हसदेव अरण्य पर घमासान: स्थगन खारिज होते ही विपक्ष का गर्भगृह में प्रवेश, कांग्रेस विधायक स्वतः निलंबित
छत्तीसगढ़ विधानसभा शीतकालीन सत्र का तीसरा दिन हंगामेदार रहा. जंगल जमीन मुद्दे पर विपक्ष ने घेरा.सत्ता पक्ष ने भी किया पलटवार.

By ETV Bharat Chhattisgarh Team
Published : December 16, 2025 at 4:17 PM IST
रायपुर: छत्तीसगढ़ विधानसभा शीतकालीन सत्र के तीसरे दिन हसदेव अरण्य क्षेत्र में कोयला खनन का मुद्दा गूंजा. विधानसभा की कार्यवाही उस वक्त हंगामेदार हो गई, जब विपक्ष द्वारा लाया गया स्थगन प्रस्ताव चर्चा के बिना अस्वीकार कर दिया गया. सरकार के जवाब से असंतुष्ट विपक्षी विधायकों ने नारेबाजी करते हुए गर्भगृह में प्रवेश किया, जिसके बाद गर्भगृह में जाने वाले कांग्रेस विधायक स्वतः निलंबित माने गए.
स्थगन पर चर्चा से इनकार, भड़का विपक्ष
विपक्ष ने हसदेव अरण्य और अन्य वन क्षेत्रों में खनन को लेकर स्थगन प्रस्ताव के माध्यम से चर्चा की मांग की. सरकार की ओर से जवाब दिए जाने के बाद आसंदी ने चर्चा की अनुमति नहीं दी. इसी निर्णय के विरोध में कांग्रेस विधायकों ने गर्भगृह में प्रवेश कर हंगामा किया.
भूपेश बघेल का सरकार पर हमला
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि विधानसभा में पहले अशासकीय संकल्प पारित हुआ था कि हसदेव अरण्य में कोई खदान नहीं खोली जाएगी, इसके बावजूद जंगलों की अंधाधुंध कटाई की जा रही है. उन्होंने आरोप लगाया कि सरगुजा से लेकर बस्तर तक वन क्षेत्र तेजी से नष्ट हो रहे हैं और मंत्री गंभीर सवालों के जवाब में बस्तर ओलंपिक जैसे विषयों की चर्चा कर रहे हैं.
बस्तर से लेकर सरगुजा और रायगढ़, कांकेर सभी जगह जंगल काटे जा रहे हैं. इस मुद्दे को लेकर स्थगन लाया गया.लेकिन मंत्री ने गलत बयान दिया. उन्होंने गलत जानकारी दी.मंत्री इतने हड़बड़ाए हुए थे कि उन्होंने पेड़ की संख्या भी 17.8 पेड़ लगाए गए, ये बात कही. मंत्री ने बस्तर ओलंपिक की बात कही. खेलकूद से जंगल कटाई का क्या संबंध हो सकता है-भूपेश बघेल
भूपेश बघेल ने कहा कि देश की राजधानी दिल्ली प्रदूषण से जूझ रही है, उड़ानें रद्द हो रही हैं, जबकि छत्तीसगढ़ जैसे हरित राज्य को भी प्रदूषण की ओर धकेला जा रहा है. सोलर ऊर्जा की संभावनाओं के बावजूद कोयला खनन को बढ़ावा देना राज्य के भविष्य के लिए खतरा है.
पूरे देश में प्रदूषण के कारण समस्या हो रही है. दिल्ली में फ्लाइट कैंसिल करना पड़ा. छत्तीसगढ़ समृद्धशाली है लेकिन यहां की स्थिति को बिगाड़ने की कोशिश की जा रही है-भूपेश बघेल
जंगल क्यों काटे जा रहे-भूपेश बघेल
भूपेश बघेल ने यह भी कहा कि आपको बिजली चाहिए तो आपके पास अल्टरनेटिव है, सोलर प्लांट है. सोलर की व्यवस्था है तो कोयला उत्खनन क्यों कर रहे हैं. छत्तीसगढ़ में कोई प्लांट तो लग नहीं रहा है फिर जंगल को क्यों काटा जा रहा है. हाथी मानव द्वंद्व अलग हो रहा है. ये बहुत बड़ी त्रासदी बन गया है कि हमारे पास खनिज है और यह हमारे लिए परेशानी का कारण बन गया है. लाभ दूसरे लोग उठा रहे हैं और छत्तीसगढ़ को सिर्फ नुकसान हो रहा है. हसदेव बांगो डैम पूरा भर जाएगा तो रायगढ़, चांपा, बिलासपुर और दूसरे जिलों में जो सिंचाई होती है वह प्रभावित होगी. यह पूरे छत्तीसगढ़ के लिए परेशानी का सबब होगा. इसके लिए हमने स्थगन प्रस्ताव लाया.
‘दो उद्योगपतियों के लिए सरकार काम कर रही’
भूपेश बघेल ने आरोप लगाया कि सरकार केवल दो बड़े उद्योगपतियों के हित में फैसले ले रही है. ग्राम सभाएं दूरस्थ गांवों में औपचारिकता निभाकर समाप्त की गईं. आदिवासी मुख्यमंत्री होने के बावजूद आदिवासी क्षेत्रों में खनन को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे खनिज संपदा की लूट हो रही है.
सरकार सिर्फ उद्योगपतियों के लिए काम कर रही है. यह बात स्पष्ट हो गई है. जहां खदान खुलनी है, उन गांवों में ग्राम सभा नहीं की जा रही है. दूसरे गांवों में ग्राम सभा हो रही है, वो भी 15 मिनट में खत्म हो रही है-भूपेश बघेल
वन मंत्री केदार कश्यप का पलटवार, कहा - सरकार वन और पर्यावरण के प्रति संवेदनशील
वन मंत्री केदार कश्यप ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि साय सरकार वन, वन्यजीव, आदिवासी और पर्यावरण संरक्षण के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है. बस्तर में नक्सलवाद पर निर्णायक प्रहार के साथ बस्तर ओलंपिक का आयोजन किया गया, जिसमें 3 लाख से अधिक प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया.
वन संरक्षण के आंकड़े गिनाए
वन मंत्री ने बताया कि गुरु घासीदास तमोर पिंगला देश का तीसरा सबसे बड़ा टाइगर रिजर्व बना. कोपरा जलाशय प्रदेश की पहली रामसर साइट घोषित हुआ, बेमेतरा के गिधवा-परसदा में पक्षी विहार की स्थापना, पिछले दो वर्षों में वन आवरण में 94.75 वर्ग किमी की वृद्धि, ‘ट्री आउटसाइड फॉरेस्ट’ क्षेत्र में 702 वर्ग किमी की बढ़ोतरी, देश में पहला स्थान है.
खनन पूरी तरह नियमों के तहत
वन मंत्री ने स्पष्ट किया कि पिछले दो वर्षों में केवल 5 खनन प्रकरणों में 1300.869 हेक्टेयर वन भूमि का नियमानुसार व्यपवर्तन किया गया है. इसके बदले 1780 हेक्टेयर में लगभग 17.8 लाख पौधों का रोपण किया जाएगा. सभी मामलों में FRA अनापत्ति, ग्रामसभा और केंद्र सरकार की स्वीकृति के बाद ही कार्यवाही की गई.
हसदेव अरण्य पर सुप्रीम कोर्ट और NGT के निर्देशों का पालन
कश्यप ने कहा कि ICFRE और WII की रिपोर्ट के अनुसार परसा ईस्ट-बासेन और परसा कोल ब्लॉक को “Can be considered” श्रेणी में रखा गया है. रिपोर्ट के किसी भी प्रावधान का उल्लंघन नहीं किया गया है और सरकार वन पर्यावरण के प्रति पूरी तरह जिम्मेदार है.
विपक्ष के आरोप निराधार
वन मंत्री ने यह भी खारिज किया कि बड़े पैमाने पर अवैध वृक्ष कटाई, फर्जी जनसुनवाई या ग्रामीणों पर बल प्रयोग हुआ है। सभी कार्यवाहियां नियमों और विभागीय अधिकारियों की मौजूदगी में की गई हैं. बहरहाल हसदेव अरण्य का मुद्दा विधानसभा में सरकार और विपक्ष के बीच एक बार फिर बड़े टकराव का कारण बना, जहां पर्यावरण संरक्षण और औद्योगिक विकास के बीच संतुलन को लेकर सियासी संग्राम साफ नजर आया.
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