हरियाणा बोर्ड परीक्षा शुरू, एग्जाम टाइम में बच्चों पर प्रेशर न पड़े भारी, छात्रों के लिए डॉक्टर की सलाह, परिजन रहें सतर्क
हरियाणा बोर्ड परीक्षा में तनाव से बचाव को लेकर छात्रों को क्या करना चाहिए, जानने के लिए आगे पढ़ें...

Published : February 25, 2026 at 10:15 AM IST
पंचकूला: हरियाणा स्कूल शिक्षा बोर्ड की बारहवीं कक्षा की परीक्षा आज से शुरू हो चुकी है. वहीं, कक्षा दसवीं की परीक्षा कल यानी कि 26 फरवरी से शुरू होनी हैं. परीक्षा के समय में छात्रों में तनाव होना स्वाभाविक है. कई छात्र इस तनाव को खुद पर अधिक हावी कर लेते हैं, जिससे उनके स्वास्थ्य पर असर पड़ता है. ऐसे में परीक्षा के समय अधिक तनाव और खराब मनोदशा से बच्चों को दूर रखना बेहद जरूरी है. किन उपायों से बच्चों को ऐसे तनाव से दूर रखा जा सकता है, इस संबंध में ईटीवी भारत ने पंचकूला जिला अस्पताल के मनोचिकित्सक डॉक्टर मनोज कुमार से बातचीत की.
स्वस्थ जीवनशैली को अपनाएं छात्र: डॉक्टर मनोज कुमार ने बताया कि, "परीक्षा के समय छात्रों को अधिक चिंता जरूर होती है. लेकिन वह स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर चिंता और तनाव से दूरी बनाकर रख सकते हैं. इसके लिए छात्रों को स्वस्थ जीवनशैली अपनानी होगी. इसके लिए 7-8 घंटों की पूरी नींद लेनी होगी. इसके अलावा रोजाना करीब बीस-तीस मिनट व्यायाम करना चाहिए और गहरी सांस (मेडिटेशन) से भी फायदा मिलेगा. हर छात्र अपने-अपने अनुसार एडजस्ट कर इस स्वस्थ जीवनशैली को अपना सकते हैं."
संतुलित भोजन और मोबाइल-टेलीविजन से दूरी: मनोचिकित्सक डॉ. मनोज कुमार ने आगे कहा कि, "परीक्षा के समय छात्रों के लिए संतुलित आहार लेना जरूरी है, क्योंकि सामान्य दिनों के मुकाबले परीक्षा के समय अधिक ध्यान पढ़ाई पर केंद्रित होता है. इस दौरान सही खान-पान पर काफी कुछ निर्भर करता है. बेलंस्ड डाइट लेकर छात्र अपने-अपने अनुसार पढ़ाई के घंटों को व्यवस्थित कर सकते हैं, क्योंकि परीक्षा के समय में सिलेबस की रिवीजन करना जरूरी रहता है."
परिजन बच्चों के व्यवहार पर नजर रखें: डॉ. मनोज कुमार ने कहा कि, "छात्र परीक्षा की तैयारी में लगे रहेंगे, लेकिन इस दौरान परिवार की जिम्मेदारी अधिक बढ़ जाती है. किसी प्रकार की कोई समस्या पेश न आए, इसके लिए मां-पिता की निगरानी जरूरी है. परिजनों को बच्चों के व्यवहार पर नजर रखनी चाहिए. इससे स्पष्ट रूप से पता लग सकेगा कि बच्चों में कितना और कैसा परिवर्तन हो रहा है. परिजन विशेष रूप से कुछ बातों का ध्यान जरूर रखें, जिनमें- बच्चों द्वारा अधिक चिंता करना, नींद न आना, बच्चों का चिड़चिड़ा-उदास होना, खाना छोड़ देना और पढ़ाई पर फोकस न कर पाना. यदि बच्चों का व्यवहार एक सप्ताह से दस दिन तक ऐसा ही रहे तो परिजनों को तुरंत नजदीकी मनोचिकित्सक से बच्चों की जांच करानी चाहिए. परिजनों को बच्चों की दैनिक गतिविधियों पर नजर रखते हुए उनका एनर्जी का स्तर कम लगने पर भी जांच करानी चाहिए. "
परिजन बच्चों की बातों पर ध्यान दें: डॉ. मनोज कुमार ने कहा कि, "बच्चे गलत दिशा में न सोचें, इसके लिए पिरजनों को उनकी बातों पर गंभीरता से ध्यान देना चाहिए. ध्यान रखें कि बच्चों में चिंता या डिप्रेशन के लक्षण न दिखाई दें. बच्चा कैसी बातें कर रहा है, कहीं खुद को नुकसान पहुंचाने वाली बात या सोच तो नहीं रख रहा, छात्र निराशाजनक बातें न करें, इसके लिए परिजनों को सतर्क रहना जरूरी है. परिजनों द्वारा परीक्षा के समय बच्चों का हौंसला बढ़ाए रखने से नेगेटिव सोच उनसे दूर रहती है."

