HAS Result 2025: डिपो संचालक की बेटी ने रचा इतिहास, मेघा ने HPAS में किया टॉप
HAS परीक्षा 2025 का रिजल्ट घोषित हो चुका है. जिसमें सिरमौर की मेघा कंवर ने टॉप किया है.

By ETV Bharat Himachal Pradesh Team
Published : December 31, 2025 at 10:00 AM IST
|Updated : December 31, 2025 at 11:07 AM IST
सिरमौर: पहाड़ों की खामोशी में पले सपने जब मेहनत और जज्बे से जुड़ते हैं, तो वे इतिहास रच देते हैं. हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले की पझौता घाटी के छोटे से गांव सनौरा की बेटी मेघा सिंह कंवर ने ऐसा ही कुछ कर दिखाया है. हिमाचल प्रदेश प्रशासनिक सेवा परीक्षा 2025 में प्रदेश भर में टॉप रैंक हासिल कर मेघा ने न केवल अपने परिवार का, बल्कि पूरे सिरमौर जिले का नाम रोशन किया है. एक साधारण डिपो संचालक की बेटी की यह असाधारण सफलता आज प्रदेश के लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई है.
छोटे गांव से इस बेटी की बड़ी उड़ान
दरअसल राजगढ़ उपमंडल के सनौरा गांव से ताल्लुक रखने वाली मेघा की यह सफलता साबित करती है कि सीमित संसाधन कभी भी प्रतिभा की राह में बाधा नहीं बन सकते. पिता नरेंद्र सिंह कंवर, जो गांव में एक छोटा सा डिपो चलाते हैं, आज बेटी की कामयाबी पर भावुक हैं, जबकि मां अनीता कंवर भी बेटी पर गर्व महसूस कर रही है. परिवार में सेवा और अनुशासन का माहौल रहा है. मेघा के बड़े भाई कर्ण सिंह कंवर पुलिस विभाग में कार्यरत हैं, जिनसे उन्हें कर्तव्य और जिम्मेदारी की प्रेरणा मिली.
यहां से हासिल की शिक्षा
मेघा ने बताया कि प्रारंभिक शिक्षा उन्होंने गांव से प्राप्त की और वर्ष 2015 में जवाहर विद्यालय से जमा दो उत्तीर्ण की. इसके बाद उन्होंने डॉ. वाईएस परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी से बीएससी और एमएससी की पढ़ाई पूरी की. नौणी विश्वविद्यालय की गोल्ड मेडलिस्ट रही मेघा ने तीसरे प्रयास में एचपीएएस परीक्षा को क्रैक कर यह साबित किया कि असफलता सफलता की सीढ़ी बन सकती है.
12 घंटे की पढ़ाई और सटीक रणनीति
मेघा का कहना है कि सेल्फ स्टडी और निरंतर रिवीजन ही सफलता की असली कुंजी है. शुरुआत में वे रोजाना 6–7 घंटे पढ़ाई करती थी, जो परीक्षा के समय 12 घंटे तक पहुंच गई. सोशल मीडिया से पूरी तरह दूरी न बनाकर उन्होंने इसका सीमित और सकारात्मक उपयोग किया. पहले दो प्रयासों में सामान्य अध्ययन के बाद दूसरे पेपर में असफलता मिलनी. जिसके बाद उन्होंने अपनी कमजोरी को पहचाना और उसी पर विशेष ध्यान दिया, जो तीसरे प्रयास में उनकी सबसे बड़ी ताकत साबित हुई.
रिजल्ट का पल और मां को पहला फोन
परिणाम वाले दिन का अनुभव मेघा भावुक होकर याद करती हैं. उन्हें अंदेशा था कि शाम तक रिजल्ट आ सकता है, लेकिन करीब 6 बजे नींद आ गई. अचानक फोन की घंटियां बजीं और जब सूची में अपना नाम सबसे ऊपर देखा, तो सबसे पहला फोन मां को किया. मां की खुशी भरी आवाज ने उनके सालों के संघर्ष को सार्थक कर दिया.
हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा
मेघा सिंह कंवर की यह सफलता कहानी आज उन तमाम युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है, जो सीमित संसाधनों, बार-बार की असफलताओं और आत्म-संदेह के कारण अपने सपनों से समझौता करने लगते हैं. मेघा का स्पष्ट संदेश है, "सही रणनीति, निरंतर मेहनत और खुद पर विश्वास हो, तो कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं."

