हिसार की 66 गौशालाओं में आर्थिक तंगी, 52 हजार गोवंश प्रभावित, 10 महीने से ग्रांट अटकी, दान और उधार के सहारे चल रही गौशालाएं
दस महीनों से ग्रांट लंबित होने से हरियाणा की 697 गौशालाएं प्रभावित हुई है.

Published : February 23, 2026 at 12:43 PM IST
हिसार: हरियाणा में पंजीकृत 697 गौशालाओं को पिछले दस महीनों से सरकारी ग्रांट नहीं मिली है, जिससे हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं. इन गौशालाओं में चार लाख से अधिक गोवंश संरक्षित हैं. संचालकों का कहना है कि पिछले वर्ष सरकार ने करोड़ों रुपये का बजट जारी करने की घोषणा की थी, लेकिन लंबा समय बीत जाने के बाद भी राशि जारी नहीं हुई. आलम यह है कि गौशालाओं में चारे, दवाइयों और अन्य आवश्यक संसाधनों का गंभीर संकट खड़ा हो गया है. सर्दी के मौसम में पशुओं को सुरक्षित रखने के लिए पर्याप्त इंतजाम न होने से चिंता और बढ़ गई है.
66 गौशालाएं संकट में: हिसार जिले में शहर और गांवों में कुल 66 गौशालाएं और नंदीशालाएं पंजीकृत हैं, जिनमें करीब 52 हजार पशु संरक्षित हैं. इनमें लगभग एक दर्जन गौशालाएं ऐसी हैं, जहां सर्वाधिक गोवंश है. अधिकांश गौशालाओं में सूखे चारे की व्यवस्था गौ सेवा आयोग से मिलने वाली ग्रांट पर निर्भर करती है. मार्च 2025 में 59 गौशालाओं को 8 करोड़ 95 लाख 10 हजार 500 रुपये की ग्रांट जारी की गई थी, लेकिन उसके बाद से कोई राशि नहीं आई. अब सभी गौशालाओं ने पोर्टल पर आवेदन कर रखा है, परंतु 10 महीने से भुगतान न होने के कारण चारे का संकट गहराता जा रहा है. कई गौशालाओं में केवल 10 दिन का सूखा चारा ही शेष बचा है.

दान और उधार के सहारे चल रही व्यवस्था: गौशाला संचालकों का कहना है कि बजट न मिलने के कारण उन्हें दानदाताओं और समाजसेवियों की मदद लेनी पड़ रही है. कई स्थानों पर चारा उधार में लाया जा रहा है. मंगाली स्थित श्री बालाजी गौशाला समिति के नरेश सिंघल ने बताया कि, "जब से सरकार ने ग्रांट देना शुरू किया था, तब संचालन में सहूलियत हुई थी, लेकिन अब देरी से भारी परेशानी हो रही है. संचालकों को रोजमर्रा के खर्च के लिए लोगों से चंदा एकत्रित करना पड़ रहा है, जिससे आर्थिक दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है."
दिल्ली रोड की बड़ी गौशाला में भी कमी: शहर की प्रमुख गौशाला श्री हरियाणा कुरुक्षेत्र गौशाला दिल्ली रोड में तीन हजार से अधिक गोवंश हैं. यहां पशुओं के इलाज के लिए आधुनिक मशीनों से युक्त अस्पताल भी है. साथ ही पशुपालन विभाग की इंफर्मरी में सड़क हादसों में घायल पशुओं का उपचार किया जाता है, लेकिन ग्रांट न मिलने से यहां भी सूखे चारे और दवाइयों की कमी महसूस की जा रही है. यहां संचालकों का कहना है कि फिलहाल दान और सहयोग से काम चलाया जा रहा है, पर यदि शीघ्र ग्रांट नहीं मिली तो आगामी माह गंभीर स्थिति उत्पन्न हो सकती है.
गौ सेवा महासंघ ने जताई चिंता: गौ सेवा महासंघ के प्रधान जगदीश मलिक के अनुसार वर्ष 2025-26 के लिए 595 करोड़ रुपये का बजट प्रस्तावित था. एक अप्रैल 2025 से अब तक कोई नई राशि जारी नहीं हुई है. उन्होंने कहा कि, "चारे की बढ़ती कीमतों के बीच बिना सरकारी सहायता के गौशालाओं का संचालन अत्यंत कठिन हो गया है. यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो कई गौशालाओं को पशुओं के भरण-पोषण में गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा."
गौ सेवा आयोग का दावा: हरियाणा गौ सेवा आयोग के चेयरमैन श्रवण गर्ग ने कहा कि, "गौशालाओं के विकास के लिए सरकार निरंतर प्रयासरत है. 25 मार्च के बाद हिसार जिले की गौशालाओं को 88.54 लाख रुपये की ग्रांट जारी की गई थी और अब 70 करोड़ रुपये के चेक तैयार हैं, जो शीघ्र ही जारी किए जा सकते हैं. गौशालाओं को किसी प्रकार की परेशानी नहीं होने दी जाएगी और सरकार इस दिशा में गंभीरता से कार्य कर रही है."
राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी तेज: वहीं, हिसार के सांसद जयप्रकाश ने हरियाणा सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि, "क्षेत्र की गौशालाओं की स्थिति में सुधार की आवश्यकता है. गौशालाओं के रखरखाव, शेड निर्माण और चारा काटने की मशीन जैसी मूलभूत जरूरतों के लिए पर्याप्त धनराशि उपलब्ध कराई जानी चाहिए. समय पर अनुदान न मिलने से गौशालाओं की माली हालत बिगड़ रही है और पशुओं के संरक्षण पर असर पड़ रहा है."
जल्द समाधान की मांग: गौशाला संचालकों और समाजसेवियों की मांग है कि सरकार तुरंत बकाया ग्रांट जारी करे, ताकि चारे और दवाइयों की कमी दूर हो सके. प्रदेशभर में 697 गौशालाओं और लाखों गोवंश के संरक्षण के लिए नियमित और समय पर आर्थिक सहायता आवश्यक है. यदि शीघ्र निर्णय नहीं लिया गया तो आने वाले दिनों में स्थिति और गंभीर हो सकती है.
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