंह मंडल ने बताया कि, "किसान दिवस समारोह में प्रदेश के प्रत्येक जिले से एक महिला और एक पुरुष प्रगतिशील किसान को उनके उल्लेखनीय कार्यों के लिए सम्मानित किया गया.हकृवि के अंतर्गत कार्यरत कृषि विज्ञान केंद्र विश्वविद्यालय द्वारा विकसित नवीनतम तकनीकों को किसानों तक पहुंचा रहे हैं, जिससे किसान सीधे लाभान्वित हो रहे हैं."
हकृवि की शैक्षणिक उपलब्धियां: डॉ. बलवान सिंह मंडल ने जानकारी दी कि भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के राष्ट्रीय कृषि शिक्षा प्रत्यायन बोर्ड से हकृवि को ए+ ग्रेड मिला है. वहीं, एनआईआरएफ 2024 रैंकिंग में विश्वविद्यालय ने राज्य कृषि विश्वविद्यालयों में पांचवां स्थान हासिल कर उल्लेखनीय उपलब्धि दर्ज की है.
बता दें कि समारोह में कुलसचिव, विभिन्न महाविद्यालयों के अधिष्ठाता, निदेशक, वैज्ञानिक, अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे। कृषि महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. एस.के. पाहुजा ने धन्यवाद प्रस्ताव रखा. कार्यक्रम में मौजूद किसानों ने विश्वविद्यालय के प्रयासों की सराहना करते हुए इसे प्रेरणादायक बताया.
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