हरियाणा BJP अध्यक्ष बड़ौली और सिंगर रॉकी मित्तल को दुष्कर्म मामले में कसौली कोर्ट से बड़ी राहत, पीड़िता की याचिका रद्द
पीड़िता ने 13 दिसंबर 2024 को हरियाणा भाजपा अध्यक्ष बड़ौली और रॉकी मित्तल के खिलाफ गैंगरेप का मामला दर्ज कराया था.

By ETV Bharat Himachal Pradesh Team
Published : January 8, 2026 at 11:02 PM IST
सोलन: हिमाचल प्रदेश के कसौली में दर्ज बहुचर्चित गैंगरेप मामले में कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है. हरियाणा भाजपा अध्यक्ष मोहन लाल बड़ौली और सिंगर रॉकी मित्तल के खिलाफ दर्ज मामले में पुलिस की क्लोजर रिपोर्ट को अदालत ने स्वीकार कर लिया है. साथ ही पीड़िता द्वारा केस को दोबारा खोलने के लिए दायर याचिका को भी सबूतों के अभाव में खारिज कर दिया गया है.
13 दिसंबर 2024 को कसौली पुलिस थाना में हरियाणा भाजपा अध्यक्ष मोहन लाल बड़ौली और सिंगर रॉकी मित्तल के खिलाफ गैंगरेप का मामला दर्ज किया गया था. इस केस की जानकारी सार्वजनिक रूप से 14 जनवरी 2025 को सामने आई थी. पीड़िता का आरोप था कि 23 जुलाई 2024 को उसके साथ कसौली में गैंगरेप किया गया। उसने दावा किया कि वह अपने दोस्तों के साथ घूमने आई थी, जहां होटल में आरोपियों ने उसके साथ जबरन शराब पिलाकर वारदात को अंजाम दिया।
कोर्ट ने क्लोजर रिपोर्ट को माना सही
कसौली कोर्ट ने वीरवार को इस मामले में फैसला सुनाते हुए पुलिस द्वारा दायर क्लोजर रिपोर्ट को सही ठहराया. अदालत ने माना कि जांच के दौरान मामले में कोई ठोस सबूत सामने नहीं आया, जिसके चलते केस को आगे बढ़ाना संभव नहीं है. कोर्ट ने पीड़िता की ओर से केस को दोबारा खोलने के लिए दायर याचिका को भी खारिज कर दिया. हालांकि अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि पीड़िता के पास ऊपरी अदालत में दोबारा अपील करने का कानूनी अधिकार बना रहेगा.
जांच में नहीं मिले ठोस सबूत
इस मामले में 31 दिसंबर 2025 को दोनों पक्षों के वकीलों की ओर से विस्तृत बहस की गई थी. बहस सुनने के बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया था, जिसे अब पुलिस की क्लोजर रिपोर्ट के पक्ष में सुनाया गया. कसौली पुलिस ने इस केस की जांच दो महीने से अधिक समय तक की, लेकिन कोई पुख्ता सबूत सामने नहीं आया. पीड़िता ने मेडिकल जांच करवाने से भी इनकार कर दिया था, जिससे पुलिस के लिए केस को साबित करना और कठिन हो गया.
घटना के कई महीनों बाद FIR दर्ज होने के कारण पुलिस को होटल के सीसीटीवी फुटेज, शराब के गिलास, बेडशीट जैसे अहम सबूत नहीं मिल पाए. वहीं जिस होटल में घटना का आरोप लगाया गया था, वहां के कर्मचारी भी कोई ठोस जानकारी नहीं दे सके. गौरतलब है कि कसौली कोर्ट ने 12 मार्च 2025 को भी इस केस में पुलिस की क्लोजर रिपोर्ट को स्वीकार किया था. इसके बाद पीड़िता ने सोलन जिला अदालत में रिवीजन पिटीशन दायर कर उस फैसले को चुनौती दी थी. जिला अदालत के निर्देशों के बाद कसौली कोर्ट में क्लोजर रिपोर्ट पर दोबारा सुनवाई हुई. इस सुनवाई के बाद एक बार फिर अदालत ने पुलिस रिपोर्ट को सही मानते हुए पीड़िता की याचिका को खारिज कर दिया.
पीड़िता के गंभीर आरोप
पीड़िता ने अपनी शिकायत में कहा था कि वह सहेली और बॉस अमित बिंदल के साथ कसौली गई थी. आरोप है कि होटल रोज कॉमन में आरोपियों ने जबरन शराब पिलाकर उसके साथ सहेली के सामने गैंगरेप किया और बाद में जान से मारने की धमकी दी. सभी पहलुओं की जांच के बाद कसौली पुलिस ने सबूतों के अभाव में क्लोजर रिपोर्ट कोर्ट में दायर की थी, जिसे अब अदालत ने अंतिम रूप से स्वीकार कर लिया है.
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