क्या सच में हरियाणा में बढ़ जाएंगे दूध के दाम? जानिए इसके पीछे की पूरी कहानी
हरियाणा में सितंबर से 100 रुपये प्रति लीटर की दर से दूध मिलेगा. पशुपालकों ने बैठक कर मूल्य बढ़ाने का फैसला किया है.

Published : August 31, 2026 at 8:54 PM IST
|Updated : August 31, 2026 at 10:05 PM IST
करनालः त्योहारी सीजन शुरू होने जा रहा है. लेकिन चीनी के बाद अब हरियाणा में दूध और इससे जुड़े अन्य उत्पादों की कीमतों में भी बढ़ोतरी होने जा रही है. राज्य के कई जिलों के पशुपालक पंचायतों में पशुपालकों और किसान संगठनों ने कीमतों में बढ़ोतरी पर फैसला लिया है. कुरुक्षेत्र, हिसार, सिरसा, हांसी, कैथल और जींद के विभिन्न ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालकों की पंचायतों ने यह निर्णय लिया है कि सितंबर माह से भैंस का दूध 100 रुपये प्रति लीटर और गाय का दूध 80 रुपये प्रति लीटर के हिसाब से बेचा जाएगा. इसके साथ ही पशुपालकों ने घी और लस्सी के दाम भी नए सिरे से तय किए हैं. आने वाले समय में इसका असर सहकारी और निजी कंपनियों के दुग्ध उत्पादों पर भी पड़ेगा.

गाय का घी 2,500 रुपये प्रति किलोः भैंस का घी 1,500 रुपये प्रति किलो, गाय का घी 2,500 रुपये प्रति किलो और लस्सी 20 रुपये प्रति लीटर बेचने पर सहमति बनी है. गांवों में इन नियमों को सख्ती से लागू करने के लिए यह फैसला भी लिया गया है कि तयशुदा दाम से कम पर दूध बेचने वाले पशुपालक पर 5,100 रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा.
अब गांव में फ्री में नहीं मिलेगी लस्सीः मौजूदा समय में हरियाणा में सामान्यत भैंस का दूध ₹80 लीटर जबकि गाय का दूध ₹60 लीटर बेचा जा रहा है. भैंस का देसी घी ₹1200 किलोग्राम था जो अब 1500 कर दिया है. गाय का देशी घी 1800 से 2000 रुपए किलोग्राम मिलता था. जिसका रेट ₹2500 प्रति किलोग्राम निर्धारित किया गया है. हालांकि जो ग्रामीणों ने लस्सी को लेकर फैसला लिया है, पहले गांव में लस्सी फ्री में ही दिया जाता था. लेकिन अब उसका भी ₹20 लीटर के हिसाब से रेट निर्धारित किया गया है.

प्रतिदिन करीब 320 लाख लीटर दूध का होता है उत्पादनः कुरुक्षेत्र के रिटायर्ड पशु चिकित्सक डॉ. मुल्तान सिंह के अनुसार "पशु जनगणना के अनुसार हरियाणा में लगभग 15 लाख गाय हैं. जबकि राज्य में करीब 59 लाख भैंसें हैं. ताजा आंकड़ें बताते हैं कि हरियाणा में प्रतिदिन दूध उत्पादन करीब 320 लाख लीटर होता है."

राज्य में प्रति व्यक्ति प्रतिदिन 1112 ग्राम दूध उपलब्ध हैः हरियाणा सरकार के आंकड़ों के अनुसार 2023-24 में 122.20 लाख टन प्रतिदिन दूध का उत्पादन होता है. वहीं इस अवधि में दूध की खरीद की क्षमता 2088 लाख लीटर प्रतिदिन है.वहीं दूध ठंडा करने वाले केंद्रों की क्षमता राज्य में 7.16 लाख लीटर प्रतिदिन है. दूसरी ओर 2023-24 में प्रति व्यक्ति प्रतिदिन 1105 ग्राम दूध उपलब्ध है. वर्तमान में प्रति व्यक्ति प्रतिदिन 1112 ग्राम होने का अनुमान है.

लागत में भारी उछाल और आर्थिक संकटः पशुपालकों की बैठक के बारे में जानकारी देते हुए पशुपालक गजे सिंह ने बताया कि "पिछले कुछ वर्षों में पशु चारे, खल, बिनौले और स्वास्थ्य सेवाओं के दामों में कई गुना बढ़ोतरी हुई है. बढ़ती लागत और स्थिर बिक्री मूल्य के कारण डेयरी व्यवसाय लगातार घाटे का सौदा साबित हो रहा है. बचत न होने के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में लोग तेजी से पशुपालन छोड़ रहे हैं. किसान संगठनों का तर्क है कि 100 रुपये प्रति लीटर की दर से भी किसानों को बहुत बड़ा मुनाफा नहीं होगा, लेकिन कम से कम यह व्यवसाय को पूरी तरह डूबने से बचाने में मदद करेगा."

आम उपभोक्ता की रायः आम उपभोक्ताओं का एक वर्ग पशुपालकों के इस कदम को व्यावहारिक मान रहा है. स्थानीय निवासी रोशन शर्मा ने बताया कि "पशुपालकों की मेहनत, समय और परिवार के श्रम को देखते हुए उन्हें उनकी उपज का सही मूल्य मिलना चाहिए, जिससे उपभोक्ताओं को भी मिलावट रहित शुद्ध दूध मिल सके."

एक मंच पर दूध की न्यायसंगत कीमत तय होः वहीं डेयरी फार्मर संगठन के प्रेसिडेंट हरमीत सिंह खैरा का कहना है कि "यह लड़ाई केवल छोटे पशुपालकों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए. देश के बड़े डेयरी संगठनों और फार्मर्स को भी एक मंच पर आकर दूध का एक न्यायसंगत और न्यूनतम मानक मूल्य तय करना होगा. क्योंकि दूध का मनमाने रेट पर लिया जा रहा है जिससे डेयरी फार्मर को बड़ा नुकसान हो रहा है. बड़े डेयरी फार्मर दूध के रेट ना मिलने के चलते नुकसान में जा रहे हैं क्योंकि फिड, मेडिसिन, चारा का हर चीज पहले से दो से तीन गुना महंगी हो चुकी है".

10 सितंबर को कुरुक्षेत्र किसान महापंचायतः अभी तक दूध की फैट सामग्री के आधार पर मूल्य निर्धारण का कोई स्पष्ट क्राइटेरिया जारी नहीं किया गया है, लेकिन उम्मीद जताई जा रही है कि नए नियम लागू होने के साथ ही यह व्यवस्था भी पारदर्शी की जाएगी. किसान नेता प्रिंस का कहना है "डेयरी व्यवसाय के भविष्य और दूध के दामों की भावी रणनीति को लेकर 10 सितंबर को कुरुक्षेत्र के पिहोवा में एक बड़ी किसान महापंचायत बुलाई गई है, जिसमें उत्तर भारत के कई किसान प्रतिनिधि और डेयरी फार्मर हिस्सा लेंगे. इस महापंचायत में लिए जाने वाले फैसले यह तय करेंगे कि हरियाणा का यह निर्णय एक क्षेत्रीय पहल बनकर रहेगा या पूरे देश के डेयरी क्षेत्र में यह लागू होगा".


