हरियाणा में फिश इंडस्ट्री को मिलेगा बढ़ावा, केंद्र से की मछली बीज और मार्केटिंग के लिए मदद की मांग, सोनीपत और सिरसा में बड़े प्रोजेक्ट प्रस्तावित
हरियाणा मत्स्य पालन में पंजाब से पीछे है. ऐसे में केंद्र से मछली बीज और मार्केटिंग मदद की सरकार ने मांग की है.

Published : January 6, 2026 at 1:48 PM IST
पंचकूला: हरियाणा में मत्स्य उद्योग को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार ने केंद्र से मछली बीज और मार्केटिंग में मदद की मांग की है. इसके तहत सोनीपत और सिरसा में बड़े प्रोजेक्ट प्रस्तावित हैं, जिनमें आधुनिक मछली मार्केट और प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना शामिल है. इन पहलों का उद्देश्य राज्य के मत्स्य उत्पादन को बढ़ाना, किसानों को वैकल्पिक आजीविका उपलब्ध कराना और उच्च गुणवत्ता वाले मछली बीज की सुनिश्चित आपूर्ति करना है.
पंचकूला में एक्वेरियम हाउस बनाने की कल्पना: दरअसल, हरियाणा मत्स्य पालन में अभी अपने तय लक्ष्य को पूरा नहीं कर सका है. हालांकि, राज्य सरकार इस दिशा में केंद्र सरकार के समक्ष विभिन्न जिलों में मछली बाजार स्थापित करने और पंचकूला में विश्व स्तरीय एक्वेरियम हाउस बनाने की कल्पना भी कर रहा है. इनके लिए प्रस्तावित अनुमानित लागत 1300 करोड़ रुपये है. इसके अलावा सिरसा में झींगा प्रसंस्करण संयंत्र स्थापित करने का भी प्रस्ताव है, जिसमें लगभग 200 करोड़ रुपये का निवेश होगा. लेकिन फिलहाल यह प्रस्तावित कार्य हैं. मौजूदा वास्तविक स्थिति पर गौर करें तो हरियाणा मत्स्य पालन में अभी पंजाब से पीछे, दूसरे स्थान पर है.
अंतर्देशीय मत्स्य पालन की विकास दर: इस बीच कृषि एवं मत्स्य पालन मंत्री श्याम सिंह राणा ने हाल ही में हैदराबाद में आयोजित राष्ट्रीय स्तर के मत्स्य पालन सम्मेलन में राज्य में अंतर्देशीय मत्स्य पालन की विकास दर के बारे में जानकारी दी. मंत्री श्याम सिंह राणा ने कहा कि, "हरियाणा देश के प्रमुख भूमि-आबद्ध (लैंडलॉक्ड) मछली उत्पादक राज्यों में से एक बनकर उभरा है. राज्य ने 23,850 हेक्टेयर जल क्षेत्र से कुल 2.04 लाख मीट्रिक टन मछली का उत्पादन किया है. हरियाणा ने 166 करोड़ मछली बीज (फिश सीड्स) का उत्पादन किया, जो मत्स्य पालन संरचना और वैज्ञानिक प्रथाओं के मजबूत होने को दर्शाता है. भूमि-आबद्ध राज्यों में पंजाब मछली उत्पादन में पहले स्थान पर है और हरियाणा दूसरे स्थान पर है."

तटीय राज्यों से कम वित्तीय मदद: मत्स्य पालन मंत्री ने आगे कहा कि, "हरियाणा का भूमि-आबद्ध राज्य तालाब-आधारित और अंतर्देशीय जल मत्स्य पालन के माध्यम से देश के कुल मत्स्य उत्पादन में महत्वपूर्ण योगदान है. लेकिन तटीय राज्यों की तुलना में कम वित्तीय सहायता मिलने का सीधा असर मछली पालकों और राज्य की जीडीपी पर पड़ता है. हरियाणा में मत्स्य पालन को वैकल्पिक आजीविका के रूप में सक्रिय रूप से बढ़ावा दिया जा रहा है. कई किसान बेहतर लाभ के कारण पारंपरिक कृषि से मछली पालन की ओर परिवर्तित हो रहे हैं. मछली पालन ने फसल अवशेष प्रबंधन समस्या, विशेषकर पराली जलाने की समस्या में भी मदद की है, क्योंकि यह किसानों को अतिरिक्त आय का स्रोत प्रदान करता है."
मंत्री का केंद्र सरकार से आग्रह: मत्स्य पालन मंत्री श्याम सिंह राणा ने कहा कि, "बीज गुणवत्ता को मजबूत करने के लिए हरियाणा ने सभी जिलों में ब्लॉक स्तर पर मछली बीज बैंक सुनिश्चित किए हैं. भुवनेश्वर के सीएफए से आनुवंशिक रूप से सुधारित मछली प्रजातियां प्राप्त की गईं, जिससे राज्य उच्च गुणवत्ता वाले ब्रुड स्टॉक का उत्पादन कर रहा है और समग्र उत्पादकता में सुधार हो रहा है. हालांकि, मंत्री ने सभी राज्यों में गुणवत्ता वाले बीज की एकसमान उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए केंद्र सरकार से मछली बीज प्रबंधन के लिए राष्ट्रीय दिशा-निर्देश और योजनाएं जारी करने का आग्रह किया."
गन्नौर में समर्पित स्थान और करोड़ों के प्रस्ताव: मंत्री ने संरचना विकास को लेकर कहा कि, "मछली पालकों और उद्यमियों को दिल्ली की गाजीपुर और आजादपुर मंडियों की तर्ज पर सोनीपत के गन्नौर में इंडिया इंटरनेशनल हॉर्टिकल्चर मार्केट में समर्पित स्थान प्रदान किया गया है. इसके अलावा केंद्र सरकार के समक्ष रखे गए प्रस्तावों में फरीदाबाद, गुरुग्राम, हिसार, यमुनानगर और पंचकूला में आधुनिक थोक मछली बाजार स्थापित करना है, जिसकी अनुमानित लागत 300 करोड़ रुपये है. साथ ही करनाल में मछली प्रसंस्करण इकाई और सिरसा में झींगा प्रसंस्करण संयंत्र स्थापित करने के प्रस्ताव के तहत लगभग 200 करोड़ रुपये का निवेश होगा."

2026-27 वित्तीय वर्ष में विशेष ध्यान देने की जरूरत: मत्स्य पालन मंत्री श्याम सिंह राणा ने कहा कि, "गुरुग्राम के गांव सुल्तानपुर में पांच एकड़ भूमि राष्ट्रीय मत्स्य विकास बोर्ड का क्षेत्रीय केंद्र स्थापित करने के लिए हस्तांतरित की गई है, जिससे हरियाणा और पड़ोसी राज्यों को लाभ मिलेगा. वहीं, उन्होंने अधिक नीतिगत समर्थन की मांग करते हुए केंद्रीय मत्स्य पालन मंत्रालय से 2026-27 वित्तीय वर्ष में भूमि-आबद्ध राज्यों पर विशेष ध्यान देने और उनकी चुनौतियों के लिए हरियाणा में एक विशेष राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित करने पर विचार करने का भी आग्रह किया."
पंजाब की मजबूत स्थिति: पंजाब के पशुपालन, डेयरी विकास और मत्स्य पालन मंत्री गुरमीत सिंह खुडियां के अनुसार पंजाब के मत्स्य पालन क्षेत्र में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, क्योंकि 43,685 एकड़ में दो लाख टन से अधिक का प्रभावी वार्षिक उत्पादन प्राप्त हो रहा है. वहीं, झींगा पालन के प्रति भी राज्य में 1,034 एकड़ लवणीय भूमि का उपयोग लगभग 2,759 टन झींगा उत्पादन के लिए किया जा रहा है, जो स्थायी जलकृषि पद्धतियों में आर्थिक विकास में योगदान देता है. इस वृद्धि को समर्थन देने के लिए पंजाब ने किसानों को किफायती दरों पर उच्च गुणवत्ता वाले मछली बीज उपलब्ध कराने के लिए 16 सरकारी मछली बीज फार्म स्थापित किए हैं. इसके अलावा पंजाब पीएमएमएसवाई को सक्रिय रूप से बढ़ावा देते हुए विभिन्न परियोजनाओं के लिए 40 से 60 प्रतिशत तक की सब्सिडी प्रदान कर रहा है.
31.4 करोड़ रुपये की सब्सिडी: पंजाब सरकार पीएमएमएसवाई के माध्यम से मत्स्य पालन विभाग पूर्व में ही 683 लाभार्थियों को 31.04 करोड़ रुपये की सब्सिडी प्रदान कर चुका है. इस वित्तीय सहायता में मछली और झींगा पालन के लिए नए तालाब, रीसर्कुलेटिंग एक्वाकल्चर सिस्टम (आरएएस), बायोफ्लोक इकाइयां, फिश फीड मिल्स और मछली व मछली उत्पादों के परिवहन के लिए वाहन सहित कई पहल शामिल हैं.
बता दें कि पशुपालन, मत्स्य पालन एवं डेयरी विकास विभाग 31 अक्टूबर 2025 को रोहू (लेबियो रोहिता) मछली को 'राज्य मछली' घोषित कर चुका है.
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