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3 घंटे डिजिटल अरेस्ट रहे रिटायर्ड बैंक मैनेजर, फिर अचानक जली दिमाग की बत्ती

ग्वालियर में रिटायर्ड बैंक मैनेजर का खाता खाली होते-होते बचा. पहले तो वह सायबर ठगों की धमकियों से डरे. लेकिन समय रहते चेत गए.

Gwalior digital arrest case
पुलिस से की डिजिटल अरेस्ट की शिकायत (ETV BHARAT)
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By ETV Bharat Madhya Pradesh Team

Published : October 30, 2025 at 7:03 PM IST

3 Min Read
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ग्वालियर : सायबर ठगों द्वारा डिजिटल अरेस्ट की घटनाएं कम होने का नाम नहीं ले रही हैं. हालांकि पुलिस के अवेयरनेस प्रोग्राम का असर भी दिखने लगा है. ग्वालियर में एक बार फिर सायबर ठगों ने रिटायर्ड बैंक मैनेजर को ठगने का प्रयास किया, उन्हें डिजिटल अरेस्ट भी किया, लेकिन बदमाश बैंक खाता खाली करने में असफल रहे.

अश्लील मैसेज और करोड़ों के लेनदेन का झांसा दे डराया

मामले के अनुसार देशराज सिंह चौहान रिटायर्ड बैंक अधिकारी हैं. वह ग्वालियर के पिंटोपार्क इलाके में समर्थ नगर में रहते हैं. देशराज सिंह के मोबाइल फ़ोन पर एक कॉल आया, सामने वाले ने अपना नाम विजय कुमार और ख़ुद को दूरसंचार मंत्रालय का जनसंपर्क अधिकारी बताया. उसने रिटायर्ड बैंक मैनेजर से कहा कि उनके नाम से जारी इस मोबाइल फ़ोन नंबर से कुछ अश्लील मैसेज भेजे गए हैं. मुंबई में उनके नाम पर खोले गए बैंक खाते में भी करोड़ों का लेनदेन हुआ है.

ग्वालियर सीएसपी रोबिन जैन (ETV BHARAT)

सीनियर सिटीजन को 3 घंटे तक किया डिजिटल अरेस्ट

सायबर ठगों ने देशराज को FIR की कॉपी, सुप्रीम कोर्ट का लेटर फ़र्ज़ी आधार कार्ड की कॉपियां वाट्सएप पर भेजी और 02 घंटे में दिल्ली के कनॉट प्लेस स्थित थाने आने को कहा. ठग की बात सुनकर देशराज सिंह चौहान भी डर गए. ठगों ने उन्हें 03 घंटे तक वीडियो कॉल पर डिजिटल अरेस्ट कर लिया. इसके लिए पहले एक महिला ने उन्हें वीडियो कॉल किया. खुद का नाम आरोही यादव बताया. उसने दिल्ली पुलिस की वर्दी पहनी हुई थी. उसने शुरू में उन्हें पूरे केस की डिटेल दी और 03 घंटे तक सवाल जवाब कर डराते रहे. इसके साथ ही ये महिला ने उन्हें सेटलमेंट कराने का भी ऑफर देती रही.

अपनी ही बातों में फंस गए सायबर ठग

इस सवाल जवाब की प्रक्रिया के बीच रिटायर्ड बैंक मैनेजर देशराज के दिमाग की बत्ती जली और उन्हें समझ आ गया कि उन्हें ठगने का प्रयास किया जा रहा है. क्योंकि पुलिस द्वारा सायबर ठगी के अवेरनेस प्रोग्राम में भी उन्हें बताया गया था कि कभी भी पुलिस किसी को डिजिटल अरेस्ट नहीं करती. ऐसा कोई प्रावधान ही भारतीय कानून में नहीं है.

इसी बीच जब ठगों ने उनसे कहा कि उनके आधार कार्ड के ज़रिए मुंबई के केनरा बैंक में एक बैंक खाता खोला गया है. बस ये ठग यहीं फंस गए क्योंकि 40 वर्षों तक बैंक में नौकरी कर चुके देशराज ये जानते थे कि केवल आधार से बैंक में खाता नहीं खुलता. उन्होंने यही बात ठगों के सामने कही तो ठग चुप हो गए. इसके बाद उन्होंने सवाल शुरू किए तो ठग समझ गए कि उनकी दाल नहीं गलने वाली, जिसके बाद कॉल कट कर दिया.

बचाव के लिए जागरूकता जरूरी

रिटायर्ड बैंक मैनेजर देशराज सिंह चौहान ने इस मामले की शिकायत ग्वालियर सायबर सेल पुलिस से की है. ग्वालियर सीएसपी रोबिन जैन का कहना है "कोई भी सरकारी या जांच एजेंसी के नाम पर कभी भी धमकी दे या रुपयों की डिमांड करे या रुपये ट्रांसफर करने की बात कहे तो उस पर बिल्कुल भी भरोसा ना करें. अनजान नंबर से कॉल या वीडियो कॉल के ज़रिए अधिकारी बनकर डराने वाले सायबर ठग होते हैं. इसकी शिकायत तुरंत 1930 पर कॉल कर दें या फिर नजदीकी पुलिस थाने पर दें."