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Exclusive: मिलिये 80 करोड़ की संपत्ति दान करने वाले डॉक्टर से, जानें क्यों लिया ये फैसला ?

डॉ. कंवर ने खास बातचीत में अपनी अंतिम इच्छा भी जताई है. उन्होंने बताया कि ये फैसला उन्होंने क्यों लिया. समित कुमार की रिपोर्ट

80 करोड़ की संपत्ति कर दी दान
80 करोड़ की संपत्ति कर दी दान (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Himachal Pradesh Team

Published : August 29, 2026 at 7:00 PM IST

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Updated : August 29, 2026 at 9:53 PM IST

7 Min Read
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हमीरपुर: उखड़ रही सांस में प्राण भर देने के कारण एक डॉक्टर धरती का भगवान कहलाता है। यही डॉक्टर अगर अपने जीवन के लंबे कालखंड में मरीजों की सेवा करते हुए ढलती आयु में जीवन भर की संपत्ति दान कर दे और खुद की देह चिकित्सा संसार के उपयोग में दान कर दे तो उसे महामानव कहा जाएगा. ऐसे दानवीर इतिहास के पन्नों में अमर हो जाते हैं. ऐसे ही डॉ. राजेंद्र कंवर की प्रेरक कहानी ईटीवी पाठकों के साथ साझा कर रहा है

नादौन के जोलसप्पड़ स्थित गांव में 77 साल के डॉ. राजेंद्र कंवर घर के आंगन में मरीजों का इलाज कर रहे हैं. आस-पास के गांवों के लोगों का उनके पास चेकअप के लिए आना जाना लगा है. इसके लिए वो किसी भी मरीज से किसी तरह का शुल्क नहीं लेते हैं. लोग उन्हें कांगू वाला डॉक्टर भी कहते हैं, क्योंकि उन्होंने हमीरपुर जिले के कांगू कस्बे में कई साल बतौर डॉक्टर सेवाएं दीं और 2010 में पीएचसी कांगू से रिटायर हुए. इन दिनों डॉ. राजेंद्र कंवर चर्चाओं में हैं क्योंकि उन्होंने अपनी दिवगंत धर्मपत्नी रिटायर्ड प्रिंसिपल कृष्णा कंवर की अर्जित की गई सारी संपत्ति मेडिकल कॉलेज हमीरपुर को दान कर दी है. मेडिकल कॉलेज हमीरपुर का नया कैंपस भी जोल सप्पड़ में बना है जो उनके घर और संपत्ति से करीब 500 मीटर की दूरी पर है.

80 करोड़ के करीब है दान की गई संपत्ति की कीमत

दान की गई संपत्ति की कीमत 80 करोड़ या उससे भी अधिक हो सकती है. संपत्ति से संबंधित पूरे दस्तावेज उन्होंने 15 अगस्त को मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू को सौंप दिए. डॉ. कंवर की सौंपी गई संपत्ति में दो मंजिला बंगला, करीब पांच कनाल पांच मरला जमीन, कार, फर्नीचर और बैंक में जमा धनराशि इसमें एफडी भी शामिल हैं. इसके साथ ही कई तौले के आभूषण सब दान कर दिया.

80 करोड़ी की संपत्ति कर दी दान
दान में घर, जमीन के साथ अन्य संपत्तियां भी शामिल हैं. (ETV Bharat)

कैसे आया संपत्ति दान करने का विचार

कई बार संतान न होने पर समाज में कई बार कड़वी बातें सुननी पड़ती हैं. सबसे ज्यादा एक महिला को झेलना पड़ता है. हमने भी ये झेला है. अक्सर लोग मेरी ही पत्नी के साथ कहते थे कि इतनी बड़ी संपत्ति किसके के लिए खड़ी की है. मेरी पत्नी हमेशा कहती ये अंतिम समय में सोचा जाएगा. समाज की इन्हीं बातों को सुनकर हम दोनों के मन में संपत्ति दान करने का ख्याल आया था. ये कोई एक दिन में आया विचार नहीं था. -डॉ. राजेंद्र कंवर

डॉ राजेंद्र कंवर का घर
डॉ राजेंद्र कंवर का घर (ETV Bharat)

दूसरा मेरे सभी भाई बहनों के बच्चे संभ्रांत परिवारों से आते हैं उनके पास किसी चीज की कमी नहीं है. इसलिए मैं नहीं चाहता कि मेरे जाने के बाद इस संपत्ति के लिए कोई आपस में लड़े. मैं संतानहीन लोगों के सामने एक उदाहरण पेश करना चाहता था कि वो अपनी संपत्ति को इस तरह से दान कर सकते हैं, ताकि इसका फायदा समाज को मिल सके. मैं कब संपत्ति दान करूंगा ये मैंने अपने परिवार को भी नहीं बताया था, लेकिन मैंने उन्हें अपनी इच्छा बता दी थी. इसपर मुझे उनका समर्थन भी मिला था. 2020 में पत्नी का देहांत होने के बाद 2021 में संपत्ति दान करने के लिए वसीयत तैयार कर दी थी. 5 अगस्त 2026 को इसकी गिफ्ट डीड तैयार कर प्रशासन को सौंप दी.-डॉ. राजेंद्र कंवर

संपत्ति के सथ देह भी कर चुके हैं दान

डॉ. राजेंद्र कंवर का समाजसेवा का संकल्प संपत्ति दान करने तक सीमित नहीं है. उन्होंने मृत्यु के बाद देहदान करने का भी निर्णय लिया है. इसके लिए उन्होंने डॉ. राधाकृष्णन राजकीय मेडिकल कॉलेज के एनाटॉमी विभाग में लिखित सहमति दी है. विभाग की ओर से उन्हें इस संबंध में विशेष पहचान पत्र भी जारी किया गया है.

RAJENDRA KANWAR DONATES 80 CRORE
डॉ. राजेंद्र कंवर ने दान कर दी 80 करोड़ की संपत्ति (ETV Bharat)

आईजीएमसी से की एमबीबीएस

डॉ. राजेंद्र कंवर का जन्म हमीरपुर में हुआ. गांव में उनकी पढ़ाई लिखाई हुई. उस दौरान आस-पास कॉलेज की सुविधा न होने पर पंजाब में कॉलेज में दाखिला लिया, लेकिन उनके मन में डॉक्टर बनने की चाह थी और उन्होंने मेडिकल एग्जाम पास कर आईजीएमसी शिमला से एमबीबीएस किया और 1977 में बतौर सरकारी डॉक्टर अपनी सेवाएं शुरू की. इस दौरान उन्हें कई ग्रामीण इलाकों में अपनी सेवाएं देने का मौका मिला.

आज भी मरीजों का निशुल्क इलाज करते हैं डॉ. राजेंद्र कंवर
आज भी मरीजों का निशुल्क इलाज करते हैं डॉ. राजेंद्र कंवर (ETV Bharat)

10 भाई-बहन थे डॉक्टर कंवर

10 भाई-बहनों में डॉक्टर कंवर सब से छोटे भाई हैं. उनकी एक छोटी बहन है. सभी भाई बहन डॉक्टर, प्रोफेसर जैसे पेशे में हैं. उनके पिता भी डॉक्टर थे. उनका डॉक्टर बनने का सफर कैसे शुरू हुआ इसके बारे में डॉ. कंवर कहते हैं कि 'मेरे पिता जी खुद एक डॉक्टर थे. 60 के दशक में उस समय अस्पताल नहीं होते थे. मरीजों को देखने के लिए घर जाना पड़ता था. हम भी बचपन में पिता के साथ मरीजों को देखने के लिए जाते थे. उस दौरान हमारे पिता हमसे मरीज के लिए इंजेक्शन और अन्य दवाइयां तैयार करवाते थे. इसी दौरान मन में डॉक्टर बनने का ख्याल बचपन से ही आ गया था.

80 करोड़ की संपत्ति कर दी दान
80 करोड़ की संपत्ति कर दी दान (ETV Bharat)

एक बार टूट गया था डॉक्टर बनने का सपना

डॉ. कंवर ने बताया कि 'हाई सेकेंडरी पास करने के बाद मेरे साथ दूसरे भाई ने भी प्री मेडिकल एग्जाम पास किया, लेकिन मेरी उम्र 17 दिन छोटी थी और मुझे दाखिला नहीं मिल पाया था. इसी कारण मुझे एक साल बीएससी की पढ़ाई करनी पड़ी, लेकिन अगले साल मेरा एडमिशन आईजीएमसी में हो गया. 1983 में केमिस्ट्री लेक्चरर कृष्णा कंवर से शादी हुई. 2011 में वो भी प्रिंसिपल के पद से रिटायर हुईं. कोई संतान न होने पर हम दोनों ने बहुत पहले अपनी संपत्ति दान करने का फैसला लिया था.'

आईजीएमसी से की थी एमबीबीएस की पढ़ाई
आईजीएमसी से की थी एमबीबीएस की पढ़ाई (ETV Bharat)

ये है डॉ. कंवर की आखिरी इच्छा

जब कोई व्यक्ति अपने जीवन का सर्वस्व समाज की झोली में उड़ेल देता है, तो वो दान आने वाली अनगिनत पीढ़ियों के लिए उम्मीद और सहारे की एक ऐसी मजबूत नींव बन जाता है, जिसकी छांव में आने वाला कल संवरता है. डॉ. कंवर चाहते हैं कि 'सरकार यहां वृद्धाआश्रम चलाए या कोई एंडोक्रिनोलॉजी, रेमिटोलॉजी, जेरियाट्रिक केयर सेंटर या कोई दूसरा विभाग मरीजों के लिए यहां शुरू कर सकती है. इसके लिए मेडिकल कॉलेज को अतिरिक्त जमीन या भवन की जरूरत नहीं होगी. मेरी अंतिम इच्छा है कि जो भी संस्थान या विभाग यहां शुरू होगा सरकार उसे नोटिफाई कर दे और यहां सरकार उस संस्थान का बोर्ड भी लगा दे. साथ ही मेरी सौंपी गई संपत्ति के साथ मेरा और मेरी धर्मपत्नी का नाम भी जुड़ जाए.'

डॉ. राजेंद्र कंवर की पत्नी
डॉ. राजेंद्र कंवर की पत्नी (ETV Bharat)

पुश्तैनी संपत्ति नहीं की दान

डॉ. कंवर ने बताया कि दान की गई संपत्ति मेरी और पत्नी की अर्जित की गई है. मैंने अपनी पुश्तैनी संपत्ति दान नहीं की है. हिमाचल और पंजाब में कई जगह हमारी पुश्तैनी संपत्तियां हैं. ये संपत्ति उन्हीं को सौंपी जाएगी जिनका इसपर हक है. मेरी और मेरी पत्नी अपनी अर्जित की गई संपत्ति अपनी आंखों के सामने दान करना चाहते थे.

इस डॉक्टर ने दान की 80 करोड़ की संपत्ति (ETV Bharat)

वहीं, एसडीएम नादौन निशांत शर्मा ने कहा कि 'संपत्ति की गिफ्ट डीड के बाद संबंधित भूमि का इंतकाल भी प्रदेश सरकार यानी डॉ. राधाकृष्णन राजकीय मेडिकल कॉलेज हमीरपुर के नाम दर्ज हो चुका है. अब राजस्व रिकॉर्ड में भी सरकार इस संपत्ति की मालिक बन गई है. अनुमानित कीमत करीब 80 करोड़ रुपये बताई, हालांकि अंतिम मूल्यांकन की प्रक्रिया अभी संबंधित राजस्व अधिकारियों की ओर से की जा रही है.'

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Last Updated : August 29, 2026 at 9:53 PM IST