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अजीत जोगी के पैतृक गांव का अनोखा मामला, नेशनल हाईवे के बीच हैंडपंप, पानी भरने के लिए जोखिम में जान

नेशनल-हाइवे के बीच हैंडपंप आने से पानी के लिए ग्रामीण जद्दोजहद कर रहे. एक तरफ हाईवे, दूसरी तरफ प्यास जैसे हालात बन गए हैं.

Handpump in middle of road
नेशनल हाईवे के बीच फंसा हैंडपंप, पानी भरने के लिए जोखिम में जान (ETV BHARAT CHHATTISGARH)
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By ETV Bharat Chhattisgarh Team

Published : February 20, 2026 at 7:56 PM IST

3 Min Read
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गौरेला-पेंड्रा-मरवाही- छत्तीसगढ़ के पहले मुख्यमंत्री अजीत जोगी के पैतृक गांव जोगीसार में इन दिनों विकास और बुनियादी जरूरत आमने-सामने खड़ी हैं. यहां निर्माणाधीन नेशनल हाईवे 45 के चौड़ीकरण के बाद एक हैंडपंप सड़क के ठीक बीचों-बीच आ गया है. अब हालात ऐसे हैं कि ग्रामीणों को पानी भरने के लिए तेज रफ्तार बसों और ट्रकों के बीच खड़े होकर अपनी जान जोखिम में डालनी पड़ रही है.

अजीत जोगी के पैतृक गांव का अनोखा मामला, नेशनल हाईवे के बीच हैंडपंप (ETV BHARAT CHHATTISGARH)

100 से ज्यादा परिवारों की ‘जीवनरेखा’

जोगीसार पठारी क्षेत्र में स्थित है, जहां भूजल स्तर काफी नीचे है. गांव में जलसंकट पहले से ही गहराया हुआ है. ऐसे में यह हैंडपंप करीब 100 से 150 परिवारों के लिए पीने के पानी का मुख्य सहारा है. ग्रामीण बताते हैं कि पहले यह हैंडपंप सड़क किनारे था, लेकिन निर्माणाधीन नेशनल हाईवे-45 के चौड़ीकरण के बाद यह सड़क के बीच आ गया. अब हर दिन पानी भरना किसी खतरे से कम नहीं.

गर्मी की शुरुआत हो गई है अब पानी की और परेशानी होगी. ऐसे में सड़क चौड़ी हुई और हैंडपंप सड़क के बीच आ गया अब पानी भरने जाने के दौरान बहुत डर लगता है- जय सिंह, ग्रामीण

हादसे का डर, फिर भी मजबूरी

गांव के अरुण कुमार शुक्ला और जय सिंह सहित कई ग्रामीणों का कहना है कि गर्मी की शुरुआत के साथ ही पानी की जरूरत बढ़ गई है. तेज रफ्तार भारी वाहन जब सड़क से गुजरते हैं, तो पानी भर रहे लोगों को हर पल दुर्घटना का डर सताता है. खासकर बच्चों और बुजुर्गों के लिए यह स्थिति और भी खतरनाक है.

Handpump in middle of road
नेशनल-हाइवे के बीच हैंडपंप आने से पानी के लिए ग्रामीण जद्दोजहद कर रहे (ETV BHARAT CHHATTISGARH)

हटेगा हैंडपंप तो और बढ़ेगी परेशानी

ग्रामीणों को आशंका है कि यदि हाईवे निर्माण के बाद इस हैंडपंप को हटा दिया गया, तो उन्हें पानी के लिए डेढ़ से दो किलोमीटर दूर दूसरे गांव जाना पड़ेगा. पठारी इलाके में पानी की उपलब्धता पहले ही सीमित है, ऐसे में वैकल्पिक व्यवस्था न होना बड़ी समस्या बन सकता है.

प्रशासन से मांग, अब तक सिर्फ आश्वासन

ग्रामीणों की मांग है कि हैंडपंप को सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट किया जाए या स्थायी जलापूर्ति की व्यवस्था की जाए, ताकि हादसों का खतरा खत्म हो सके. हालांकि जिम्मेदार अधिकारियों से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उनसे बात नहीं हो सकी.

एक ओर सरकार ‘हर घर नल, हर घर जल’ का दावा करती है, तो दूसरी ओर प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री के गांव में ही लोग सड़क के बीच खड़े होकर पानी भरने को मजबूर हैं. जोगीसार की यह तस्वीर विकास योजनाओं की जमीनी हकीकत पर सवाल खड़े करती है.

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