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ग्वालियर में संजीवनी क्लीनिक पर दिन में भी छाया अंधेरा, मोबाइल टॉर्च से हो रहा सारा काम-काज

ग्वालियर की संजीवनी क्लीनिक में 4 दिनों से नहीं है बिजली, मोबाइल टॉर्च की रोशनी में चल रहा है ओपीडी.

GWALIOR OPD MOBILE TORCHLIGHT
मोबाइल टॉर्च से हो रहा संजीवनी क्लीनिक में सारा काम (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Madhya Pradesh Team

Published : April 24, 2026 at 6:55 PM IST

3 Min Read
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ग्वालियर: मध्य प्रदेश सरकार ने मरीजों के बेहतर इलाज के लिए हर शहर और गांव में अस्पताल और संजीवनी क्लीनिक स्थापित किया है. लेकिन ग्वालियर कलेक्ट्रेट में बनी संजीवनी क्लीनिक पर पिछले 4 दिनों से मरीजों की ओपीडी से लेकर लिखा पढ़ी के काम-काज मोबाइल की टॉर्च के सहारे चल रहा है, क्योंकि यह संजीवनी क्लीनिक 4 दिनों से अंधेरे में डूबी है. मरीज आ रहे हैं, लेकिन यहां बैठे स्वास्थ्यकर्मियों के पास बिजली की कोई व्यवस्था नहीं है.

मोबाइल टॉर्च की रोशनी में कामकाज

कलेक्ट्रेट परिसर में लगे पंखे तो आम लोगों के लिए चल रहे थे, लेकिन यहीं कमरा नंबर 117 में संचालित मुख्यमंत्री संजीवनी क्लीनिक पूरी तरह अंधेरे में डूबी है. जब ईटीवी भारत की टीम अस्पताल के अंदर पहुंची, तो कमरों में रोशनदान से आ रही हल्की रोशनी मात्र थी. भरी गर्मी में भी यहां चार कर्मचारी बैठे थे. जिनमें 2 महिला कर्मचारी मरीज पंजीयन खिड़की पर थीं और 2 पुरुष कर्मचारी मोबाइल फोन के टॉर्च की रोशनी में लेखा-जोखा कर रहे थे.

मोबाइल टॉर्च की रोशनी में कामकाज (ETV Bharat)

4 दिन से नहीं थी स्वास्थ्य केंद्र पर बिजली

ओपीडी रूम में बैठी महिला कर्मचारी से ईटीवी भारत की टीम ने बात की तो उन्होंने अपना नाम बताने से तो मना कर दिया, लेकिन बिजली न होने के पीछे की वजह कैमरे पर बताई. महिला कर्मचारी ने बताया कि, "यह ओहदपुर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र है. यहां समस्या यह है कि पिछले 4-5 दिनों से केंद्र में बिजली नहीं है. जिसकी वजह से मरीज देखने से लेकर सैंपल लेने और एंट्री करने तक में परेशानी हो रही है. हर काम के लिए मोबाइल टॉर्च का इस्तेमाल करना पड़ रहा है. बाहर 42 डिग्री तापमान है, ऐसे में गर्मी में यहां बैठना पड़ रहा है"

Gwalior Clinic without electricity
ग्वालियर के संजीवनी क्लीनिक में 4 दिनों से नहीं है बिजली (ETV Bharat)

'हज़ारों का बिल बकाया, भरने के लिए बजट नहीं'

महिला कर्मचारी के मुताबिक़, "संजीवनी क्लीनिक भले ही कलेक्ट्रेट में है, लेकिन बिजली के लिए मीटर अलग है. जिसका बिल स्वास्थ्य विभाग से ही जाता है. इस केन्द्र का करीब 10-11 हजार रुपये का बिल बकाया है और स्मार्ट मीटर होने की वजह से अपने आप बिजली कट गई है. इस बारे में सीएमएचओ कार्यालय में सूचित कर दिया है, लेकिन उनका कहना है की अभी बजट नहीं है."

Gwalior Clinic electricity problem
ग्वालियर में अंधेरे में डूबा संजीवनी क्लीनिक (ETV Bharat)

ग्वालियर के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. सचिन श्रीवास्तव का इस मामले पर कहना है कि "बिल बकाया होने जैसी कोई बात नहीं है. कलेक्ट्रेट में लाइट फॉल्ट था, जिसकी वजह से बिजली की समस्या हुई थी, उसे ठीक करा दिया गया है. अब वहां बिजली की कोई समस्या नहीं है."