अंतरराष्ट्रीय शिवरात्रि महोत्सव की अंतिम संध्या बनी यादगार, हंसराज रघुवंशी ने बांधा भक्ति का समां
छोटी काशी मंडी में अंतरराष्ट्रीय शिवरात्रि महोत्सव की अंतिम संध्या में माहौल शिवमय हो गया और दर्शक झूमने को मजबूर हो गए.

By ETV Bharat Himachal Pradesh Team
Published : February 22, 2026 at 7:53 AM IST
|Updated : February 22, 2026 at 9:28 AM IST
मंडी: छोटी काशी मंडी में आयोजित सात दिवसीय अंतरराष्ट्रीय शिवरात्रि महोत्सव 2026 की अंतिम सांस्कृतिक संध्या पूरी तरह भक्ति, संगीत और उत्साह के रंग में रंगी नजर आई. यह भव्य संध्या प्रसिद्ध गायक हंसराज रघुवंशी के नाम रही. हंसराज रघुवंशी ने एक से बढ़कर एक शिव भजन गाकर सेरी-चानणी को शिवमय कर दिया. जैसे ही सेरी मंच से “बम-बम भोले”, “भोलेनाथ की शादी” और “दम-दम डमरू” जैसे लोकप्रिय भजन गूंजे, पूरा पंडाल श्रद्धालुओं की तालियों और जयकारों से गूंज उठा.
शिवरात्रि महोत्सव की आखिरी संध्या
प्रसिद्ध गायक हंसराज रघुवंशी की भावपूर्ण प्रस्तुति ने माहौल को इस कदर भक्तिमय बना दिया कि हजारों की संख्या में मौजूद दर्शक झूमने पर मजबूर हो गए. उनकी आवाज में ऐसी मिठास और ऊर्जा थी कि लोग देर रात तक कार्यक्रम स्थल पर डटे रहे. कलाकार ने लगातार कई भजन प्रस्तुत कर दर्शकों को आध्यात्मिक यात्रा पर ले जाने का अनुभव कराया. देर रात तक चले इस भव्य आयोजन के साथ ही अंतरराष्ट्रीय शिवरात्रि महोत्सव 2026 की संध्याओं का आयोजन समापन हो गया.

'हिमाचल की सांस्कृतिक पहचान'
महोत्सव की अंतिम सांस्कृतिक संध्या के मुख्य अतिथि राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ला रहे. जिन्हें आयोजन समिति द्वारा शॉल और समृद्धि चिन्ह देखकर सम्मानित किया गया. उनके साथ मंडी जिले के कई विधायक, जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी और गणमान्य लोग भी मौजूद रहे. इस अवसर पर राज्यपाल ने कहा की अंतरराष्ट्रीय शिवरात्रि महोत्सव को हिमाचल की सांस्कृतिक पहचान बताते हुए आयोजन समिति और जिला प्रशासन की सराहना की. वहीं, इस ऐतिहासिक संध्या में हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर को सेरी में पहुंचते ही स्टैंड वेलकम दिया गया. जैसे ही जयराम ठाकुर मंच पर पहुंचे, मौजूद जनसमूह ने तालियों की गड़गड़ाहट के साथ उनका स्वागत किया. आयोजन समिति द्वारा उन्हें पारंपरिक स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया.

मंडी के 500 साल पूरे होने पर स्मारक ‘प्रतीक-चिह्न’ का लोकार्पण
वहीं, राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ला ने हिमाचल प्रदेश के ऐतिहासिक नगर मंडी की स्थापना के 500 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में एक भव्य और अर्थपूर्ण स्मारक ‘प्रतीक-चिह्न’ का लोकार्पण किया गया. यह स्मारक सरदार पटेल विश्वविद्यालय, मंडी द्वारा निर्मित किया गया है, जो मंडी नगर की पांच शताब्दियों की गौरवशाली ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं धार्मिक विरासत का सशक्त प्रतीक बनकर उभरा है. राज्यपाल ने कहा कि यह प्रतीक-चिह्न सिर्फ एक स्मारक नहीं, बल्कि मंडी नगर की आत्मा और उसकी अविच्छिन्न सांस्कृतिक परंपरा का जीवंत प्रतिबिंब है. मंडी सदियों से आस्था, संस्कृति और परंपराओं का केंद्र रही है और यह स्मारक अतीत, वर्तमान और भविष्य के बीच एक मजबूत सेतु के रूप में स्थापित होगा.
"स्मारक का ध्येय वाक्य “मंडी पंचशतानि वर्षाणि अविच्छिन्ना-परम्परा” 500 सालों से चली आ रही निरंतर सांस्कृतिक धारा को सटीक रूप से अभिव्यक्त करता है. प्रतीक-चिह्न में ‘गौरव वर्ष 500’ अंकित कर मंडी की ऐतिहासिक यात्रा को रेखांकित किया गया है. ‘छोटी काशी’ के रूप में विख्यात मंडी के मंदिरों की धार्मिक पहचान, रियासती काल के महलों का वैभव और माधवराय पालकी जैसी उत्सवधर्मी लोक परंपराओं को कलात्मक रूप में इसमें समाहित किया गया है. त्रिशूल शिव-शक्ति का प्रतीक है, जो मंडी की धार्मिक चेतना को दर्शाता है, जबकि पर्वत श्रृंखलाएं और विपाशा नदी (ब्यास) नगर की भौगोलिक विशिष्टता और प्राकृतिक सौंदर्य को उजागर करती हैं." - शिव प्रताप शुक्ला, राज्यपाल

