बुआ भतीजे में सिंधिया रॉयल फैमिली प्रॉपर्टी समझौता अभी नहीं, नए एप्लिकेशन से टली सुनवाई
ग्वालियर सिंधिया राजपरिवार की संपत्ति का विवाद, ग्वालियर जिला कोर्ट में नहीं हो सकी आपसी समझौते की प्रक्रिया, सिंधिया और बुआओं ने अंतरिम सुनवाई के लिए लगाया आवेदन. पीयूष श्रीवास्तव की रिपोर्ट.

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : July 8, 2026 at 5:17 PM IST
|Updated : July 8, 2026 at 5:47 PM IST
ग्वालियर: देश के सबसे चर्चित सिंधिया राजपरिवार के 40 हजार करोड़ की संपत्ति बंटवारा विवाद में समझौते की प्रक्रिया एक बार फिर आगे बढ़ गई है. बुधवार को जिला न्यायालय में होने वाली समझौते की औपचारिक प्रक्रिया को लेकर सुनवाई फिलहाल के लिए आगे बढ़ा दी गई है. अब मामले में अगली सुनवाई 20 जुलाई के बाद होगी.
फिर आगे बढ़ी बंटवारा विवाद में सुनवाई
ग्वालियर सिंधिया राजघराने की संपत्ति को लेकर चार दशकों से चले आ रहे बंटवारे के विवाद में समझौता आगे बढ़ गया है. सिंधिया राज परिवार के मुखिया केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और उनकी तीनों बुआओं के बीच होने वाले संपत्ति के बंटवारे का समझौता बुधवार को जिला न्यायालय में पेश नहीं हो सका. बताया जा रहा है कि, पक्षकारों के इस सुनवाई में ना जुड़ सकने की वजह से ऐसा हुआ.
क्या है सिंधिया राजघराने का संपत्ति बंटवारा विवाद?
देश के चर्चित राजवंशों में शुमार ग्वालियर का सिंधिया राजघराने में संपत्ति का विवाद 1988 में शुरू हुआ था, ये विवाद सिंधिया राजपरिवार के तत्कालीन मुखिया और पूर्व केंद्रीय मंत्री माधवराज सिंधिया और उनकी तीनों बहनें वसुंधरा राजे सिंधिया (राजस्थान की पूर्व सीएम), यधोधरा राजे सिंधिया (मप्र की पूर्व मंत्री) और उषा राजे राणा के बीच संपत्ति के बंटवारे को लेकर हुआ था. तीनों बहनों ने सिंधिया राजघराने की पैतृक संपत्ति में हिस्सेदरी मांगी थी.
साल 2001 में हुई प्लेन क्रैश दुर्घटना में माधवराव सिंधिया की मृत्यु हो गई. जिसके बाद संपत्ति विवाद माधवराव के बेटे ज्योतिरादित्य सिंधिया और उनकी तीनों बुआओं के बीच आ गया. जिसमें सिंधिया राज परिवार की लगभग 40 हजार करोड़ की संपत्तियों को लेकर बंटवारे और हक के लिए वाद दायर किये गए थे.
बुआओं के दबाव पर ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अलग से दायर किया था वाद
2010 में केस के नए नंबर के बाद सिंधिया राजपरिवार की तीनों बेटियों वसुंधरा राजे, यशोधराजे और उषा राजे ने जिला न्यायालय में पैतृक सम्पत्ति में बेटियों के समान अधिकार के तहत दावा दायर किया. जिसके बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भी अपने हक को लेकर अलग से एक याचिका दायर की. इस तरह ये दो मामले 2017 तक जिला न्यायालय में लंबित रहे. 2017 में ये बंटवारा विवाद हाईकोर्ट तक पहुंचा, जिसे सिविल रिवीजन के तहत दर्ज किया गया.

कोर्ट ने दिए थे आपसी समझौते से बंटवारे के निर्देश
जून के आखिर में जिला न्यायालय में संपत्ति बंटवारा विवाद को लेकर अदालत ने इस पारिवारिक मामले को आपसी समझा और समझौते से निपटारे की सलाह दी थी. साथ ही स्पष्ट किया था कि, सिंधिया राज परिवार के सभी पक्षकार आपसी समझौते से इस मामले का निपटारा कर तीन महीने में इसकी कंप्लायंस रिपोर्ट भी न्यायालय में पेश करेंगे. ऐसा ना होने पर पुरानी याचिका फिर बहाल की जाएगी.
न्यायालय के निर्देश पर ज्योतिरादित्य सिंधिया और उनकी बुआई सहित सभी पक्षकार आपसी समझौते से बंटवारा के लिए राजी हुए. जिला कोर्ट में इसका अवेदन भी प्रस्तुत कर बंटवारे के मसौदा तैयार होने की जानकारी दी. जिसके बाद न्यायालय में बुधवार को इस मामले में औपचारिक प्रक्रिया के तहत समझौता होना था, लेकिन पक्षकारों के कोर्ट में वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से जुड़ने में असमर्थता के चलते ये सुनवाई टल गई.

सभी पक्षों ने अंतरिम सुनवाई के लिए लगाया आवेदन
इस केस में सिंधिया के वकील प्रशांत शर्मा ने बताया की, "फिलहाल आज सुनवाई नहीं हो रही है. सभी पक्षकारों ने न्यायालय में अंतरिम सुनवाई के लिए आवेदन किया है, अब समझौते की जो भी औपचारिक प्रक्रिया है, वह 20 जुलाई के बाद हो सकती है."
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इन संपत्तियों को लेकर होना है बंटवारा
सिंधिया राज परिवार की संपत्तियां भारत समेत कई देशों में फैली है, लेकिन मुख्य रूप से ग्वालियर समेत पुणे, उज्जैन और कुछ नया ऐतिहासिक संपत्तियों को बंटवारे के दायरे में रखा गया है. जिनमें ग्वालियर के भव्य जयविलास पैलेस का नाम शामिल है. रानी महल जिसमें केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और उनकी बुआ यशोधरा राजे सिंधिया दोनों ही रहते हैं. इसके साथ ही ग्वालियर का ऊषा किरण पैलेस होटल, हिरण्यवन कोठी और छोटी विश्रांति भी शामिल है.
वहीं उज्जैन का कालीदह पैलेस भी सिंधिया राजपरिवार की मिल्कियत है, दिल्ली का सिंधिया विला, लेखा विहार, मुंबई के आलीशान सी फ्लेट्स और पुणे का पद्म पैलेस भी समझौते के दायरे में हैं.

