हरियाणा डीजीपी ओपी सिंह को मधुबन में दी गई ऐतिहासिक विदाई, रस्सी से खिंची गई कार, दिया गया गार्ड ऑफ ऑनर
हरियाणा पुलिस अकादमी मधुबन में डीजीपी ओपी सिंह को गरिमामय विदाई दी गई.

Published : December 31, 2025 at 3:19 PM IST
|Updated : December 31, 2025 at 3:39 PM IST
करनाल : हरियाणा पुलिस के पुलिस महानिदेशक ओपी सिंह के सेवानिवृत्त होने पर करनाल स्थित हरियाणा पुलिस अकादमी, मधुबन में एक भव्य, गरिमामयी और भावनाओं से भरा समारोह आयोजित किया गया. यह विदाई केवल एक अधिकारी को नहीं, बल्कि एक सशक्त सोच, निर्भीक नेतृत्व और ईमानदार पुलिसिंग के युग को सम्मान देने का प्रतीक बनी.

दिया गया गार्ड ऑफ ऑनर : मधुबन पुलिस अकादमी पहुंचने पर ओपी सिंह को पूरे सम्मान के साथ गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया. विदाई समारोह के दौरान पुलिस अधिकारियों ने उनकी कार को रस्सी से खींचकर उन्हें सम्मान दिया. यह दृश्य न केवल भावुक था, बल्कि पुलिस बल के भीतर उनके प्रति गहरे सम्मान और विश्वास को भी दर्शा रहा था.
"रिटायर नहीं, टायर्ड शब्द से ऐतराज":मीडिया से बातचीत में डीजीपी ओपी सिंह ने अपने जीवन और सेवा अनुभवों को साझा करते हुए कहा कि, "रिटायर शब्द से मुझे कोई परहेज नहीं है, लेकिन उसमें जो ‘टायर्ड’ शब्द है, उससे परेशानी है. इंडियन पुलिस सर्विस का जो सपना होता है, वह उन्होंने पूरी ईमानदारी और संतोष के साथ जिया है. मेरे अनुसार पुलिस विभाग किसी व्यक्ति के जाने से खत्म नहीं होता, यह एक सतत चलने वाली व्यवस्था है."
डीजीपी कभी रिटायर नहीं करता: ओपी सिंह ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि, "मैं मैन ऑफ द मोमेंट हूं. डीजीपी कभी रिटायर नहीं करता, लोग आते-जाते रहते हैं." उन्होंने आने वाले अधिकारियों को संदेश दिया कि, "अपराधियों से 36 का आंकड़ा बनाए रखना होगा, ठगों को लगातार दबाव में रखना होगा और आम जनता से सम्मानजनक व्यवहार करना ही सफल पुलिसिंग की पहचान है."

"अपराध केवल पुलिस की लड़ाई नहीं":उन्होंने समाज की भूमिका पर जोर देते हुए कहा कि, "सभ्य समाज में ठगी, बदमाशी और डर का कोई स्थान नहीं होना चाहिए.यह लड़ाई केवल पुलिस के गले में डाल दी गई है, जबकि यह हम सबकी जिम्मेदारी है.एक्सटॉर्शन, किडनैपिंग और कॉन्ट्रैक्ट किलिंग आज एक संगठित बिजनेस बन चुका है, जिसमें सोशल मीडिया, एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री और छुटभैया बदमाश मिलकर डर का माहौल तैयार करते हैं."
एक कॉल से डर का माहौल, सिस्टम को सबसे ज्यादा नुकसान :ओपी सिंह ने कहा कि, "एक फोन आ जाए तो ऐसा माहौल बना दिया जाता है जैसे सब खत्म हो गया हो. बाकी अपराध एक तरफ, इन्होंने पूरा सिस्टम खराब कर रखा है.ऐसे में अपराधियों के खिलाफ खड़े होना, आवाज उठाना और पुलिस को जानकारी देना हर नागरिक का कर्तव्य है."

"हर नागरिक बिना वर्दी का सिपाही":उन्होंने 1929 में पुलिस व्यवस्था की नींव रखने वाले अधिकारी का उल्लेख करते हुए कहा, " हर नागरिक बिना वर्दी का एक सिपाही है. यदि किसी को अपराध की जानकारी होते हुए भी वह पुलिस को सूचित नहीं करता, तो वह भी दोषी माना जाएगा."
जूनियर अधिकारियों को संदेश: पुलिस सेवा एक ड्रीम करियर :जूनियर अधिकारियों के लिए अपने जीवन को संदेश बताते हुए ओपी सिंह ने कहा कि, "यह लाट साहबों का देश नहीं रहा, अंग्रेज जा चुके हैं. जनता के टैक्स के पैसों से बनी इस संस्था का उद्देश्य अपराधियों से निपटना है और पुलिस का कर्तव्य है कि वह ठगों और बदमाशों को जेल तक पहुंचाए. पुलिस सेवा एक शानदार और ड्रीम करियर है, जहां सिस्टम को समस्या सुलझाने वाले और मूल्य सृजित करने वाले अधिकारियों की जरूरत है."
कबीर की पंक्ति के साथ विदाई का अंतिम संदेश:अपने सेवानिवृत्ति के अंतिम वक्तव्य में डीजीपी ओपी सिंह ने संत कबीर दास की पंक्ति के साथ अपनी बात समाप्त की-“दास कबीर जतन से ओढ़ी, ज्यों की त्यों धर दीनी चदरिया.” यह पंक्ति उनके पूरे सेवा जीवन की सादगी, ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा को स्वयं में समेटे हुए दिखाई दी.
दास कबीर जतन से ओढ़ी
— OP Singh, DGP, Haryana (@opsinghips) December 31, 2025
ज्यों की त्यों धर दीन्ही चदरिया #Glorious34Years #NewInnings pic.twitter.com/8UtenH8qzn
डीजीपी ओपी सिंह का अंतिम पत्र:डीजीपी ओपी सिंह ने सेवाकाल के अंतिम दिन हरियाणा पुलिस के जवानों और अधिकारियों के नाम अपने अनुभव को सांझा करते हुए पत्र लिखा है. इस पत्र में डीजीपी ओपी सिंह ने हरियाणा में साल 2024 के मुकाबले वर्ष 2025 में अपराध में दर्ज गिरावट, पुलिस की कार्यशैली में परिवर्तन के अलावा प्रसिद्ध अंग्रेज कवि अल्फ्रेड टेनिसन की कविता की पंक्ति व कबीर दास की पंक्तियों के साथ साथ अपने सेवा काल के अनुभव को सांझा किया है.
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