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Explainer: Gen-Z पर बदलता सियासी नजरिया, क्या हरियाणा पर भी पड़ रहा दिल्ली और झारखंड में प्रदर्शन का असर?

Gen-Z के प्रदर्शन ने राजनीतिक दलों को सोचने के लिए मजबूर कर दिया. हरियाणा में इसका असर कितना? चंडीगढ़ से भूपेंद्र जिष्टू की रिपोर्ट

GENZ Politics in Haryana
GENZ Politics in Haryana (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Haryana Team

Published : August 15, 2026 at 12:52 PM IST

7 Min Read
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चंडीगढ़: दिल्ली में जंतर मंतर पर NEET परीक्षा लीक मामले को लेकर हुए आंदोलन में युवाओं (Gen Z) को मिली सफलता और झारखंड में युवाओं के आंदोलन ने सियासी नजरिया भी बदल दिया है. सभी राजनीतिक दलों ने बदले दौर में हालातों को समझते हुए युवाओं से जुड़े मुद्दों पर बात करना शुरू कर दिया है. वहीं हरियाणा के सभी सियासी दल, क्या विपक्षी दल कांग्रेस, जेजेपी और इनेलो बल्कि सत्ता पक्ष यानी बीजेपी भी युवाओं को साधने के लिए मैदान में अपने अपने कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार कर दी है. Gen Z के भविष्य को लेकर सभी दल खुदको उनका हितैषी जताने में जुट गए हैं.

Gen Z के आंदोलन का अब बीजेपी पर भी दिख रहा असर! जंतर-मंतर और झारखंड में जेन-जी के प्रदर्शन के बाद हरियाणा बीजेपी युवाओं के साथ संवाद करने में जुटती दिखाई दे रही है. Gen Z को लेकर पार्टी और सरकार का फोकस बदलता दिख रहा है . वह सिर्फ उनके लिए योजनाओं और राजनीतिक कार्यक्रमों तक सीमित नहीं रह गया है. अब खुद हरियाणा के सीएम नायब सैनी सीधे युवाओं के बीच पहुंचकर उनसे न सिर्फ संवाद कर रहे हैं बल्कि उनकी बात भी सुन रहे है. पार्टी स्तर पर बीजेपी अध्यक्ष डॉ. अर्चना गुप्ता Gen Z से संवाद कर रहीं हैं.

राजनीति के केन्द्र में अब Gen-Z (ETV Bharat)

सीएम नायब सैनी का युवाओं पर फोकस: अब राजनीतिक तौर पर Gen Z की अहमियत कितनी हो गई है. इसका अंदाजा इस बात से लग जाता है कि सीएम ने 6 अगस्त को सोनीपत में प्रदेशभर से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छतों से सीधी बात की. जिसमें छात्रों ने भी विभिन्न सवाल रखे. हालांकि सीएम से पहले बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष अर्चना गुप्ता पानीपत और सोनीपत के कोचिंग सेंटर पहुंचीं थीं. जहां उन्होंने छात्रों जुड़े मुद्दों पर चर्चा की.

सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर से भी की बात: सीएम और खेल मंत्री ने इस मौके पर खिलाड़ियों की उपलब्धियों का जिक्र करते हुए युवाओं से प्रदेश और देश का नाम रोशन करने का आह्वान भी किया. उसके बाद मुख्यमंत्री और खेल मंत्री ने सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर से भी बात की. यह बातचीत इसलिए भी अहम हो जाती है कि Gen Z के इस दौर में सोशल मीडिया इन्फ्यूएंसर की अहम भूमिका है . इस दौरान उन्होंने युवाओं से कहा कि वे ऐसा कोई कंटेंट न डालें जिससे समाज पर नकारात्मक प्रभाव पड़े.

12 साल से सत्ता से बाहर कांग्रेस का Gen Z करेंगे उद्धार? जंतर मंतर पर NEET परीक्षा के लीक होने के विरोध का बाहर से खुलकर समर्थन करने वाली कांग्रेस पार्टी अब उस आंदोलन को मिली जीत को जहां Gen Z की सफलता मान रही है, वहीं Gen Z की इस पीढ़ी को पार्टी ने अपनी प्राथमिकता में सूची में ऊपर कर लिया है. एक तरफ राहुल गांधी देशभर में छात्रों की गूंज कार्यक्रम करके Gen Z की पीढ़ी की आवाज को मंच देकर उन्हें अपने पाले में करते दिख रहे हैं. वहीं अब हरियाणा और केंद्र की सत्ता से करीब 12 साल से बाहर चल रही कांग्रेस को इस मुहिम से उसकी सत्ता वापसी की उम्मीद जगती दिखाई दे रही है.

GENZ Politics in Haryana
हरियाणा में Gen Z की ताकत (ETV Bharat)

युवाओं के लिए सड़कों पर उतरेगी कांग्रेस: राहुल गांधी की मुहिम छात्रों की गूंज की तर्ज पर हरियाणा कांग्रेस पंचकूला में HKRM प्रदर्शन करने जा रही है. जिसमें वे हरियाणा के युवाओं को पक्की नौकरी देने के लिए आवाज उठाएंगे. वहीं HKRN के तहत लगे कर्मचारियों को रेगुलर कर्मचारियों की तरह सुविधाएं देने की मांग करेंगे. इस प्रदर्शन को लेकर कांग्रेस की तैयारियों का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इस प्रदर्शन में पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष के साथ साथ तमाम विधायक और सांसद भी मौजूद रहेंगे.

जेजेपी भी युवाओं को अपने पक्ष में करने में जुटी: 2019 में बीजेपी की हरियाणा में सहयोगी रही जननायक जनता पार्टी भी Gen Z के इस दौर में खुद को फिर से खड़ा करने की उम्मीद कर रही है. दिल्ली के जंतर-मंतर और झारखंड में Gen Z के छात्र आंदोलन से प्रभावित होकर हरियाणा में अब सामूहिक छात्र संघर्ष समिति के गठन की तैयारी कर रही है. जिसके तहत जेजेपी अपनी छात्र इकाई INSO प्रदेश के विभिन्न राजनीतिक दलों से जुड़े छात्र संगठनों को एक मंच पर लाने की पहल करेगी.

आज देश की दिशा और दशा को जेन-जी या कहें छात्र बदल सकते हैं. INSO, कांग्रेस की NSUI, SFI, ABVP सहित विभिन्न छात्र संगठनों को साथ लेकर सामूहिक छात्र संघर्ष समिति बनाई जाएगी. समिति का नेतृत्व INSO के पास ही रहे, ये जरूरी नहीं है.- दिग्विजय चौटाला, जेजेपी नेता

इनेलो को भी दिख रही युवाओं में सत्ता वापसी की उम्मीद! इतना ही नहीं इंडियन नेशनल लोकदल तो दिल्ली जंतर मंतर के आंदोलन से पहले ही Gen Z के साथ खड़ी हो चुकी थी. पार्टी के विधायक अर्जुन चौटाला तो पहले ही खुदको कॉकरोच पार्टी के खुद को पहले विधायक बता चुके थे. वे खुलकर इनके समर्थन में सामने आ गए थे. जब दिल्ली में आंदोलन शुरू हुआ तो इनेलो उस आंदोलन के साथ खड़ी दिखाई दी. खुद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अभय चौटाला जंतर मंतर पहुंचे थे. इस दौरान अभय चौटाला ने सरकार की नीति एयर उसके कामकाज पर जमकर निशाना साधा था.

क्या सच में राजनीतिक दलों को है युवाओं की चिंता या बड़े वोट बैंक पर नजर? इस बात को लेकर वरिष्ठ पत्रकार राजेश मोदगिल कहते हैं कि "इसमें कोई दो राय नहीं है कि राजनीतिक दलों को जंतर मंतर प्रदर्शन और झारखंड आंदोलन ने नए सिरे से सोचने के लिए मजबूर कर दिया है. पार्टियों को भी अब अपनी कार्य प्रणाली में Gen Z के हौंसलों कि वजह से बदलाव करना पड़ रहा है. यह सबसे बड़ा वित्त बैंक है, इसलिए क्या सत्ता पक्ष, क्या विपक्ष सभी को अपनी अपनी मौजूदगी इस पीढ़ी के बीच दिखाने की भी मजबूरी हो गई है. निश्चित तौर पर अभी जो देश में माहौल है. उसका हर पार्टी को एहसास है, तभी सभी दल कुछ ऐसा करने की जरूरत समझने लगे हैं, जो उनको Gen Z की इस पीढ़ी से जुड़े. यह बदलाव सही दिशा में हो इस पर ज्यादा ध्यान देने की जररत है."

'Gen Z को प्राथमिकता दे रहे राजनीतिक दल': वहीं राजनीतिक मामलों के जानकार धीरेंद्र अवस्थी कहते हैं कि "Gen Z ने जिस तरह सत्ता को चुनौती दी है वह सभी राजनीतिक दलों के लिए एक सबक भी है और विचार करने का विषय भी है. सत्ता लोगों से दूर होती जाती है, तो ऐसे हालातों में इस तरह का बदलाव भी जरूरी है. Gen Z ने अपनी ताकत दिखाकर यह जता दिया है कि अगर वह एकजुट हो जाएं तो कोई भी बदलाव लाया जा सकता है. इसलिए अब सब राजनीतिक दल उसी लाइन पर चलते हुए Gen Z को अपनी प्राथमिकता में रख रहे हैं."

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