अटलजी, माधवराव के बाद अब रानी मृगनयनी, नाम में उलझा ग्वालियर का रेलवे स्टेशन
ग्वालियर रेलवे स्टेशन का लगभग 500 करोड़ की लागत से हो रहा पुनर्निर्माण. सांसद भारत सिंह कुशवाह ने उठाया स्टेशन के नाम परिवर्तन का मुद्दा.

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : March 24, 2026 at 11:06 PM IST
ग्वालियर: रेलवे स्टेशन का नाम बदलने की होड़ में जहां अपने-अपने नेताओं के नामों पर बीजेपी दो फाड़ नजर आ रही है वहीं कांग्रेस ने एक नया नाम सामने लाकर सियासत गरमा दी है. पहले ही अटल बिहारी वाजपेयी और माधवराव सिंधिया के नाम पर ग्वालियर रेलवे स्टेशन का नाम रखे जाने की मांग पर बवाल हो रहा है. इस बीच नामों की फेहरिस्त में 'मृगनयनी' की एंट्री हो गई है.
देश में बदले जा रहे स्टेशनों के नाम
असल में देश भर में पिछले कुछ समय से रेलवे स्टेशनों के नाम बदलने की जैसे बयार सी आ गई है. झांसी को वीरांगना लक्ष्मीबाई झांसी रेलवे स्टेशन, हबीबगंज को रानी कमलापति रेलवे स्टेशन, इलाहाबाद रेलवे स्टेशन अब प्रयागराज जंक्शन के नाम से जाना जाता है. इसके अलावा और ना जाने कितने ही नाम बदले जा रहे हैं. इसी क्रम में जब ग्वालियर रेलवे स्टेशन अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत नए स्वरूप में तैयार हो रहा है तब इस स्टेशन का नाम बदलने की मांग भी उठा रही है.
सांसद ने उठाया रेलवे स्टेशन के नाम परिवर्तन का मुद्दा
हाल ही में लोकसभा में ग्वालियर के सांसद भारत सिंह कुशवाह ने ग्वालियर रेलवे स्टेशन का नाम भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेई के नाम पर रखने की मांग की है. लेकिन अब ऐसा लग रहा है कि स्टेशन के नाम पर सियासत होना शुरू हो गई है. जहां अब तक बीजेपी सांसद स्टेशन का नाम अटल जी के नाम पर रखवाना चाहते हैं तो वहीं सिंधिया समर्थकों ने स्टेशन का नाम स्व. माधवराव सिंधिया के नाम पर रखे जाने की रट लगा ली है. इस सब के बीच कांग्रेस विधायक सतीश सिकरवार ने भी स्टेशन का नाम ग्वालियर की रानी मृगनयनी के नाम पर रखे जाने की इच्छा जाहिर की है.

साथी सांसदों ने मेज थप-थपाकर दिया समर्थन
सांसद भारत सिंह कुशवाह ने रेल बजट के दौरान यह मांग की थी कि ग्वालियर रेलवे स्टेशन का नाम पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी के नाम पर होना चाहिए. भारत सिंह की इस मांग का समर्थन दूसरे सांसदों ने मेज थप थपाकर किया था. इसके पीछे वे पूर्व में भी तर्क दे चुके हैं कि, अटल बिहारी वाजपेयी ग्वालियर के हैं. यहीं से उन्होंने पढ़ाई की और बाद में देश के प्रधानमंत्री बने.

पूर्व सांसद ने भी अटल जी के नाम पर जताई सहमति
ग्वालियर सांसद भारत सिंह की कुशवाहा की बात का समर्थन बीजेपी के वरिष्ठ नेता और पूर्व सांसद विवेक नारायण शेजवलकर ने भी किया है. उनका कहना है कि, "यह बात बिल्कुल सही है कि अपने देश में रेलवे स्टेशनों के नाम महापुरुषों के नाम रखने की परंपरा है. मध्य प्रदेश में ही भोपाल का हबीबगंज रानी कमलापति के नाम पर किया गया. झांसी का नाम लक्ष्मीबाई के नाम पर किया गया. तो मेरा मानना है कि, जिस तरह अटल जी का जुड़ाव ग्वालियर से रहा और जिस तरह से ग्वालियर के ही अटल जी है ऐसा हम सब मानते हैं और कहते भी हैं. तो मेरा मानना है कि मांग ठीक है."
उन्होंने आगे कहा कि, "मैं भी निवेदन करूंगा सरकार से कि इस पर गंभीरता से विचार करें और इस तरह का निर्णय लें. मैं और ग्वालियर की जनता यह चाहते हैं कि इस स्टेशन का नाम भी अटल जी के नाम पर होना चाहिए."

'स्टेशन निर्माण विकास में सिंधिया परिवार की अहम भूमिका'
जहां बीजेपी के पुराने लोग पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नाम को लेकर बात रख रहे हैं तो वहीं बीजेपी में आने के बावजूद सिंधिया समर्थक ग्वालियर रियासत के पूर्व महाराज और पूर्व केंद्रीय मंत्री श्रीमंत माधवराव सिंधिया के नाम पर ग्वालियर स्टेशन का नाम बदलने की बात कह रहे हैं. सिंधिया परिवार के करीबी और पूर्व विधायक रमेश अग्रवाल का कहना है कि "स्टेशन किसने बनवाया और ग्वालियर में ट्रेन किसने चलवाई यह सब जानते हैं. ग्वालियर का स्टेशन बनवाने और यहां ट्रेन चलाने में सिंधिया परिवार की बड़ी भूमिका रही है."
'अटल जी का सम्मान, लेकिन स्टेशन को मिले माधवराव सिंधिया की पहचान'
पूर्व विधायक रमेश अग्रवाल ने कहा कि "सांसद भारत सिंह ने संसद में क्या मांग रखें, ये उनका दायित्व है लेकिन मेरा मानना है कि यह रेलवे स्टेशन सिंधिया परिवार की देन है, सिंधिया राजवंश के जमाने में स्टेशन का निर्माण हुआ, यहां तक कि माधवराव सिंधिया ने इस रेलवे के विकास में अपना सहयोग प्रदान किया. कई ट्रेनों को चालू करवाया. जितना सम्मान अटल जी का करता हूं, उतना ही सम्मान दिल से माधवराव सिंधिया का भी करता हूं. लेकिन मेरे हिसाब से स्टेशन का नाम महाराज माधवराव सिंधिया के नाम पर होना चाहिए."

सिंधिया राजपरिवार ने की थी ग्वालियर में रेल की शुरुआत
यह बात सच है कि ग्वालियर का रेलवे स्टेशन सिंधिया राजवंश ने ही बनवाया था. इसके प्रमाण रेलवे स्टेशन पर लगी पट्टिका में भी देखने को मिलते हैं. पट्टिका पर लिखा है कि महाराजा माधवराव सिंधिया ने 1899 में ग्वालियर- भिंड- ग्वालियर- शिवपुरी रेलवे की लाइन डलवाई और 1904 में ग्वालियर से सबलगढ़ और 1909 में सबलगढ़ से श्योपुर कला के बीच रेल लाइन बनी.
यह एक नैरोगेज ट्रेन थी जो ग्वालियर लाइट रेल के नाम से प्रसिद्ध हुई. इसी तरह ग्वालियर रेलवे स्टेशन के बाहर पहली छोटी रेल का इंजन आज भी रखा हुआ है जिसे नैरोगेज कहते हैं. इस पर सिंधिया राज परिवार का राजशाही चिन्ह दो सर्प और उनके बीच में सूर्य छपा हुआ है. इस इंजन वाली रेल को ग्वालियर रेल ने 1895 में यहां चलाया था. इसका निर्माण मेसर्स केर स्टुअर्ट कंपनी लिमिटेड यूनाइटेड किंगडम के द्वारा किया गया था और उस वक्त इसकी लागत 30695 रुपये थी.
'अटल जी का तो पूरा ग्वालियर, उनके नाम से कई निर्माण'
वर्तमान में ग्वालियर के रेलवे स्टेशन का लगभग 500 करोड़ की लागत से पुनर्निर्माण कराया जा रहा है. हालांकि केंद्र सरकार के द्वारा देश के बाकी स्टेशनों का पुनर्निर्माण भी चल रहा है. ऐसे में ग्वालियर भी इस योजना का हिस्सा है. रेलवे स्टेशन का नाम क्या हो इसकी सियासत में अब कांग्रेस के विधायक सतीश सिंह सिकरवार भी कूद गए हैं.
कांग्रेस विधायक सतीश सिंह सिकरवार का कहना है कि "अटल जी का तो पूरा शहर है, उनके नाम से ग्वालियर में स्मारक भी बन रहा है, ऐसे में स्टेशन का नाम अदम्य साहसी ग्वालियर की महारानी रही मृगनयनी के नाम पर रखा जाए. अटल जी हम सब के आदर और श्रद्धा के केंद्र रहे हैं. वे ग्वालियर में पैदा हुए, पले-बढ़े और पूरा शहर उनका है. अटल जी के नाम से ग्वालियर में स्मारक बन रहा है. अटल जी के नाम से ग्वालियर में माननीय अटल बिहारी वाजपेयी टूरिज्म संस्थान है. एक तरह से पूरा ग्वालियर ही अटल जी का है."
रानी मृगनयनी के नाम पर हो स्टेशन का नाम
कांग्रेस विधायक ने अपनी बात आगे बढ़ाते हुए कहा कि, "मैं चाहता हूँ कि नवरात्रि चल रही है. हम दुर्गा मां की उपासना कर रहे हैं, पूरा देश मां की उपासना में व्यस्त है. और इस अवसर पर सरकार को माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी से निवेदन करना चाहता हूं. रेल मंत्री जी से कहना चाहता हूं, जिस प्रकार आपने हबीबगंज का नाम रानी कमलापति जी के नाम पर रखा, झांसी का नाम महारानी लक्ष्मी बाई के नाम पर रखा, उसी तरह ग्वालियर रेलवे स्टेशन का नाम भी जो अदम्य साहस के दम पर ग्वालियर के एक छोटे से गांव में पैदा होकर ग्वालियर की महारानी बनी मृगनयनी, उनके नाम पर रखा जाए."
कौन हैं मृगनयनी जिनका नाम भी अब फेहरिस्त में?
मृगनयनी ग्वालियर की रानी थीं. वे 15वीं सदी में ग्वालियर के राजा मानसिंह गुर्जर की रानी थीं. अपने अदम्य साहस, असाधारण सौंदर्य और संगीत प्रेम के लिए जानी जाती थीं. उनके एक साधारण गुर्जर कन्या से रानी बनने की कहानी भी प्रचलित है. बताया जाता है कि, ग्वालियर के राजा मानसिंह एक दिन भ्रमण पर निकले थे जहां से उनका काफिला जा रहा था, वहां दो भैंसे आपस में लड़ पड़े काफिला आगे ना बढ़ सका तो राजा मानसिंह भी स्थिति देखने पहुंचे. इसी दौरान एक गुर्जर युवती निन्नी वहां आई और उसने दोनों गुस्साए भैंसों को साहस के साथ शांत कर वहां से भगा दिया.
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शर्तें पूरी होने के बाद किया था राजा से विवाह
राजा मानसिंह उस युवती के सौन्दर्य पर मोहित और पराक्रम और साहस पर फिदा हो गए और उसके परिवार के आगे विवाह प्रस्ताव भेजा. जिस पर निन्नी ने 3 शर्तों को पूरा करने पर ही राजा से शादी करने की बात रखी. राजा मानसिंह ने निन्नी की तीनों शर्तों को पूरा किया और उसके बाद दोनों का विवाह संपन्न हुआ. निन्नी यानी मृगनयनी राजा मान सिंह और ग्वालियर की रानी बनीं. ग्वालियर किले की तलहटी में रानी मृगनयनी का गुजरी महल भी बना हुआ है.
हालांकि सिंधिया परिवार ने ग्वालियर स्टेशन के नाम की मांग अभी तक नहीं की है. लेकिन सांसद भारत सिंह कुशवाह कई बार यह बात कह चुके हैं कि स्टेशन का नाम भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी के नाम पर होना चाहिए. लेकिन इस बीच अब कांग्रेस विधायक सतीश सिकरवार ने ग्वालियर के इतिहास को जोड़ते हुए रानी मृगनयनी के नाम रेलवे स्टेशन के लिए उठाकर राजनीति में चर्चा का नया विषय छेड़ दिया है.

